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चंडीगढ़ को बड़ा झटका, निजीकरण के लिए केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने कई प्रस्तावों को ठुकरा दिया

Tue, 13 Oct 2020 11:23 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 13 Oct 2020 11:23 AM IST
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shock for Chandigarh, Ministry of Power rejected many proposals for privatization
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बिजली विभाग को निजी हाथों में देने की योजना को सिरे चढ़ाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से बिजली मंत्रालय को भेजे गए कई प्रस्तावों को मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने चंडीगढ़ को विशेषज्ञों टीम देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग को भी नहीं माना है।
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चंडीगढ़ प्रशासन ने 157 करोड़ के सिक्योरिटी फंड, कर्मचारियों का भविष्य, निजीकरण में सरकार की भूमिका, बिजली विभाग की जमीन-सामान आदि का हस्तांतरण, विशेषज्ञों की टीम और बिजली मंत्रालय की निगरानी में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने समेत कई मांगें रखी थीं। बिजली मंत्रालय ने ज्यादातर मुद्दों पर असहमति जताई है। प्रशासन ने शहर के बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए डिलॉएट कंपनी को चुना था, जिसने एक रिपोर्ट बनाकर चंडीगढ़ प्रशासन को सौंपी थी।
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इस रिपोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन को कई मुद्दों पर संदेह था, जिसे लेकर प्रशासन ने मंत्रालय के सामने कुछ मांगें रखी थीं। मंत्रालय ने प्रशासन के सभी मुद्दों का सिलसिलेवार जवाब दिया है और इसकी प्रति प्रशासन को भेज दी है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि शहरवासियों से लिए गए करीब 157 करोड़ के सिक्योरिटी फंड को प्राइवेट कंपनी को सौंपना होगा। मंत्रालय ने अपने जवाब में लिखा है कि यह पैसा जनता का है और यह बाद में रिफंड किया जाता है, इसलिए जो भी बिजली का काम देखेगा, उसे यह पैसा सौंपना होगा।
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अन्य राज्यों में भी निजीकरण की प्रकिया जारी, नहीं दे सकते टीम: मंत्रालय
बिजली विभाग में कार्यरत 776 कर्मचारियों के भविष्य पर भी चंडीगढ़ प्रशासन ने मंत्रालय से स्पष्टता की मांग की थी। मंत्रालय ने कहा है कि विभाग के निजीकरण के बाद किसी भी कर्मचारी को कोई और जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती है, न ही उन्हें चंडीगढ़ से बाहर बिना उनकी मंजूरी के भेजा जा सकता है। कर्मचारियों की नियम व शर्तें पहले की तरह ही जारी रहेंगी।

प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए मंत्रालय से एक विशेषज्ञों की टीम की मांग की थी, जिसके लिए मंत्रालय ने मना कर दिया है। जवाब में कहा गया है कि देश के कई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में पूरे समय के लिए विशेषज्ञों की टीम चंडीगढ़ नहीं भेजी जा सकती है। हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर मदद की जाती रहेगी।

पहले निगमीकरण, फिर निजीकरण: मंत्रालय
विभाग को सीधे निजी हाथों में देने के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए मंत्रालय ने प्रशासन से कहा है कि वह पहले विभाग का निगमीकरण करे, उसके बाद ही निजीकरण किया जा सकता है। मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि अन्य राज्यों में भी पहले बिजली विभाग का निगमीकरण किया गया है, उसके बाद से सफलतापूर्वक निजीकरण हुआ है। इसके अलावा मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन के उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें नीति बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग की थी।


मंत्रालय ने कहा है कि चंडीगढ़ अपने स्तर पर ही विभिन्न मुद्दों पर फैसला ले सकता है। बिजली मंत्रालय की तरफ से कमेटी बनाने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि चंडीगढ़ प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि प्रशासन बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया को दिसंबर तक खत्म कर लेना चाहता है, लेकिन मंत्रालय के इन जवाबों के बाद प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया में अब समय लग सकता है।
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