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Hindi News ›   Chandigarh ›   Backward class reservation in Haryana Panchayat elections challenged in High Court

हरियाणा पंचायत चुनाव: पिछड़ा वर्ग आरक्षण को हाईकोर्ट में चुनौती, हरियाणा सरकार को नोटिस

Thu, 08 Sep 2022 09:40 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 08 Sep 2022 09:40 PM IST
सार

पंचायत समिति क्षेत्र में वर्ग की जनसंख्या के आधे के अनुपात में सदस्य के पद आरक्षित किए जाएंगे। 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की स्थिति में कोई पद आरक्षित नहीं होगा। बीसी-ए के लिए 50 प्रतिशत सीमा तक ही पद आरक्षित होंगे।

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Backward class reservation in Haryana Panchayat elections challenged in High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग (ए) को आरक्षण देने के हरियाणा सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। सोनीपत निवासी सुरेश कुमार व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने दो सितंबर को अध्यादेश जारी कर हरियाणा पंचायती राज अधिनियम में बदलाव किया है। 

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इस संशोधन के तहत बीसी (ए) के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश 2022 भेदभावपूर्ण और असांविधानिक है। हरियाणा सरकार ने सितंबर-अक्तूबर में प्रस्तावित पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग-ए के लिए वार्ड ड्रॉ से आरक्षित करने का निर्णय लिया है। 
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अध्यादेश के अनुसार हर चुनाव में रोटेशन के आधार पर इस वर्ग को आरक्षण मिलेगा। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वार्डों को छोड़कर पिछड़ा वर्ग के पंच सदस्य के लिए ड्रॉ से वार्ड आरक्षित किए जाएंगे। ग्राम सभा में बीसी-ए की आबादी दो प्रतिशत होने पर भी कम से कम एक पंच जरूर होगा।
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वर्ग को उच्चतम जनसंख्या वाली पंचायतों में ड्रॉ के जरिये आरक्षण दिया जाएगा। जहां सरपंच का पद पहले से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, उनकी जगह बीसी-ए की सबसे अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों में सरपंच पद के लिए आरक्षण दिया जाएगा।


पंचायत समिति क्षेत्र में वर्ग की जनसंख्या के आधे के अनुपात में सदस्य के पद आरक्षित किए जाएंगे। 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की स्थिति में कोई पद आरक्षित नहीं होगा। बीसी-ए के लिए 50 प्रतिशत सीमा तक ही पद आरक्षित होंगे। इनमें ड्रॉ या रोटेशन प्रणाली अपनाई जाएगी। याचिका में अध्यादेश को संविधान के प्रावधानों के खिलाफ बताया गया है और इसे रद्द करने की मांग की गई है। 

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