विंग कमांडर अभिनंदन के स्वागत के लिए पूरा देश पलकें बिछाए था। अटारी बॉर्डर पर लोगों का हूजूम उमड़ा था। सभी लोग अभिनंदन की एक झलक के लिए बेताब थे। हालांकि इस दौरान अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को रद्द कर दिया गया। आइए जानते हैं कि कब-कब इसे रद्द किया गया और कितने समय तक चलती है ये सेरेमनी।
बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को रद्द करने का फैसला अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से लिया। डीसी अमृतसर और एसएसपी देहात ने इसकी अधिकारिक घोषणा की थी। आईजी बीएसएफ महिपाल यादव ने कहा कि रिट्रीट को कैंसल कर दिया गया है। हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को रद्द किया गया है।
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बीटिंग द रिट्रीट
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साल 2014 में पाकिस्तान में हुए फिदायीन हमले में 61 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों देशों ने तीन दिन तक बीटिंग रिट्रीट कार्यक्रम को नहीं करने का फैसला लिया था। लेकिन आखिरी मौके पर पाकिस्तान ने अपनी बीटिंग रिट्रीट कर ली थी। समय न होने के कारण भारत इसे नहीं कर सका था।
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वाघा बॉर्डर
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2016 में उड़ी हमले के बाद भी बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी को रद्द कर दिया गया था। वहीं 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भी बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी नहीं हो सकी थी। अधिकारियों के मुताबिक 1965 और 1971 में भारत-पाक की जंग के दौरान भी यह रिट्रीट नहीं हुई थी।
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Wagah border retreat ceremony
156 सेकेंड की होती है सेरेमनी
झंडा उतारने की मुख्य सेरेमनी करीब 156 सेकेंड चलती है। इस दौरान दोनों देशों के जवान मार्च करते हुए बॉर्डर तक आते हैं। पाकिस्तान की ओर से रेंजर्स और भारत की ओर से बीएसएफ के जवान इसमें शामिल होते हैं। दोनों तरफ तल्खी व तनाव भी होता है और पैरों को ऊपर उठाकर अपनी तल्खी का इजहार बीएसएफ व पाक रेंजर्स करते हैं। इस दौरान दोनों देशों के जवान नाक से नाक की बराबरी तक आते हैं। जवान मार्च के दौरान अपने पैर जितना ऊंचा ले जाते हैं, उसे उतना बेहतर माना जाता है।