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Haryana: IAS मोना श्रीनिवास व तकन राज को बड़ी राहत, भ्रष्टाचार मामले में आरोपी बनाने का आदेश HC ने किया रद्द

Sun, 13 Jul 2025 02:46 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 13 Jul 2025 02:46 PM IST
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Big relief to Haryana IAS Mona Srinivas and Takan Raj Highcourt cancels order to accused in corruption case
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आईएएस मोना ए श्रीनिवास और तेकन राज को बड़ी राहत देते हुए भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी बनाने के निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया है। 
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लोक सेवकों के खिलाफ अभियोजन की पूर्व स्वीकृति अनिर्वाय है, बिना इसके कार्यवाही शुरू करना कानून के विरुद्ध है।
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मामला कैथल में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी में हुई वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। मुख्य आरोपी इंद्रजीत सिंह पर आरोप था कि उसने धोखाधड़ी करते हुए सरकारी राशि का गबन किया। मामला 2013 का है और उस समय मोना श्रीनिवास अतिरिक्त उपायुक्त थीं, और तेकन राज डीएसपी। 
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निचली अदालत से दोनों को आरोपी बनाने की मांग की गई थी। हालांकि, पुलिस जांच में दोनों को निर्दोष माना था और उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन की तीसरी बार दायर याचिका पर दोनों को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन जारी कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि बिना सरकारी स्वीकृति के भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम तथा आईपीसी की अन्य धाराओं में किसी भी सरकारी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मोना श्रीनिवास को उनकी स्वयं की गवाही के आधार पर आरोपी बनाया गया, जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम के खिलाफ है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने कहा कि यह समन ट्रायल के अंतिम चरण में जारी किया गया था, जब अभियोजन के 17 गवाह पहले ही पेश किए जा चुके थे। इससे यह प्रतीत होता है कि यह ट्रायल को जानबूझकर विलंबित करने का प्रयास था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए दोनों अधिकारियों को राहत दे दी।


मोना ने याचिका में बताया था कि एक फर्जीवाड़े के मामले में उनको कैथल कोर्ट ने आरोपी के तौर पर पेश होने का आदेश जारी किया है। याची पक्ष ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ हैं। याची ने बताया कि यह मामला उन्होंने ही उजागर किया और उनको ही इस मामले में आरोपी की तरह पेश होने को कहा जा रहा हैं। जब उन्हें इस घोटाले का पता चला तो उन्होंने ऑडिट करवाया और उनके एक्शन का ही नतीजा था कि यह पूरा प्रकरण सामने आ सका। इस दौरा ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। यह मामला पिछले छह साल से हाई कोर्ट में विचाराधीन था।

 
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