आर्मी जवानों की पत्नियां बनेंगी महिलाओं की 'पहरेदार'
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सीमा पर जवान देश की रक्षा के लिए सीना ताने खड़े हैं। इधर, ट्राइसिटी में उनकी पत्नी महिलाओं को सुरक्षित घर पहुंचाएंगीं। ट्राइसिटी की सड़कों पर जल्द ही बहादुर महिलाएं आपको रेडियो टैक्सी चलाती नजर आएंगी। देश के लिए जान न्योछावर कर चुके बहादुर शहीदों की पत्नियां खासतौर पर यह जिम्मा उठाने जा रही हैं।
चंडीगढ़ में दो सप्ताह पहले ही रेडियो टैक्सी सेवा शुरू करने वाली विंग्स ट्रैवल्स यह पहल करने जा रही है। दिल्ली में कैब में महिला से रेप की घटना के बाद टैक्सी सर्विस विवादों में रही है। एप कैब को चंडीगढ़ प्रशासन ने बैन कर दिया है। इसके बाद रेडियो टैक्सी शहरवासियों को लुभाने की हर संभव कोशिश कर रही हैं।
विंग्स ट्रैवल्स इससे पहले देश के अंदर पुणे में महिला चालकों को कमान सौंप चुका है। अब चंडीगढ़ में महिलाओं को यह जिम्मेदारी मिलेगी। आम महिलाओं के लिए भी रेडियो टैक्सी चलाकर रोजगार का अवसर होगा। बकायदा ट्रैफिक नियमों के अनुसार वह टैक्सी चला सकने के काबिल हों।
पहली बार महिलाएं यह कमान आने हाथों में थामेंगी
अभी तक ट्राइसिटी में पुरुषों के हाथों में ही टैक्सी की कमान है। पहली बार महिलाएं यह कमान आने हाथों में थामेंगी।
सीटीयू में महिला कंडक्टर पहले ही अपनी सेवाएं देकर देश के सामने उदाहरण पेश कर रही हैं। अधिकतर कंडक्टर वेल एजुकेटिड हैं। जिस कारण वह अनोखी तहजीब के लिए जानी जाती हैं। 150 से अधिक महिला कंडक्टर सीटीयू में कार्यरत हैं।
कोट्स...
चंडीगढ़ में महिलाओं को टैक्सी की कमान दी जाएगी। स्पेशली आर्मी से जुड़ी महिलाओं को वरीयता मिलेगी। हालांकि अन्य महिलाएं भी टैक्सी चला सकेंगी। आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन के साथ इसको लेकर मीटिंग हुई है। कई वार विडो तो इसमें रुचि दिखा भी चुकी हैं। अगले कुछ दिनों में महिलाएं आपको सुरक्षित गंतव्य पर पहुंचाएंगी।
यादविंद्र सिंह, ऑपरेशन मैनेजर, विंग्स ट्रैवल्स।