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पूर्व सीएम हुड्डा को हाईकोर्ट से राहत, अदालत ने कहा- ढींगरा आयोग सही लेकिन जारी नोटिस गलत

Thu, 10 Jan 2019 08:22 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 10 Jan 2019 08:22 PM IST
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big relief to former cm bhupendra singh hooda from high court on report of dhighra commission
Bhupinder singh hooda - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ढींगरा आयोग की कार्रवाई में तकनीकी खामी के चलते अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि इस रिपोर्ट को न तो प्रकाशित किया जा सकता है और न ही इसके आधार पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर कार्रवाई की जा सकती है। हुड्डा को जांच में शामिल होने के लिए जो नोटिस दिया गया था उस पर आपत्ति दर्ज करते हुए दोनों जजों ने यह भी माना कि आयोग ने पूर्व मुख्य मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जो नोटिस भेजा था, वह तय प्रावधानों के तहत नहीं था।

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 लिहाजा हाईकोर्ट ने ढींगरा आयोग की रिपोर्ट पर आगे कोई भी कार्रवाई किए जाने से इंकार कर दिया है। हालांकि हरियाणा में भूमि घोटालों की जांच के लिए गठित किए गए ढींगरा आयोग के गठन को हाईकोर्ट ने सही करार देते हुए दोनों जजों ने कहा कि इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त दस्तावेज थे।
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इस विषय पर बंटी राय
जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस अनुपेंद्र ग्रेवाल दोनों ने अपने फैसले में कहा है कि ढींगरा आयोग ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जांच में शामिल होने के लिए जो नोटिस भेजा था कि कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट की धारा-8 बी के तहत नहीं था। लेकिन दोनों की इस मामले में आगे क्या संभावना है उस पर राय अलग रही। 
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जस्टिस मित्तल ने कहा कि आयोग जांच के लिए नए सिरे से हुड्डा को नोटिस जारी कर सकता है तो जस्टिस अनुपेंद्र ग्रेवाल ने कहा कि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त 2016 को खत्म हो चुका है और ऐसे में उसे नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं है। सरकार चाहे तो नए आयोग का गठन कर सकती है।

चीफ जस्टिस करेंगे फैसला

big relief to former cm bhupendra singh hooda from high court on report of dhighra commission
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

याचिका पर खंडपीठ के दोनों ही जजों के एकमत नहीं होने के कारण अब इस याचिका को चीफ जस्टिस के समक्ष भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। अब चीफ जस्टिस इस याचिका पर सुनवाई के लिए अलग से खंडपीठ का गठन कर सकते हैं या याचिका फुल बेंच का गठन कर सुनवाई के लिए भेजी जा सकती है। हालांकि फिलहाल अब आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई न होना पूर्व सीएम हुड्डा के लिए राहत की बड़ी खबर है।

नोटिस पर आपत्ति, नहीं दिया बचाव का मौका
ढींगरा आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा 11 मार्च 2016  को नोटिस भेज आयोग के समक्ष पेश होने के आदेश दिए थे। खंडपीठ के दोनों ही जजों ने कहा ही कि आयोग अगर किसी के खिलाफ शिकायत या कोई दस्तावेज मिलने पर नोटिस भेजता है तो वह धारा-8 बी के तहत ही भेजा जाना चाहिए था। 

जांच में शामिल होने से पहले उनके खिलाफ मिली शिकायत और दस्तावेज की पूरी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी ताकि वह अपने बचाव में तथ्य या दस्तावेज पेश कर सकते। संविधान भी अनुच्छेद-14 के तहत इसका अधिकार प्रत्येक नागरिक को देता है। नोटिस एक्ट की धारा-8 बी के तहत भेजा ही नहीं गया, ऐसे में इस नोटिस को दोनों ही जजों ने अवैध माना है।
 

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