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Chandigarh News: आंशिक समझौते के आधार पर क्या रद्द की जा सकती है एफआईआर, तय करेगी बड़ी बेंच
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-सिंगल बेंच ने कानून को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए बड़ी बेंच को रेफर किया मामला
-स्पष्ट दिशा निर्देश न होने के चलते जस्टिस कुलदीप तिवारी ने उठाया है सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आंशिक समझौते के आधार पर क्या एफआईआर को आंशिक रूप से खारिज किया जा सकता है। इस विषय को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश न होने और कानून को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए जस्टिस कुलदीप तिवारी ने मामला बड़ी बेंच को रेफर कर दिया है। अब बड़ी बेंच इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेगी। जस्टिस कुलदीप तिवारी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जो आंशिक समझौतों के आधार पर एफआईआर आंशिक रूप से रद्द करने की मांग के साथ दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि यदि शिकायतकर्ता ने आरोपी से समझौता कर लिया है तो आरोपी के खिलाफ आगे की कार्यवाही न्यायालय के कीमती समय की बर्बादी होगी। क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में आरोपी को दोषी ठहराने की संभावना बहुत कम होगी। साथ ही यदि मुख्य आरोपी को केवल उसके संबंध में आंशिक समझौते के आधार पर दोषमुक्त कर दिया जाता है तो शेष के खिलाफ मुकदमा चलाना असंभव है। एकल पीठ को बताया गया कि कई मामलों में हाईकोर्ट की अन्य पीठ ने आंशिक समझौते के आधार पर एफआईआर आंशिक रूप से रद्द करने की अनुमति दी है। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने कहा कि आंशिक समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के मुद्दे को नियंत्रित करने वाले कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं। इस तथ्य के साथ कि हाईकोर्ट की अलग-अलग पीठ द्वारा परस्पर विरोधी फैसले दिए जा रहे है। ऐसे में बड़ी पीठ को संदर्भित करने के लिए यह उपयुक्त मामला है।
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-स्पष्ट दिशा निर्देश न होने के चलते जस्टिस कुलदीप तिवारी ने उठाया है सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आंशिक समझौते के आधार पर क्या एफआईआर को आंशिक रूप से खारिज किया जा सकता है। इस विषय को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश न होने और कानून को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए जस्टिस कुलदीप तिवारी ने मामला बड़ी बेंच को रेफर कर दिया है। अब बड़ी बेंच इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेगी। जस्टिस कुलदीप तिवारी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जो आंशिक समझौतों के आधार पर एफआईआर आंशिक रूप से रद्द करने की मांग के साथ दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि यदि शिकायतकर्ता ने आरोपी से समझौता कर लिया है तो आरोपी के खिलाफ आगे की कार्यवाही न्यायालय के कीमती समय की बर्बादी होगी। क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में आरोपी को दोषी ठहराने की संभावना बहुत कम होगी। साथ ही यदि मुख्य आरोपी को केवल उसके संबंध में आंशिक समझौते के आधार पर दोषमुक्त कर दिया जाता है तो शेष के खिलाफ मुकदमा चलाना असंभव है। एकल पीठ को बताया गया कि कई मामलों में हाईकोर्ट की अन्य पीठ ने आंशिक समझौते के आधार पर एफआईआर आंशिक रूप से रद्द करने की अनुमति दी है। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने कहा कि आंशिक समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के मुद्दे को नियंत्रित करने वाले कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं। इस तथ्य के साथ कि हाईकोर्ट की अलग-अलग पीठ द्वारा परस्पर विरोधी फैसले दिए जा रहे है। ऐसे में बड़ी पीठ को संदर्भित करने के लिए यह उपयुक्त मामला है।