बहिबल-कोटकपूरा केस: उमरानंगल ने डीजीपी सैनी के निर्देश पर करवाई थी प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग
- बहिबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामलों में एसआईटी के पेश चालान में खुलासा
- एसआईटी ने पहली बार किया शिअद प्रधान सुखबीर बादल के नाम का उल्लेख
- सुबह 4:01 से 11:39 बजे तक आईजी-डीजीपी के बीच फोन पर 22 बार हुई बातचीत
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बहिबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामलों में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। कुछ दिन पहले मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बहिबल कांड में तत्कालीन एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह, तत्कालीन एसएचओ बाजाखाना अमरजीत सिंह कुलार समेत फरीदकोट के सुहेल सिंह बराड़ और मोगा के पंकज बंसल के खिलाफ अदालत में 14 पेज का चालान पेश किया था।
इसमें एसआईटी ने खुलासा किया है कि 14 अक्तूबर 2015 को तत्कालीन पुलिस कमिश्नर लुधियाना कम आईजी परमराज सिंह उमरानंगल बिना किसी अधिकार के कोटकपूरा पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस फोर्स की अगुवाई करते हुए तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी से निर्देश लेकर कोटकपूरा और बहिबल कलां में बरगाड़ी मामले में रोष जता रहे प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करवाई थी। इसमें बहिबल कलां में दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दोनों जगह कई लोग गंभीर घायल भी हो गए थे।
एसआईटी के अनुसार, 14 अक्तूबर 2015 को सुबह 4:01 बजे से लेकर 11:39 बजे तक आईजी उमरानंगल और डीजीपी सैनी के बीच फोन पर 22 बार बातचीत हुई थी। वहीं एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा की अगुवाई में पुलिस पार्टी द्वारा बहिबल कलां में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे लोगों पर बिना किसी अधिकार व कानून के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस के पास धरना उठवाने के लिए कोई कानूनी आदेश भी नहीं था। इन दोनों ही मामलों में तत्कालीन डीजीपी सैनी नामजद हो चुके हैं, जबकि कोटकपूरा केस में पहले से नामजद आईजी उमरानंगल को बहिबल केस में भी नामजद किया जा चुका है।
डीएसपी कोटकपूरा के दफ्तर में बनी थी बचाव की योजना
कोटकपूरा और बहिबल कलां में जबरन धरना खत्म करवाए जाने के बाद डीएसपी कोटकपूरा के दफ्तर में बैठ कर आईजी उमरानंगल की अगुवाई में ही पुलिस अधिकारियों द्वारा अपने बचाव की योजना बनाई गई थी। दोनों ही घटनाओं में प्रदर्शनकारियों पर क्रमवार थाना बाजाखाना और थाना सिटी कोटकपूरा में केस दर्ज किए गए।
बहिबल मामले में केस दर्ज करने के बारे में एसएचओ अमरजीत सिंह कुलार ने लिखित सूचना हवलदार काहन सिंह के हाथ थाने में भेजने का दावा किया था लेकिन हवलदार काहन सिंह ने एसआईटी को बयान दिया है कि वह न तो कोई सूचना लेकर थाने गया था और न ही केस दर्ज करवाकर एफआईआर की कापी एसएचओ को लाकर दी थी।
एसआईटी के अनुसार बाजाखाना पुलिस ने बहिबल गोलीकांड में मरने वाले गुरजीत सिंह व किशन भगवान सिंह के पोस्टमार्टम भी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस के तहत ही करवाए थे। इससे साफ है कि उनकी मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। इस चालान में एसआईटी ने 99 गवाहों की सूची के साथ साथ एसआईटी के पास दर्ज 21 गवाहों के बयान की कापियां भी लगाई हैं।
पहली बार चालान में सुखबीर बादल के नाम का उल्लेख
बहिबल केस में दाखिल चालान में एसआईटी ने पहली बार पूर्व उपमुख्यमंत्री व शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के नाम का उल्लेख किया है। एसआईटी के अनुसार बहिबल में दो लोगों की मौत के बाद अधिकारियों द्वारा अपने बचाव के लिए फरीदकोट में सुहेल सिंह बराड़ के घर एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा की जिप्सी पर खुद ही फायरिंग की गई जिसके लिए सुहेल बराड़ और पंकज बंसल के गार्ड चरनजीत सिंह की लाइसेंसी गन का इस्तेमाल किया गया।
एसआईटी का दावा है कि सुहेल व पंकज की आईजी उमरानंगल व सुखबीर बादल के साथ निजी पहचान थी और आईजी के कहने पर ही सुहेल ने अपने घर पर जिप्सी पर फायरिंग करवाई जबकि पंकज ने अपने मैनेजर संजीव कुमार के हाथ गार्ड चरनजीत की गन भेजी। सुहेल ने अपनी गन से और एसपी बिक्रमजीत सिंह ने गार्ड चरनजीत की गन से जिप्सी पर फायर किया था।
दोनों घटनाओं में एक ही पुलिस कर्मी को दिखाया घायल
कोटकपूरा व बहिबल गोलीकांड में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज दोनों ही केसों में पुलिस द्वारा फाजिल्का के मुख्य सिपाही सुरिंदर कुमार को धरनाकारियों के हाथों घायल हुआ दिखाया गया है और उसकी एमएलआर भी घटना के 6 घंटे देरी से दर्ज हुई है। इसके अलावा थाना बाजाखाना के तत्कालीन एसएचओ अमरजीत सिंह कुलार ने अपनी एमएलआर उस दिन देर शाम 08:15 पर कटवाई जबकि बहिबल केस सुबह करीब 9:30 बजे पेश आया था।
साथ ही कोटकपूरा के तत्कालीन एसएचओ गुरदीप सिंह पंधेर की योग्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसआईटी के अनुसार गुरदीप सिंह के पास एसआई का लोकल रैंक था और पंजाब पुलिस एक्ट 2007 के अनुसार उसे एसएचओ नहीं लगाया जा सकता लेकिन आईजी उमरानंगल का खास होने की वजह से उसकी तैनाती हुई थी।