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हरियाणा रिकॉर्ड मैनुअल में संशोधन, अब जमीनों से जुड़ा हर फेरबदल राजस्व रिकॉर्ड में होगा दर्ज
Fri, 19 Feb 2021 11:49 AM IST
निवेदिता वर्मा
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 19 Feb 2021 11:49 AM IST
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में जमीनों से जुड़ा हर बदलाव अब राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। सरकार ने हरियाणा रिकॉर्ड मैनुअल में संशोधन की गजट अधिसूचना जारी कर दी है। अब जमीन से जुड़ी हर विभाग की अधिसूचना में शामिल परिवर्तनों की प्रति किला व खसरा नंबर के हिसाब से राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री की जाएगी।
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राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस कार्य के लिए पटवारी, कानूनगो, एसडीओ सिविल व डीआरओ की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। हर साल 15 जून तक बीते वर्ष की जमीनों से जुड़ी नई अधिसूचनाओं की एंट्री रिकॉर्ड में होना जरूरी है। शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल ने इस संबंध में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील रवि शर्मा के माध्यम से 1 फरवरी 2020 को मुख्य सचिव को कानूनी नोटिस भेजा था।
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ठीक एक साल के अंदर सरकार ने कार्रवाई करते हुए 15 जनवरी 2021 को हरियाणा रिकॉर्ड मैनुअल में संशोधन कर दिया है। वकील रवि शर्मा का दावा है कि अब राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री होने से न्यायालय पर जमीनों से जुड़े केस का बोझ 25 प्रतिशत तक कम होगा। विजय बंसल ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि भले देर से ही सही पर सरकार ने बेहतर काम किया है।
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अभी तक वन, टाउन व कंट्री प्लानिंग आदि विभाग रोजमर्रा में जमीन संबंधित अनेक अधिसूचनाएं सरकारी गजट व अखबारों के माध्यम से जारी करते आ रहे थे। लेकिन राजस्व रिकार्ड में प्रति किला व खसरा नंबर के हिसाब से नए बदलाव की एंट्री नहीं की जा रही थी। जिससे राज्य में अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा था।
अतिक्रमण व गैर वन कार्यों के अनियंत्रण से शिवालिक व अरावली पहाड़ी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वन व टाउन कंट्री प्लानिंग विभाग की अधिसूचनाओं की राजस्व रिकार्ड में एंट्री मार्क न होने के कारण न्यायालय के आदेशों पर भवनों को तोड़ने तक की नौबत आ रही है। अरावली में अवैध निर्माण व अतिक्रमण किसी से छिपा नहीं है।
अधिकारियों की तय हुईं जिम्मेदारियां
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना में साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लगातार लापरवाही बरतने पर कानून अनुसार आपराधिक मामला भी दर्ज कराया जाएगा।
अतिक्रमण व गैर वन कार्यों के अनियंत्रण से शिवालिक व अरावली पहाड़ी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वन व टाउन कंट्री प्लानिंग विभाग की अधिसूचनाओं की राजस्व रिकार्ड में एंट्री मार्क न होने के कारण न्यायालय के आदेशों पर भवनों को तोड़ने तक की नौबत आ रही है। अरावली में अवैध निर्माण व अतिक्रमण किसी से छिपा नहीं है।
अधिकारियों की तय हुईं जिम्मेदारियां
- जमीनों के इंतकाल, गिरदावरी, कब्जों इत्यादि से जुड़े हर निर्णय को पटवारी 100 फीसदी वेब हेलरिस पर अपलोड करेंगे।
- फील्ड कानूनगो पखवाड़े में एक बार पटवारी के दर्ज रिकॉर्ड को जांचेंगे
- सर्कल राजस्व अधिकारी नई एंट्री के 25 प्रतिशत रिकॉर्ड की कम से कम जांच करेंगे
- एसडीओ सिविल नई एंट्री में से 5 फीसदी व जिला राजस्व अधिकारी 2 फीसदी रिकॉर्ड को जांचेंगे।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना में साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लगातार लापरवाही बरतने पर कानून अनुसार आपराधिक मामला भी दर्ज कराया जाएगा।