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सूखती सुखना को बचाने को कोशिशें तेज, की जाएगी ये खास कवायद
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 16 Oct 2016 09:34 AM IST
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Sukhna Lake
- फोटो : अमर उजाला
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सूखती सुखना को बचाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया है। ट्रीटेड टर्शरी वाटर को और ज्यादा ट्रीट कर उसे सुखना तक पहुंचाने के आइडिया पर काम किया जाएगा। हाईकोर्ट की ओर से मांगे गए सुझावों पर एक कंपनी बीबी इंवायरोटेक ने आइडिया दिया था कि वह टर्शरी वाटर को ट्रीट कर सुखना तक पहुंचा सकती है।
इससे सुखना से पानी की कमी दूर हो जाएगी और टर्शरी वाटर का सही इस्तेमाल हो सकेगा। कंपनी ने दावा किया कि जिस टेक्नोलाजी का वह इस्तेमाल करेगा, उससे पानी पीने योग्य तक बन सकता है। कोई बदबू नहीं होगी और सुखना की समस्या का हल मिल जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन को टेक्नोलाजी पसंद आई और उन्होंने कंपनी से एक मशीन मंगवा ली है।
सोमवार तक मशीन पहुंच जाएगी और मंगलवार को सेक्टर-28 के टर्शरी वाटर को ट्रीट करना शुरू कर देगी। उसके बाद पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने हर तीसरे व चौथे दिन पानी को चेक करेगी। एक महीने तक ट्रायल चलेगा। इसके बाद उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी।
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इससे सुखना से पानी की कमी दूर हो जाएगी और टर्शरी वाटर का सही इस्तेमाल हो सकेगा। कंपनी ने दावा किया कि जिस टेक्नोलाजी का वह इस्तेमाल करेगा, उससे पानी पीने योग्य तक बन सकता है। कोई बदबू नहीं होगी और सुखना की समस्या का हल मिल जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन को टेक्नोलाजी पसंद आई और उन्होंने कंपनी से एक मशीन मंगवा ली है।
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सोमवार तक मशीन पहुंच जाएगी और मंगलवार को सेक्टर-28 के टर्शरी वाटर को ट्रीट करना शुरू कर देगी। उसके बाद पाल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने हर तीसरे व चौथे दिन पानी को चेक करेगी। एक महीने तक ट्रायल चलेगा। इसके बाद उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी।
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ट्रायल के दौरान प्रशासन पानी चेक करेगी और हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौपेंगी
सुखना लेक
- फोटो : File Photo
कंपनी की मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव रजनी ने बताया कि उनकी कंपनी के पास जर्मन बेस्ड टेक्नोलाजी है। उनकी मशीन लुधियाना में इंस्टाल है, जो गंदे पानी को पूरी तरह से शुद्ध बना रही है। उनके मुताबिक भारत सरकार की ओर से शुद्ध पानी के लिए जो मापदंड तैयार किए गए हैं, उससे कहीं बेहतर उनकी टेक्नोलाजी रिजल्ट देती है।
नियम के मुताबिक पानी का पीएच स्तर 6-8 होना चाहिए, लेकिन कंपनी 6.5 लेकर आ रही है। टोटल डिस्साल्वड सालिड (टीडीएस) का स्तर 2100-2500 के बीच होना चाहिए, कंपनी 500 तक लेकर आ रही है। टोटल सस्पेंडेड सालिड (टीएसएस) का स्तर 100 मिलीग्राम पर लीटर होना चाहिए, कंपनी इसे पूरी तरह से खत्म कर देती है। बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 30 मिलीग्राम तक होनी चाहिए, जबकि कंपनी इसका स्तर 10 से नीचे लेकर आ रही है। इसी तरह से सीओडी का लिमिट तय मात्रा से बहुत कम लेकर आ रही है।
कंपनी की ओर से बताया गया है कि सेक्टर 28 से गोल्फ क्लब तक टर्शरी वाटर आता है। कंपनी के पास ऐसी टेक्नोलाजी है जो बिना किसी रुकावट एक हफ्ते में एक किलोमीटर तक पाइप डाल सकती है। कंपनी के मुताबिक अभी जो सुखना का पानी वह इतना अच्छा नहीं है। लेकिन जो पानी वो देंगे सुखना के पानी से लाख गुना ठीक होगा।
नियम के मुताबिक पानी का पीएच स्तर 6-8 होना चाहिए, लेकिन कंपनी 6.5 लेकर आ रही है। टोटल डिस्साल्वड सालिड (टीडीएस) का स्तर 2100-2500 के बीच होना चाहिए, कंपनी 500 तक लेकर आ रही है। टोटल सस्पेंडेड सालिड (टीएसएस) का स्तर 100 मिलीग्राम पर लीटर होना चाहिए, कंपनी इसे पूरी तरह से खत्म कर देती है। बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 30 मिलीग्राम तक होनी चाहिए, जबकि कंपनी इसका स्तर 10 से नीचे लेकर आ रही है। इसी तरह से सीओडी का लिमिट तय मात्रा से बहुत कम लेकर आ रही है।
कंपनी की ओर से बताया गया है कि सेक्टर 28 से गोल्फ क्लब तक टर्शरी वाटर आता है। कंपनी के पास ऐसी टेक्नोलाजी है जो बिना किसी रुकावट एक हफ्ते में एक किलोमीटर तक पाइप डाल सकती है। कंपनी के मुताबिक अभी जो सुखना का पानी वह इतना अच्छा नहीं है। लेकिन जो पानी वो देंगे सुखना के पानी से लाख गुना ठीक होगा।