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Chandigarh News: स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, रोक के बावजूद खूब किए गए निर्माण
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हरियाणा सरकार के पास पहुंची शिकायतें, गुरुग्राम डीटीपी ने जारी किए आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में शुरू की गई स्टिल्ट प्लस 4 (बहुमंजिला) योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना पर रोक लगाए जाने के बावजूद प्रदेश के कई शहरों में बिना मंजूरी के अवैध रूप से 4 मंजिला भवनों का निर्माण किया गया है। सरकार के पास पहुंची शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अब नगर आयोजन विभाग विभाग ने ऐसे अवैध निर्माणों को गिराने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही चौथी मंजिल पर बने निर्माणों को लेकर किसी प्रकार की खरीदफरोख्त पर भी रोक लगा दी है। वहीं, इस मामले में आयोजना विभाग के अधिकारी और आर्किटेक्टस जांच के घेरे में आ गए हैं।
शहरों में बढ़ रही आबादी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 2016 में स्टिल्ट प्लस 4 की पालिसी को मंजूरी दी थी। हालांकि, चार मंजिला भवन बनाने को लेकर पड़ोसियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। पंचकूला से लेकर गुरुग्राम तक में इसको लेकर विवाद सामने आए थे। बढ़ते विरोध को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 23 फरवरी 2023 को इस पाॅलिसी पर रोक लगा दी थी। सरकार के संज्ञान में आया है कि पाॅलिसी पर रोक के बावजूद कई शहरों में आर्किटेक्ट्स ने धड़ाधड़ ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी किए और चार मंजिला भवनों का निर्माण किया गया। इस पर संज्ञान लेते हुए नगर आयोजन विभाग ने ऐसे आर्किटेक्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। साथ ही इमारतों के लिए कोई व्यवसाय प्रमाण-पत्र जारी करने पर लगाई है। जहां चौथी मंजिल के लिए भवन योजना को मंजूरी नहीं दी गई है, वहां भवन को पुराने रूप में लाना होगा और चौथी मंजिल को गिराना होगा। इस संबंध में विभाग के निदेशक के आदेशों का हवाला देते हुए गुरुग्राम के डीडीपी ने आदेश जारी किए हैं और निर्देश दिए हैं कि जहां चौथी मंजिल के लिए भवन योजना को मंजूरी नहीं दी गई है, वहीं यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी व्यवसाय प्रमाणपत्र हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के नियमों के अनुसार हैं।
एक्सपर्ट कमेटी ने दी थी रिपोर्ट
पिछले साल हुए विवाद को निपटाने के लिए सरकार की ओर से हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव की नेतृत्व में एक्सपर्ट अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने कई बडे़ शहरों में जाकर लोगों से मैनुअली और ऑनलाइन सुझाव भी मांगे थे। समय की मांग को देखते हुए कमेटी ने कुछ शर्तों के साथ स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवन निर्माण की अनुशंशा की थी। हालांकि, साल से अधिक समय होने के बाद भी सरकार की तरफ से यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में शुरू की गई स्टिल्ट प्लस 4 (बहुमंजिला) योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना पर रोक लगाए जाने के बावजूद प्रदेश के कई शहरों में बिना मंजूरी के अवैध रूप से 4 मंजिला भवनों का निर्माण किया गया है। सरकार के पास पहुंची शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अब नगर आयोजन विभाग विभाग ने ऐसे अवैध निर्माणों को गिराने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही चौथी मंजिल पर बने निर्माणों को लेकर किसी प्रकार की खरीदफरोख्त पर भी रोक लगा दी है। वहीं, इस मामले में आयोजना विभाग के अधिकारी और आर्किटेक्टस जांच के घेरे में आ गए हैं।
शहरों में बढ़ रही आबादी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 2016 में स्टिल्ट प्लस 4 की पालिसी को मंजूरी दी थी। हालांकि, चार मंजिला भवन बनाने को लेकर पड़ोसियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। पंचकूला से लेकर गुरुग्राम तक में इसको लेकर विवाद सामने आए थे। बढ़ते विरोध को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 23 फरवरी 2023 को इस पाॅलिसी पर रोक लगा दी थी। सरकार के संज्ञान में आया है कि पाॅलिसी पर रोक के बावजूद कई शहरों में आर्किटेक्ट्स ने धड़ाधड़ ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी किए और चार मंजिला भवनों का निर्माण किया गया। इस पर संज्ञान लेते हुए नगर आयोजन विभाग ने ऐसे आर्किटेक्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की है। साथ ही इमारतों के लिए कोई व्यवसाय प्रमाण-पत्र जारी करने पर लगाई है। जहां चौथी मंजिल के लिए भवन योजना को मंजूरी नहीं दी गई है, वहां भवन को पुराने रूप में लाना होगा और चौथी मंजिल को गिराना होगा। इस संबंध में विभाग के निदेशक के आदेशों का हवाला देते हुए गुरुग्राम के डीडीपी ने आदेश जारी किए हैं और निर्देश दिए हैं कि जहां चौथी मंजिल के लिए भवन योजना को मंजूरी नहीं दी गई है, वहीं यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी व्यवसाय प्रमाणपत्र हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के नियमों के अनुसार हैं।
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एक्सपर्ट कमेटी ने दी थी रिपोर्ट
पिछले साल हुए विवाद को निपटाने के लिए सरकार की ओर से हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी. राघवेंद्र राव की नेतृत्व में एक्सपर्ट अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने कई बडे़ शहरों में जाकर लोगों से मैनुअली और ऑनलाइन सुझाव भी मांगे थे। समय की मांग को देखते हुए कमेटी ने कुछ शर्तों के साथ स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवन निर्माण की अनुशंशा की थी। हालांकि, साल से अधिक समय होने के बाद भी सरकार की तरफ से यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
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