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बड़ी राहत : उल्लंघन व दुरुपयोग के बावजूद बनवा सकेंगे कन्वेयंस और लीज डीड
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकान को खरीदने के बाद कन्वेयंस व लीज डीड को उल्लंघन और दुरुपयोग के बावजूद मकान मालिक अपने नाम करा सकेगा। सीएचबी ने कन्वेयंस डीड और लीज डीड को उल्लंघनों से डी-लिंक कर दिया है। इससे सैकड़ों परिवारों को फायदा होगा। इस संबंध में सीएचबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यशपाल गर्ग की तरफ से आदेश जारी किए गए हैं।
उल्लंघन हटाने की शर्त की वजह से पहले लोगों को कन्वेयंस और लीज डीड बनवाने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब ये प्रक्रिया आसान हो जाएगी। सीएचबी के आवंटी पिछले काफी समय से ये मांग कर रहे थे। यशपाल गर्ग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सीएचबी लीज होल्ड व फ्री होल्ड पर संपत्तियों को बेचता है। कई बार लोग संपत्ति खरीदने के बाद सीएचबी की तरफ से जारी अलॉटमेंट लेटर को लेकर घर का पजेशन ले लेते हैं और घर में रहने लगते हैं। इस दौरान घर में कई तरह के बदलाव किए जाते हैं, जिससे भवन नियमों का उल्लंघन होता है। इसके बाद जब आवंटी कन्वेयंस और लीज डीड बनवाने के लिए बोर्ड के पास आता है, तो उसे पहले उल्लंघनों को हटाने के लिए कहा जाता था लेकिन अब डी-लिंक करने के बाद ये प्रक्रिया आसान हो जाएगी। हालांकि ट्रांसफर के समय विक्रेता व खरीददार को एक एफिडेविट जमा करना होगा। आवंटी को एफिडेविट देना होगा कि मौजूदा व नया उल्लंघन और दुरुपयोग के संबंध में परिणामों, कार्रवाई व जुर्माने के लिए वह जिम्मेदार होंगे। बता दें कि बोर्ड ने संपत्ति के ट्रांसफर को पहले ही उल्लंघनों से डी-लिंक कर दिया है। जिस व्यक्ति के नाम पर कन्वेयंस डीड और लीज डीड हो रही है, वह दुरुपयोग व उल्लंघन के लिए भी उत्तरदायी होगा।
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उल्लंघन हटाने की शर्त की वजह से पहले लोगों को कन्वेयंस और लीज डीड बनवाने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब ये प्रक्रिया आसान हो जाएगी। सीएचबी के आवंटी पिछले काफी समय से ये मांग कर रहे थे। यशपाल गर्ग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सीएचबी लीज होल्ड व फ्री होल्ड पर संपत्तियों को बेचता है। कई बार लोग संपत्ति खरीदने के बाद सीएचबी की तरफ से जारी अलॉटमेंट लेटर को लेकर घर का पजेशन ले लेते हैं और घर में रहने लगते हैं। इस दौरान घर में कई तरह के बदलाव किए जाते हैं, जिससे भवन नियमों का उल्लंघन होता है। इसके बाद जब आवंटी कन्वेयंस और लीज डीड बनवाने के लिए बोर्ड के पास आता है, तो उसे पहले उल्लंघनों को हटाने के लिए कहा जाता था लेकिन अब डी-लिंक करने के बाद ये प्रक्रिया आसान हो जाएगी। हालांकि ट्रांसफर के समय विक्रेता व खरीददार को एक एफिडेविट जमा करना होगा। आवंटी को एफिडेविट देना होगा कि मौजूदा व नया उल्लंघन और दुरुपयोग के संबंध में परिणामों, कार्रवाई व जुर्माने के लिए वह जिम्मेदार होंगे। बता दें कि बोर्ड ने संपत्ति के ट्रांसफर को पहले ही उल्लंघनों से डी-लिंक कर दिया है। जिस व्यक्ति के नाम पर कन्वेयंस डीड और लीज डीड हो रही है, वह दुरुपयोग व उल्लंघन के लिए भी उत्तरदायी होगा।
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