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Haryana Election: फिर कांग्रेस के हुए अशोक तंवर, पांच साल में बदली तीन पार्टियां, ऐसा है राजनीतिक सफर

Thu, 03 Oct 2024 05:25 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Thu, 03 Oct 2024 05:25 PM IST
सार

हरियाणा विधानसभा चुनाव मतदान से पहले भाजपा नेता अशोक तंवर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। तंवर के कांग्रेस में जाने से हरियाणा के सिरसा में राजनीति के कई मायने बदल गए हैं। 

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Ashok Tanwar joined Congress changed three parties in five years know about his political carrier
अशोक तंवर कांग्रेस में शामिल। - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए पांच अक्तूबर को मतदान होगा। मतदान से महज दो दिन हरियाणा की सियासत में नया मोड़ आ गया है। वोटिंग से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बहुत बड़ा झटका लगा है। भाजपा नेता अशोक तंवर पार्टी को छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। अशोक तंवर इसी वर्ष भाजपा में आए थे। उन्होंने भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था।
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हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर वीरवार को एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 20 जनवरी 2024 को आम आदमी पार्टी (आप) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ज्वाइन की थी। तंवर ने इसी साल लोकसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर सिरसा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। चुनावों के दौरान उन्हें भाजपा के सिरसा के नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस की कुमारी सैलजा ने उन्हें भारी मतों से हराया था। 
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2019 में छोड़ी थी कांग्रेस
बता दें कि अशोक तंवर ने 2019 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उसके बाद वह 2022 में आप में शामिल हो गए। इस बीच, पूर्व लोकसभा सांसद ने अपनी पार्टी बनाई और कुछ समय के लिए तृणमूल कांग्रेस में भी शामिल हुए। ऐसे में 5 साल बाद विभिन्न पार्टियों में घूमने के बाद अशोक तंवर फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। 
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2009 में पहली बार बने सांसद
अशोक तंवर का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के गांव चिमनी में एक किसान दिलबाग और माता कृष्ण राठी के घर हुआ था। अशोक तंवर ने वारंगल के काकतीय विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई की है। अशोक तंवर का राजनीतिक सफर जेएनयू से शुरू हुआ था। उन्होंने जेएनयू में छात्र संघ अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ा था। तंवर वर्ष 1999 में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के सचिव बने। इसके बाद वर्ष 2003 में वे एनएसयूआई के अध्यक्ष भी बने। वर्ष 2009 में अशोक तंवर ने कांग्रेस की टिकट पर सिरसा से चुनाव लड़ा और साढ़े तीन लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में इंडियन नेशनल लोकदल के चरणजीत सिंह रोड़ी से चुनाव हार गए।


बढ़ेगी गोपाल कांडा की मुश्किलें
वहीं, कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही सिरसा स्थित अशोक तंवर के आवास से भाजपा के झंडे और अन्य प्रचार सामग्री को हटा दिया गया है। खास बात यह है कि वह सिरसा चुनाव में गोपाल कांडा का समर्थन कर रहे थे। उनका कहना था कि गोपाल कांडा ने उनका लोकसभा चुनाव में समर्थन किया था। ऐसे में चुनाव प्रचार थमने से ठीक पहले उनका कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करना सिरसा प्रत्याशी गोपाल कांडा की मुसीबत बढ़ा देगा।
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