स्कूल में छात्राओं से यौन उत्पीड़न: विधानसभा कमेटी की जांच शुरू, शिक्षा विभाग के ACS और DGP से रिपोर्ट तलब
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में स्कूल छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का मामला उठा था। इस मामले में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के बीच विवाद भी हुआ था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा विधानसभा की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जींद के उचाना के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर लगे छात्राओं के यौन उत्पीड़न मामले की जांच शुरू कर दी है। बुधवार को विधानसभा सचिवालय में स्कूल शिक्षा मंत्री कंवरपाल की अध्यक्षता में कमेटी की पहली बैठक हुई।
कमेटी ने इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल और डीजीपी से इस मामले से जुड़ी तमाम रिपोर्ट तलब की हैं। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रिंसिपल की कार्यशैली, शिकायतों, कमेटी गठन को लेकर शुरू से लेकर 2023 तक की रिपोर्ट देंगे।
इसी तरह से डीजीपी आरोपी प्रिंसिपल के खिलाफ पुलिस में कब-कब शिकायत आई और उस पर कब-कब डीडीआर या केस दर्ज हुआ और पुलिस ने क्या कार्रवाई अमल में लाई, इसकी जानकारी मांगी है। कमेटी की बैठक में रोहतक से विधायक बीबी बतरा, अंबाला सिटी से विधायक असीम गोयल, जुलाना से विधायक अमरजीत सिंह ढांडा बतौर सदस्य शामिल हुए जबकि एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल हुए। कमेटी की अगली बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है।
विधानसभा में गूंजा था मामला
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में स्कूली छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न का मामला उठा था। इस मामले में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के बीच विवाद भी हुआ और दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए थे।
दुष्यंत ने ये आरोप लगाए थे कि इस प्रिंसिपल पर 2005 और 2011-12 में भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। उस समय की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के झज्जर आवास पर 2012 में पंचायत में समझौता होने की बात भी कही थी। वहीं, गीता भुक्कल ने इसे झूठ करार दिया था।
दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई थी। इस मामले की जांच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने का निर्णय लिया गया था। बाद में कांग्रेस के विरोध के बाद हाईकोर्ट जज के बजाय विधानसभा की कमेटी का गठन करके जांच करवाने का निर्णय लिया। कमेटी 2005 से लेकर 2023 तक आरोपी प्रिंसिपल पर लगे सभी प्रकार के आरोपों की जांच करेगी।