फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Arvind Kejriwal is really an IIT graduate, CM Captain Amrinder Singh Asked

तीखे तेवर और बड़ा सवाल, क्या वाकई आईआईटी ग्रेजुएट हैं अरविंद केजरीवाल: कैप्टन

Mon, 05 Nov 2018 09:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 05 Nov 2018 09:24 AM IST
विज्ञापन
Arvind Kejriwal is really an IIT graduate, CM Captain Amrinder Singh Asked
Captain Amarinder singh & Arvind Kejriwal - फोटो : File Photo

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में प्रदूषण के लिए पंजाब को जिम्मदार ठहराने के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावे को हास्यास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि सियासी नौटंकी और उटपटांग बातें करने से पहले केजरीवाल आंकड़े खंगालें। कैप्टन ने कहा कि वह लोकसभा चुनाव में देखेंगे कि पंजाब केजरीवाल और आप के बारे में क्या सोचता है।

विज्ञापन


केजरीवाल विधानसभा चुनाव से भी बुरे हश्र के लिए तैयार रहें। कैप्टन ने कहा कि दिल्ली के सीएम ने हर मोर्चे पर नाकामी से लोगों का ध्यान हटाने को यह चाल चली है। पराली जलाने की सैटेलाइट की तस्वीरों के जरिये पंजाब को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताने पर कैप्टन ने कहा कि केजरीवाल से ज्यादा तो स्कूली बच्चों को पता होगा। क्या केजरीवाल वाकई आईआईटी ग्रेजुएट हैं?
विज्ञापन


दिल्ली में हर साल दिसंबर और जनवरी के दौरान हवा की गुणवत्ता का मापदंड 300 से ज्यादा रहता है। जबकि, तब पड़ोसी राज्यों में पराली नहीं जलाई जाती। इससे साफ है कि दिल्ली में अपने साधनों के कारण ही प्रदूषण बढ़ता है। जिसके लिए वाहन, निर्माण गतिविधियां, इंडस्ट्री, बिजली प्लांट, म्यूनिसिपल अवशेष जलाना कारण बनते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

केजरीवाल सरकार दिल्ली में प्रदूषण की समस्या सुलझाने में नाकाम रही है

Arvind Kejriwal is really an IIT graduate, CM Captain Amrinder Singh Asked
कैप्टन अमरिंदर सिंह और केजरीवाल

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के वेदर रिसर्च एंड फोरकास्टिंग मॉडल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एनसीआर की हवाएं उत्तर दक्षिण से पूर्व की तरफ बदल चुकी हैं। इस कारण पंजाब, हरियाणा में पराली जलने का शायद ही कोई प्रभाव पड़ता हो। दो नवंबर को दिल्ली में 208 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पीएम 2.5 घनत्व था। इनका मुख्य कारण वाहन और इंडस्ट्री है।

पराली जलाने के कारण पीएम 2.5 घनत्व में बढ़ोतरी पीएम 10 के मुकाबले कम है। इस कारण पीएम 2.5 की बढ़ोतरी में पराली जलाने की देन कम है। तापमान घटने और हवा के वेग के कारण वातावरण में प्रदूषित कण बिखर नहीं पाते, जो उत्तर भारत में ज्यादातर स्थानों पर एक्यूआई में बढ़ोतरी का कारण बनता है। एनसीआर में एक्यूआई 400 तक पहुंच जाता है।

कैप्टन ने कहा कि अगर वायु प्रदूषण का कारण पराली जलाना है तो सबसे पहले पंजाब के शहरों के एक्यूआई पर इसका असर पड़ता। अक्तूबर के दौरान पंजाब का औसत एक्यूआई 117 था, जबकि दिल्ली का औसत 270 रहा। उन्होंने कहा कि तीन नवंबर तक पराली जलाने के 25 हजार 394 मामले आए, जो पिछले साल 30 हजार 832 से कम हैं।

प्रति लाख एकड़ में पराली जलाने की 390 घटनाएं हैं, जो मामूली हैं। पंजाब में 12700 गांव हैं, प्रति गांव पराली जलाने के दो से भी कम केस आए हैं। इससे साफ है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली में प्रदूषण की समस्या हल करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed