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आशुतोष महाराज मामला: नहीं आए संस्थान के वकील, सुनवाई टली

Wed, 18 Jan 2017 10:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 Jan 2017 10:44 PM IST
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Ashutosh Maharaj issue, Punjab and haryana highcourt
आशुतोष महाराज - फोटो : File Photo
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल जालंधर के संस्थापक आशुतोष महाराज के शरीर का अंतिम संस्कार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को भी सुनवाई नहीं हो सकी। बुधवार को संस्थान के वकील के न आने के चलते सुनवाई अब 24 जनवरी को निर्धारित की गई है। इससे पहले मंगलवार को सुनवाई रखी गई थी परंतु जज के छुट्टी पर होने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी थी।
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आशुतोष महाराज के शरीर से जुड़ा विवाद जनवरी 2014 से आरंभ हुआ था, जब उनके शरीर को समाधि में बताया गया था। इसके बाद एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद को उनका ड्राइवर बताते हुए इस मामले की जांच के लिए अपील की थी। आरोप लगाया गया था कि आशुतोष महाराज की प्रॉपर्टी के लिए उनकी हत्या की संभावना दिखाई देती है और ऐसे में उनके शरीर का पोस्टमार्टम करवाया जाए।
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इस मामले में डॉक्टरों की टीम गई थी और उन्होंने आशुतोष महाराज को क्लीनिकली डेड करार दिया था। ड्राइवर की याचिका के बाद स्वयं को आशुतोष महाराज का पुत्र बताने वाले दलीप कुमार झा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पिता का अंतिम संस्कार करने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई आरंभ की थी। इस दौरान दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से कहा गया था कि आशुतोष महाराज समाधि में हैं और कभी भी लौट सकते हैं। इस दलील के साथ कई पौराणिक समाधियों के उदाहरण भी दिए गए थे। 
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हाईकोर्ट ने सुनवाई को 24 जनवरी के लिए किया स्थगित

Ashutosh Maharaj issue, Punjab and haryana highcourt
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज - फोटो : फाइल फोटो
सभी पक्षों को सुनने के बाद सिंगल बेंच ने आशुतोष महाराज की समाधि की बात को अस्वीकार करते हुए पंजाब सरकार को 15 दिन के भीतर आशुतोष महाराज के शरीर का अंतिम संस्कार करने के आदेश दिए थे।

इन आदेशों को चुनौती देते हुए कथित पुत्र दलीप झा, पंजाब सरकार, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और आशुतोष महाराज के अनुयायियों ने डिवीजन बेंच में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि सभी पक्ष मिलकर ऐसा बीच का रास्ता निकालें, जिससे उनके शरीर का सम्मान बना रहे।

आदेशों के बावजूद भी जब सोमवार को कोई ठोस परिणाम नहीं आया और पंजाब सरकार की सीलबंद रिपोर्ट से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ तो अब हाईकोर्ट ने मेरिट के आधार पर केस का निपटारा करने का फैसला लिया है। इसके बाद संस्थान के वकील की गैर मौजूदगी पर हाईकोर्ट संस्थान को 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी।
 
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