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50 लाख रुपये की ग्रांट के घपले में बीडीपीओ बर्खास्त, FIR दर्ज करने के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Sep 2017 03:16 PM IST
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तरनतारन जिले के एक ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत अफसर (बीडीपीओ) ने पचास लाख की ग्रांट खुर्द-बुर्द कर दी। विभागीय मंत्री तृप्त रजिंदर बाजवा के निर्देश पर बीडीपीओ को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही एसएसपी तरनातरन को एफआईआर दर्ज कर आरोपी पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
ब्लॉक गंडीविंड के बीडीपीओ रसाल सिंह को लाखों की ग्रांट खुर्द-बुर्द करने का आरोपी पाया गया है। विभाग केसचिव अनुराग वर्मा ने बताया कि ग्रांट में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर रसाल सिंह को चार्जशीट करके मामले की पड़ताल करवाई गई थी। जांच में सामने आया कि विभाग ने नलके लगाने की ग्रांट दी थी। लेकिन आरोपी ने न तो उसकेलिए कोई टेंडर मांगा और न ही वर्क ऑर्डर जारी किया। यहां तक कि कोई एग्रीमेंट तक साइन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, मेजरमेंट बुक में वर्क बिल को भी दर्ज नहीं किया गया।
कई मामलों में घपला साबित हुआ
जांच केदौरान इस मामलेे में 48.37 लाख रुपये का घपला साबित हुआ था। वर्मा ने बताया कि इसी तरह ब्लॉक के गांवों में 14.50 लाख रुपये की सोलर लाइटें लगाने केमामले में भी घपला पाया गया। उसकी जांच सामने आया कि बीडीपीओ ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसका वर्क बिल भी मेजरमेंट बुक में दर्ज नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बीडीपीओ ने टॉयलेट निर्माण में भी मुखत्यार सिंह के साथ मिल कर ग्रांट में 14,06,500 रुपये की हेराफेरी की। इस मामले में भी बीडीपीओ ने किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न ही कोई बिल पेश किया गया। जांच में गबन के आरोप साबित हुए। जिसके बाद बीडीपीओ रसाल सिंह को बर्खास्त करके कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
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ब्लॉक गंडीविंड के बीडीपीओ रसाल सिंह को लाखों की ग्रांट खुर्द-बुर्द करने का आरोपी पाया गया है। विभाग केसचिव अनुराग वर्मा ने बताया कि ग्रांट में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर रसाल सिंह को चार्जशीट करके मामले की पड़ताल करवाई गई थी। जांच में सामने आया कि विभाग ने नलके लगाने की ग्रांट दी थी। लेकिन आरोपी ने न तो उसकेलिए कोई टेंडर मांगा और न ही वर्क ऑर्डर जारी किया। यहां तक कि कोई एग्रीमेंट तक साइन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, मेजरमेंट बुक में वर्क बिल को भी दर्ज नहीं किया गया।
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कई मामलों में घपला साबित हुआ
जांच केदौरान इस मामलेे में 48.37 लाख रुपये का घपला साबित हुआ था। वर्मा ने बताया कि इसी तरह ब्लॉक के गांवों में 14.50 लाख रुपये की सोलर लाइटें लगाने केमामले में भी घपला पाया गया। उसकी जांच सामने आया कि बीडीपीओ ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसका वर्क बिल भी मेजरमेंट बुक में दर्ज नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बीडीपीओ ने टॉयलेट निर्माण में भी मुखत्यार सिंह के साथ मिल कर ग्रांट में 14,06,500 रुपये की हेराफेरी की। इस मामले में भी बीडीपीओ ने किसी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न ही कोई बिल पेश किया गया। जांच में गबन के आरोप साबित हुए। जिसके बाद बीडीपीओ रसाल सिंह को बर्खास्त करके कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
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