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पंजाब में फेल हुआ चढूनी का फार्मूला: सियासी जमीन की तलाश में संगठन भी गंवाया: करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र में बिखरी यूनियन

Fri, 11 Mar 2022 11:14 AM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 11 Mar 2022 11:14 AM IST
सार

किसान आंदोलन से पहले चढूनी के संगठन का प्रभाव कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और कैथल तक सीमित था। पिछले साल तीन कृषि कानूनों के खिलाफ गुरनाम सिंह चढूनी एक बड़े किसान नेता के रूप में उभरे थे। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन में चढूनी के आक्रामक रवैये के चलते प्रदेश और पंजाब के किसानों ने उनको हाथों हाथ लिया।

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Bhartiya Kisan Union state president Gurnam Singh Chaduni lost strength of his organization in Haryana 
गुरनाम सिंह चढूनी - फोटो : ANI (File)

विस्तार

पंजाब में सियासी जमीन की तलाश में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी हरियाणा में ही अपने संगठन की मजबूती गंवा बैठे। पंजाब चुनाव में हिस्सा लेने के फैसले से उनकी यूनियन बिखर गई है। नाराज पदाधिकारियों ने न केवल उनका संगठन छोड़ा, बल्कि उनके सामने ही अंबाला, करनाल और उनके गृह जिले कुरुक्षेत्र में नया संगठन खड़ा कर दिया है। अंबाला में नई यूनियन तैयार हो गई है, करनाल में इसकी तैयारी चल रही है। इसके साथ ही अधिकतर जिलों में संगठन के पदाधिकारी ही किसान आंदोलन में एकत्र चंदे को लेकर चढूनी पर निशाना साध रहे हैं। 

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किसान आंदोलन से पहले चढूनी के संगठन का प्रभाव कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और कैथल तक सीमित था। पिछले साल तीन कृषि कानूनों के खिलाफ गुरनाम सिंह चढूनी एक बड़े किसान नेता के रूप में उभरे थे। कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन में चढूनी के आक्रामक रवैये के चलते प्रदेश और पंजाब के किसानों ने उनको हाथों हाथ लिया। खासकर जीटी रोड के जिलों में उनके संगठन को मजबूती मिली। किसान आंदोलन में मिले अपार जनसमर्थन को देखते हुए चढूनी ने पंजाब चुनाव में ताल ठोकी, लेकिन हरियाणा की तरह ही यहां भी उनका फार्मूला फेल हो गया। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल के संगठन के साथ गठजोड़ के बावजूद उनका कोई भी उम्मीदवार बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सका।

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प्रदेश में पत्नी और खुद हारे, पंजाब में पदाधिकारी

गुरनाम सिंह चढूनी की शुरू से ही राजनीति में हिस्सा लेने की सोच रही है। चढूनी की पत्नी बलविंदर कौर ने 2014 में आप की टिकट पर कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से ताल ठोकी थी। उन्हें 79 हजार वोट मिले थे। इसके बाद गुरनाम चढूनी ने 2019 में लाडवा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, यहां भी उनको करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। किसान आंदोलन में मिले समर्थन के बाद चढूनी ने संयुक्त संघर्ष पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने का फैसला लिया।

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करनाल में 45 पदाधिकारियों ने छोड़ा संगठन

पंजाब की राजनीति में हिस्सा लेने के विरोध में फरवरी में चढूनी यूनियन के 45 पदाधिकारियों ने एक साथ संगठन से इस्तीफा दिया। किसान नेता जगदीप औलख ने कहा कि किसान यूनियन गैर राजनीतिक दल है। उन्होंने इस फैसले का विरोध किया था। अब पंजाब की जनता ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी है। चढूनी पार्टी के सभी सदस्यों को पंजाब की जनता ने नकार दिया है। 

अंबाला में खड़ी हुई नई यूनियन

अंबाला में भी चढूनी यूनियन के पदाधिकारियों सुखविंद्र सिंह, जय सिंह, दिलबाग सिंह, छतरपाल आदि ने इस्तीफा देकर भाकियू भगत सिंह संगठन का गठन किया है। इसी प्रकार, इस्माइलाबाद में सुखविंद्र चम्मू समेत अन्य कार्यकर्ता यूनियन को छोड़ चुके हैं। इनके जाने से चढूनी की यूनियन की कई संगठनों में बंट गई है।  

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