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महाठगी में नए खुलासे: बैंक में खाता, फिर भी कैश में सैलरी देता था आरोपी, ड्यूटी लगाने के लिए चुनी ऐसी जगहें
Fri, 24 May 2024 06:56 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 24 May 2024 06:56 PM IST
सार
चंडीगढ़ में 800 लोगों से नौकरी के नाम पर छह करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले के आरोपी को काबू कर लिया है।
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Fraud
- फोटो : Istock
विस्तार
चंडीगढ़ में नौकरी के नाम पर ठगी का खेल जून 2023 में शुरू हुआ था। आरोपी ठेकेदार ने पंजाब एंड सिंध बैंक में खाता खुलवा रखा था लेकिन काम पर रखे गए कर्मचारियों को कैश में ही हर महीने सैलरी देता था। जो कर्मचारी पीएफ-ईएसआई की मांग करता, उसे नौकरी से निकाल देता और धमकी भी देता। उसने कर्मचारियों की ड्यूटी ऐसी जगहों पर लगाई, जहां की सफाई के मुद्दे पर निगम, सीएचबी और प्रशासन में विवाद चल रहा है। ज्यादातर कर्मचारियों की पीसीएल, धनास, मलोया में लगाई ड्यूटी लगाई गई थी। जगह के अनुसार व्हॉट्सएप ग्रुप बना रखे थे।
आरोपी ठग ने पूरा सिस्टम सरकारी की तरह से बनाया था, जिसकी वजह से किसी भी कर्मचारी को शक ही नहीं हुआ। जब भी कर्मचारी खाते में वेतन डालने की बात करते थे तो वह उन्हें कहता था कि अभी उसके पास पूरे कर्मचारी नहीं हैं। जैसे ही कर्मचारी पूरे हो जाएंगे, खाते में सैलरी आने लगेगी। पीएफ-ईएसआई की सुविधा मांगने पर लोगों को नौकरी से निकाल देता। हालांकि बाद में माफी मांगने पर फिर रख लेता इसके अलावा सिस्टम ऐसा था कि अगर किसी कर्मचारी को अपने घर के पास ड्यूटी लगवानी थी तो उसके लिए भी उसे 1000 से 1500 रुपये हर महीने अलग से देने होते थे।
सेक्टर-39 मंडी में टेबल कुर्सी लगा की भर्ती, लिए दस्तावेज
ठगी के इतने बड़े खेल ने चंडीगढ़ के पूरे सरकारी सिस्टम पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। शहर में 800 कर्मचारी बिना टेंडर के काम करते रहे लेकिन न तो उस एरिया के जेई-एसडीओ-एक्सईएन को कभी भनक लगी न किसी अन्य अधिकारी को। हैरानी की बात है कि आरोपी ने सेक्टर-39 मंडी में टेबल कुर्सी लगाकर कर्मचारियों की भर्ती की। वहीं पर उनसे दस्तावेज लिए गए लेकिन किसी को पता ही नहीं चला। फर्जीवाड़े का खुलासा अभी भी नहीं होता तो और भी भोलेभाले लोग शिकार बनते।
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जानकारों का कहना है कि बिना किसी सरकारी मदद के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता, क्योंकि ठग को यह मालूम था कि शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां की सफाई को लेकर नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है। वहां कोई भी कर्मचारी अभी सफाई करने नहीं जाता है। इस वजह से आरोपी ने वहीं कर्मियों की ड्यूटी लगाई। इनमें धनास, मलोया, सेक्टर-56, मौलीजागरां पार्ट-2 के स्मॉल फ्लैट्स का एरिया शामिल हैं।
क्या कहते हैं पीड़ित
दो महीने से नहीं मिला वेतन
मेरी कॉलोनी के तीन-चार लोग पहले से काम कर रहे थे इसलिए मैंने भी भरोसा कर लिया। मैंने एक लाख रुपये दिए हैं। मेरी ड्यूटी पहले सेक्टर-39 की मंडी में लगाई। फिर करीब तीन महीने मोहाली बॉर्डर पर पीसीएल के पास काम किया। चार महीने मलोया में ड्यूटी लगी और अब मंडी में ड्यूटी थी। वह हर महीने वेतन देता था। पैसे कैश में ही मिलते थे। पिछले दो महीने से ही सैलरी नहीं मिली थी। - मीना (40)
सेक्टर-17 के टॉयलेट पर भी की ड्यूटी
मैं 22 अगस्त से काम कर रही थी। ठेकेदार ने मुझसे 90 हजार रुपये लिए थे। पहले मेरी ड्यूटी सेक्टर-17 में बिजली दफ्तर के पास वाले टॉयलेट में लगाई थी। वहां से मुझे एक महीने की पूरी सैलरी और दूसरे महीने की आधी सैलरी मिली। इसके बाद उसने मुझे सेक्टर-8 में भेजने को कहा। मैंने मना कर दिया और घर बैठ गई लेकिन उसने मुझे अपनी बातों में फंसा लिया और कहा कि ठेका बदल गया है। फिर मुझे सेक्टर-39 की मंडी भेज दिया। यहां के बाद पीसीएल मलोया भेजा। अभी मंडी में काम कर रही थी। - सीमा (38)
कर्ज लेकर 90 हजार रुपये दिए थे
मैं जून 2023 से ही उसके पास काम कर रही थी। मेरी बच्ची छोटी थी इसलिए मैं जो पहले काम करती थी। वह छोड़ दिया था क्योंकि यहां पर सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक की ड्यूटी थी। मैंने ब्याज पर पैसे उठाकर 90 हजार रुपये दिए थे। मेरी पहले सेक्टर-39 की मंडी में ड्यूटी लगाई। फिर कई महीने पीसीएल के पास काम किया। दो महीने से सैलरी नहीं मिली है। समझ नहीं आ रहा है कि जिससे कर्ज उठाया है उसे कहां से पैसे चुकाऊं। तीन दिन से रो-रो कर बुरा हाल है। - गीता (40)
नौकरी जाने के डर से पीएफ-ईएसआई की मांग नहीं की
मुझे काम करते हुए करीब एक साल हो गया है। सबसे पहले मेरी ड्यूटी सेक्टर-39 की मंडी में लगी। उसके बाद मुझे सेक्टर-56 भेजा, फिर डड्डूमाजरा, पीसीएल के पास ड्यूटी लगाई। उसके बाद मलोया और अब धनास स्मॉल फ्लैट में ड्यूटी लगी थी। मैंने कई बार बोला कि सैलरी खाते में दो, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। नौकरी जाने के डर से कोई पीएफ-ईएसआई की मांग भी नहीं करता था। - तिलक (19)
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आरोपी ठग ने पूरा सिस्टम सरकारी की तरह से बनाया था, जिसकी वजह से किसी भी कर्मचारी को शक ही नहीं हुआ। जब भी कर्मचारी खाते में वेतन डालने की बात करते थे तो वह उन्हें कहता था कि अभी उसके पास पूरे कर्मचारी नहीं हैं। जैसे ही कर्मचारी पूरे हो जाएंगे, खाते में सैलरी आने लगेगी। पीएफ-ईएसआई की सुविधा मांगने पर लोगों को नौकरी से निकाल देता। हालांकि बाद में माफी मांगने पर फिर रख लेता इसके अलावा सिस्टम ऐसा था कि अगर किसी कर्मचारी को अपने घर के पास ड्यूटी लगवानी थी तो उसके लिए भी उसे 1000 से 1500 रुपये हर महीने अलग से देने होते थे।
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सेक्टर-39 मंडी में टेबल कुर्सी लगा की भर्ती, लिए दस्तावेज
ठगी के इतने बड़े खेल ने चंडीगढ़ के पूरे सरकारी सिस्टम पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। शहर में 800 कर्मचारी बिना टेंडर के काम करते रहे लेकिन न तो उस एरिया के जेई-एसडीओ-एक्सईएन को कभी भनक लगी न किसी अन्य अधिकारी को। हैरानी की बात है कि आरोपी ने सेक्टर-39 मंडी में टेबल कुर्सी लगाकर कर्मचारियों की भर्ती की। वहीं पर उनसे दस्तावेज लिए गए लेकिन किसी को पता ही नहीं चला। फर्जीवाड़े का खुलासा अभी भी नहीं होता तो और भी भोलेभाले लोग शिकार बनते।
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जानकारों का कहना है कि बिना किसी सरकारी मदद के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं हो सकता, क्योंकि ठग को यह मालूम था कि शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां की सफाई को लेकर नगर निगम, हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है। वहां कोई भी कर्मचारी अभी सफाई करने नहीं जाता है। इस वजह से आरोपी ने वहीं कर्मियों की ड्यूटी लगाई। इनमें धनास, मलोया, सेक्टर-56, मौलीजागरां पार्ट-2 के स्मॉल फ्लैट्स का एरिया शामिल हैं।
क्या कहते हैं पीड़ित
दो महीने से नहीं मिला वेतन
मेरी कॉलोनी के तीन-चार लोग पहले से काम कर रहे थे इसलिए मैंने भी भरोसा कर लिया। मैंने एक लाख रुपये दिए हैं। मेरी ड्यूटी पहले सेक्टर-39 की मंडी में लगाई। फिर करीब तीन महीने मोहाली बॉर्डर पर पीसीएल के पास काम किया। चार महीने मलोया में ड्यूटी लगी और अब मंडी में ड्यूटी थी। वह हर महीने वेतन देता था। पैसे कैश में ही मिलते थे। पिछले दो महीने से ही सैलरी नहीं मिली थी। - मीना (40)
सेक्टर-17 के टॉयलेट पर भी की ड्यूटी
मैं 22 अगस्त से काम कर रही थी। ठेकेदार ने मुझसे 90 हजार रुपये लिए थे। पहले मेरी ड्यूटी सेक्टर-17 में बिजली दफ्तर के पास वाले टॉयलेट में लगाई थी। वहां से मुझे एक महीने की पूरी सैलरी और दूसरे महीने की आधी सैलरी मिली। इसके बाद उसने मुझे सेक्टर-8 में भेजने को कहा। मैंने मना कर दिया और घर बैठ गई लेकिन उसने मुझे अपनी बातों में फंसा लिया और कहा कि ठेका बदल गया है। फिर मुझे सेक्टर-39 की मंडी भेज दिया। यहां के बाद पीसीएल मलोया भेजा। अभी मंडी में काम कर रही थी। - सीमा (38)
कर्ज लेकर 90 हजार रुपये दिए थे
मैं जून 2023 से ही उसके पास काम कर रही थी। मेरी बच्ची छोटी थी इसलिए मैं जो पहले काम करती थी। वह छोड़ दिया था क्योंकि यहां पर सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक की ड्यूटी थी। मैंने ब्याज पर पैसे उठाकर 90 हजार रुपये दिए थे। मेरी पहले सेक्टर-39 की मंडी में ड्यूटी लगाई। फिर कई महीने पीसीएल के पास काम किया। दो महीने से सैलरी नहीं मिली है। समझ नहीं आ रहा है कि जिससे कर्ज उठाया है उसे कहां से पैसे चुकाऊं। तीन दिन से रो-रो कर बुरा हाल है। - गीता (40)
नौकरी जाने के डर से पीएफ-ईएसआई की मांग नहीं की
मुझे काम करते हुए करीब एक साल हो गया है। सबसे पहले मेरी ड्यूटी सेक्टर-39 की मंडी में लगी। उसके बाद मुझे सेक्टर-56 भेजा, फिर डड्डूमाजरा, पीसीएल के पास ड्यूटी लगाई। उसके बाद मलोया और अब धनास स्मॉल फ्लैट में ड्यूटी लगी थी। मैंने कई बार बोला कि सैलरी खाते में दो, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। नौकरी जाने के डर से कोई पीएफ-ईएसआई की मांग भी नहीं करता था। - तिलक (19)