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Hindi News ›   Chandigarh ›   Amritsar Train Accident, Challanged in Magistratial Enquiry of 59 Death

अमृतसर ट्रेन हादसाः 59 मौतें, रेलवे से लेकर राज्य सरकार तक कटघरे में, जांच करने में कई चुनौतियां

Thu, 25 Oct 2018 10:29 AM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Thu, 25 Oct 2018 10:29 AM IST
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Amritsar Train Accident, Challanged in Magistratial Enquiry of 59 Death
Amritsar rail accident - फोटो : ani
अमृतसर ट्रेन हादसे में 59 मौतें हुईं, रेलवे से लेकर राज्य सरकार तक कठघरे में खड़ी है। वहीं मामले की मजिस्ट्रेटी जांच में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वैसे मजिस्ट्रेटी जांच ने अपने कदम तेज कर दिए हैं। एक सप्ताह बीतने को है और तीन सप्ताह का समय ही शेष है। ऐसे में जांच टीम के आगे कई चुनौतियां है और एक के बाद एक सवाल आगे आकर खड़ा हो रहा है। अभी तो जांच शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ना शुरू हो जाएगा।
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जांच की राह में ये हैं चुनौती
डिवीजनल कमिश्नर पुरुषार्था के समक्ष अहम चुनौती केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में जाकर जांच करना है। पंजाब सरकार की तरफ से जांच की घोषणा की गई है और उसमें कमिश्नर से लेकर तमाम अधिकारियों को तलब कर सकते हैं। उनको जांच के लिए रेलवे गार्ड, ट्रेन चालक, गेटमैन, लोकोपायलट, आरपीएफ को शामिल करना पड़ेगा, जो सीधा सीधा केंद्र सरकार के अधीन है। केंद्र सरकार का रेल मंत्रालय पहले ही अपनी टीम को क्लीन चिट दे चुका है। ऐसे में पंजाब सरकार व केंद्र सरकार के बीच इसको लेकर ठनी है।
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पंजाब के केबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू व सुनील जाखड़ रेलवे को कटघरे में खड़ा कर खामियां गिना रहे हैं। ट्रेन की स्पीड अधिक थी, ट्रेन की लाइट नहीं जल रही थी? चालक ने हार्न नहीं बजाया? आरपीएफ ने पटरी को खाली क्यों नहीं कराया? गेटमैन ने ग्रीन सिग्नल क्यों दिया? वहीं केंद्रीय राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने तो घटना वाली रात ही कह दिया था कि इसमें हमारा कोई कसूर नहीं है, जो भी कसूर है वह प्रबंधकों का है।
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पंजाब सरकार को कटघरे में खड़ा करना होगा...

Amritsar Train Accident, Challanged in Magistratial Enquiry of 59 Death
Amritsar train accident - फोटो : PTI
- दूसरी बड़ा सवाल पंजाब सरकार पर भी उठेगा, जब दीवार के भीतर की क्षमता दो हजार थी तो 20 हजार की मंजूरी पुलिस ने कैसे दी ?
- तीसरा सवाल, निगम की तरफ से पानी के टैंकर व फायर टेंडर क्यों भेजा गया ? अगर निगम से मंजूरी नहीं ली गई थी ?
- पंजाब पुलिस ने अलग मंजूरी दी थी तो वहां पर व्यापक सुरक्षा प्रबंध क्यों नहीं किये गए ?
- राजकीय रेलवे पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई ? उनको स्थानीय पुलिस ने कोई सूचना दी थी या नहीं ?
- जिस जमीन पर रावण का दहन किया गया, वह नगर सुधार ट्रस्ट की थी, उसके लिए एनओसी क्यों नहीं ली गयी ?

राजकीय रेलवे पुलिस को भी जांच के दायरे में लाना पड़ेगा...
मजिस्ट्रेटी जांच के दौरान राजकीय रेलवे पुलिस को भी कटघरे में खड़ा करना होगा। उनकी तरफ से प्राथमिकता तो दर्ज की गई है, लेकिन उनकी जिम्मेदारी मामले अहम है। राजकीय रेलवे पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली कि पटरी पर इतनी अधिक भीड़ जमा हो चुकी है?

नवजोत कौर व कांग्रेसी पार्षद भी हो सकते हैं जांच में शामिल
मजिस्ट्रेटी जांच में शामिल होने के लिए नवजोत कौर सिद्धू व कांग्रेसी पार्षद विजय मदान व उसके बेटे सौरव मदान को भी सम्मन भेजा जा सकता है। उन पर विपक्षी दल जमकर हमला कर रहा है और मामला मानवाधिकार से लेकर हाईकोर्ट तक चला गया है। ऐसे में टीम के आगे दोनों को जांच में शामिल करना जरूरी होगा।
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