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Punjab: भारतीय राजदूत को गुरुद्वारे में धक्के मारने से सिखों में रोष, कहा-गुरुघर में आने का हक सबको
Wed, 29 Nov 2023 02:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 29 Nov 2023 02:50 PM IST
सार
वरिष्ठ लेखक व सिख मामलों के माहिर सतनाम माणक का कहना है कि कोई भी व्यक्ति हो उसको गुरुघर आने से रोका नहीं जा सकता है। वह गुरुग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होना चाहता है तो किसी को रोकना नहीं चाहिए। किसी को गुरुघर के अंदर धक्के मारने का अधिकार भी नहीं है।
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भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू
- फोटो : फाइल
विस्तार
अमेरिका में भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू को गुरुद्वारा साहिब में धक्के मारने की घटना से सिखों में रोष है। सिखों का कहना है कि गुरुघर में ऐसी घटनाएं शोभा नहीं देती। यह गुरु महाराज की शिक्षा के खिलाफ है। गुरुघरों में हो रहे ऐसे विवादों से सिख विद्वान आहत है।
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प्रो. सरचंद सिंह ख्याला का कहना है कि अमेरिका में भारत सरकार के राजदूत तरनजीत संधू उच्च प्रतिनिधि सिख समुदाय के सदस्य हैं। भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू के खिलाफ गुरुघर के अंदर जो दंगा कर रहे थे, उनको सोचना चाहिए था कि जिस व्यक्ति से वह दुर्व्यवहार कर रहे हैं। वह भारत का प्रतिनिधि करने वाला अधिकारी है और सिख समुदाय से है।
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प्रो. सरचंद का कहना है कि उनके दादा तेजा सिंह को गुरुद्वारा सुधार आंदोलन में बहुमूल्य योगदान के लिए सिख समुदाय में इतना सम्मान दिया जाता है कि शिरोमणि कमेटी के कार्यालय भवन का नाम उनके नाम पर रखा गया है। एक सिख के तौर पर इसे समझना भी जरूरी है। वहीं संधू का अमेरिका जैसे देश में भारतीय राजदूत बनना और अजयपाल सिंह बंगा का विश्व बैंक का प्रमुख बनना सिख समुदाय के लिए गर्व की बात है।
वरिष्ठ लेखक व सिख मामलों के माहिर सतनाम माणक का कहना है कि कोई भी व्यक्ति हो उसको गुरुघर आने से रोका नहीं जा सकता है। वह गुरुग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होना चाहता है तो किसी को रोकना नहीं चाहिए। किसी को गुरुघर के अंदर धक्के मारने का अधिकार भी नहीं है। वह सैद्धांतिक रुप से इसके खिलाफ हैं।
साहित्य अकादमी के प्रधान डॉ. लखविंदर सिंह जौहल का कहना है कि यह सिख मर्यादा के खिलाफ है। गुरुघर में मिठास व अध्यात्म की बात होती है लेकिन वहां पर दंगा फसाद की बात नहीं होनी चाहिए। गुरुघर को विवादों से दूर रहना चाहिए। तरनजीत सिंह संधू भी सिख हैं और उनकी आस्था श्री गुरु ग्रंथ साहिब में है।