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Haryana News: अस्थाई स्कूलों को मिली राहत, बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे बच्चे, शिक्षा मंत्री ने दिया आश्वासन
Wed, 10 Jan 2024 08:09 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 10 Jan 2024 08:09 PM IST
सार
हरियाणा सरकार ने करीब 60 हजार विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। वहीं अस्थाई स्कूलों को भी शिक्षा विभाग ने मोहलत दी है। बॉन्ड राशि भरने वाले स्कूलों को दो साल में नियमों को पूरा करने की छूट दी जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिक्षा विभाग ने बॉन्ड राशि न भरने वाले अस्थाई स्कूलों और उनके हजारों बच्चों को बड़ी राहत दी है। विभाग ने सशर्त इन स्कूलों के बच्चों की बोर्ड परीक्षा लेने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री के साथ प्रदेश के विभिन्न स्कूल संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक में आश्वासन दिया गया कि जो स्कूल विभाग द्वारा निर्धारित बॉन्ड राशि भर देगा, उसे दो वर्ष में नियम पूरे करने की छूट रहेगी। वहीं, अगर जो स्कूल बॉन्ड राशि नहीं भरेगा, वह इस नए शैक्षणिक सत्र से एडमिशन नहीं कर पाएगा।
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हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने बताया कि इस मामले को लेकर विभिन्न स्कूल संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चंडीगढ़ में शिक्षा मंत्री कंवरपाल से मुलाकात की थी। इस दौरान विभाग के समस्त उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में अस्थाई स्कूलों पर भारी भरकम गारंटी राशि की शर्त को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग को उठाया गया।
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उन्होंने बताया कि अस्थाई स्कूलों में पढ़ रहे 60 हजार बच्चे विभाग के निर्णय से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं और उनके परीक्षा फार्म अभी तक नहीं भरे गए हैं। बैठक में यह तर्क भी दिया गया कि अगर अस्थाई स्कूलों के बच्चों के परीक्षा फार्म नहीं भरे जाने थे तो भिवानी शिक्षा बोर्ड को इन स्कूलों में एडमिशन की अनुमति ही नहीं देनी थी।
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शिक्षा मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि बॉन्ड राशि भरने वाले स्कूलों को नियम पूरा करने के लिए दो वर्ष का समय दिया जाएगा। वहीं, अगर कोई स्कूल बॉन्ड राशि नहीं भरता है तो ऐसे स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से एडशिन पूरी तरह से बंद कर दिए जाएंगे। वहीं, इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की बोर्ड परीक्षा लेने के लिए मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल ने भी इस बात पर सहमति जताई और विश्वास दिलाया कि संबंधित स्कूल विभाग के फैसले का पालन करेंगे।