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अमर उजाला संवाद: चंडीगढ़ में बढ़ते क्राइम पर चिंता जताई, निपटने की तरकीब बताई

Mon, 29 Jan 2018 05:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 29 Jan 2018 05:28 PM IST
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amar ujala samwad with second inning association on crime in chandigarh
अमर उजाला संवाद
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम हुआ, जिसमें चंडीगढ़ में बढ़ रही अपराधिक घटनाओं पर चिंता जताई गई और इस समस्या से निपटने के तरीके भी सुझाए गए। बेखौफ अपराधी और लचर कानून व्यवस्था। किडनैपिंग, लूट, झपटमारी तो शहर की फिजा में आम हो चले हैं।
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स्नैचर्स के निशाने पर महिलाएं हैं तो युवतियां मनचलों से भयभीत हैं। सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है। रेजिडेंट्स शहर के इस हाल से चिंतित हैं। कानून और व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्मार्ट सिटी में तो कम से कम ऐसी कानून व्यवस्था की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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बात सिर्फ यहीं नहीं खत्म होती बिगड़ैल रईसजादों द्वारा की जाने वाली हरकतों और संभ्रांत सिटी में ड्रिंक एंड ड्राइव के बढ़ते चालान ने भी सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे ही ज्वलंत मुद्दों को लेकर अमर उजाला और सेकेंड इनिंग एसोसिएशन द्वारा यूटी गेस्ट हाउस में संवाद का आयोजन किया गया।
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इसमें सिटी के सीनियर सिटीजंस और प्रबुद्ध वर्ग ने कानून और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव दिए। संवाद का आगाज सिटी के 97 वर्षीय दीवान सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि मैं अब भी इस सिटी के लिए बहुत कुछ सोचता हूं।

दो सालों में हत्याओं का आंकड़ा एक जैसा: आरके गर्ग

amar ujala samwad with second inning association on crime in chandigarh
अमर उजाला संवाद
सेकेंड इनिंग एसोसिएशन के आरके गर्ग ने कहा कि वर्ष 2016 और 2017 में हत्याओं का आंकड़ा करीब-करीब एक समान है। सड़क हादसों में 125 लोगों की मौत हो चुकी है। एक्साइज एक्ट के मामले बढ़े हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है। सिटी में किडनैपिंग जैसे मामले होने लगे हैं। ऐसा लगता है कि यह सिटी गैंगस्टरों, उठाईगीरों, स्नैचरों का सिटी बनता जा रहा है।

आखिर सोल्यूशन क्या है....डिजिटलाइजेशन के साथ ही कम्यूनिटी पुलिसिंग भी सबसे ज्यादा आवश्यक हो चुकी है। कोई भी अपराध हो उसको रोकने का पहला कदम घर से उठाना आवश्यक है। इसके लिए बच्चों को अच्छा माहौल दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही बीट बाक्स में रहने वाले पुलिस कर्मियों द्वारा सतर्कता को बढ़ाना चाहिए, पेट्रोलिंग तेज करनी चाहिए।

मुद्दे उठाने के लिए हुआ सेकेंड इनिंग एसोसिएशन का गठन
सेकेंड इनिंग एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष आरके गर्ग हैं। गर्ग ने ही इस एसोसिएशन का गठन किया है। एसोसिएशन से कई रिटायर्ड अधिकारी, विशेषज्ञ और बुद्धिजीवी जुड़े हैं। अध्यक्ष आरके गर्ग का कहना है कि शहर के जो असली मुद्दे और समस्याएं हैं, उन्हें कोई भी प्रशासन के समक्ष नहीं उठा रहा था। इसलिए संस्था का गठन करने की जरूरत महसूस हुई। सीनियर सिटीजन से जुड़े मुद्दों को भी उठाने के लिए इस एसोसिएशन का गठन किया गया है।

गर्ग का कहना है कि प्रशासन के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समय-समय पर उनके संगठन के पदाधिकारियों की राय ली जाएगी। पिछले साल अगस्त में इस एसोसिएशन का गठन हुआ था।

अहम मुद्दे और सुझाव

amar ujala samwad with second inning association on crime in chandigarh
अमर उजाला संवाद
गेड़ी रूट में गड़बड़ी- पुलिस की गश्त बढ़ाने की जरूरत
ट्रैफिक में एक्सीडेंट- चालान के नियम सख्त हो
किराएदारों का वेरीफिकेशन- पुलिस के साथ जनजागरूकता जरूरी
नशे की बढ़ती लत- शराब के खुलेआम सेवन पर लगाया जाए बैन
महिलाओं की सुरक्षा- लड़कियों को दें फ्री सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग
सड़कों पर सुरक्षा- ज्यादा बेहतर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं

अपराध को बढ़ाना देने में नशे की भूमिका अहम  
लॉ एंड आर्डर कमेटी ने बताया कि ड्रग समाज के लिए खतरा है। इसी लत के चलते बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है। पुलिस की हरेक डिवीजन को परिवारों की मदद से युवाओं को गाइड करना चाहिए। चंडीगढ़ में ज्यादातर अपराध के मामलों में यही नजर आ रहा है कि ज्यादातर घटनाओं में पंजाब और हरियाणा के लोग शामिल होते हैं। पहले सिस्टम ठीक था, जबकि बीट पुलिस के सदस्य सभी सदस्यों से मुलाकात करती थी। अब देखिए पुलिस क्या कर रही है। ऐसे में ही आरडब्ल्यूए और अन्य मार्केट एसोसिएशन का काम बढ़ जाता है। ऐसे कई लोग हैं, जो एसएसपी और अन्य अधिकारियों के सामने बोल नहीं पाते। ऐसे में मीटिंग ऐसी हो, जिसमें पुलिस के छोटे अधिकारी मौजूद हों, ताकि लोग अपनी बात रख सकें।
- कमलजीत पंछी (ट्रेडर एसोसिएशन सेक्टर-17)

प्रशासन को सौंपा प्रस्ताव
सेकेंड इनिंग एसोसिएशन का लक्ष्य है कि चंडीगढ़ में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस-प्रशासन का सहयोग किया जाए। यह पहली तरह का सेमिनार है, जिसमें पचास से ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया है। सेकेंड इनिंग एसोसिएशन की लॉ एंड आर्डर की स्टैंडिंग कमेटी की ओर से एक प्रस्ताव प्रशासन को सौंप दिया गया है। सिटी की कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ज्यादा विजिबिलिटी के कैमरे होने चाहिए। इसके साथ ही पुलिस वेरीफिकेशन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
- आरके गर्ग (प्रेसीडेंट, सेकेंड इनिंग एसोसिएशन)

घर में हो सकारात्मक ऊर्जा का संचार

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अमर उजाला संवाद
समाज से अपराध खत्म करने के लिए सिर्फ पुलिस ही जिम्मेदार नहीं है। वास्तव में यह प्रत्येक तबके के लोगों की जिम्मेदारी है कि समाज में आपराधिक प्रवृत्ति को किसी भी सूरत में बढ़ावा न देनें दें। इसका सीधा तरीका यह है कि परिवार में बच्चे की परवरिश सही तरीके से होनी  चाहिए। लेकिन इसके उलट समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो आज अपने प्रभाव और रसूख को बढ़ावा देने की मंशा से अनजाने में अपराध पनपा रहे हैं। बच्चे को अनुशासन सिखाना तो दूर, अब यदि कहीं बच्चे की गलती भी होती है तो उसको अनदेखा करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे ही बच्चे जब बड़े होते हैं तो खतरनाक बन जाते हैं। वास्तव में घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होना चाहिए।
- तरसेम भारद्वाज (रेजीडेंट)

अपराध और नशा मुक्त समाज के लिए कानून का सख्त होना जरूरी
पैरेंट, टीचर और समाज के कुछ भले नागरिक बच्चों को कितना सिखाएंगे। बच्चे को हरेक माता-पिता बताते हैं कि नशा गलत है, लेकिन जब बच्चा बाहर जाता है और थोड़ा बड़ा होता है, तो कुछ लोगों के बहकावे में उसका इरादा बदल जाता है। वास्तव में यदि हम कहते हैं कि नशा गलत है, तो उसे बैन क्यों नहीं कर दिया जाता है। वास्तव में प्रत्येक अपराध पर पेनल्टी कड़ी होनी चाहिए। तभी लोग बातों को मानेंगे। अब छोटे छोटे बच्चे भी नशे को जानने लगे हैं। ट्रैफिक के नियमों को देख लें तो उसमें भी युवाओं के हौसले एकदम उफान पर हैं। सीसीटीवी कैमरा तक तोड़ने में गुरेज नहीं करते हैं।
- कामिनी, (रेजीडेंट)

बुजुर्गों के अनुभव से नसीहत लेने की जरूरत
सीनियर सिटिजंस प्रशासन की काफी मदद कर सकते हैं। वास्तव में आवश्यकता इस बात की है कि लॉ एंड आर्डर के लिए एक कमेटी बनाई जानी चाहिए। इस कमेटी में दो से तीन सदस्यों को होना चाहिए। उनको एक साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए। वास्तव में कई इश्यू हैं, जिनको देखना आवश्यक है। मसलन दूसरे राज्यों से आने वाली लेबर की वेरीफिकेशन आवश्यक है। वाहनों की लिस्ट पुलिस के पास होने चाहिए। शहर में प्रॉपर्टी के लिए झगड़े भी बढ़ते जा रहे हैं, जिनके ऊपर लगाम लगाने की आवश्यकता है।
- अर्जुन सिंह (रेजीडेंट)

सोचने पर मजबूर करता है सिटी में अपराध का बढ़ना
मैंने सिटी को शुरू से देखा है। यहां रात के समय लोग बेखौफ होकर घूमते थे। महिलाएं आसानी से बिना किसी खौफ के घर से बाहर चली जाती थीं। वास्तव में सिटी के एसएसपी को यह कहना चाहिए कि सीनियर सिटिजंस की बातों को सुनें।  चंडीगढ़ में स्नैचिंग की वारदात बढ़ती जा रही हैं। चोरियां बढ़ गईं हैं, ओवर स्पीड से दुर्घटनाएं हो रही हैं। लूटपाट और मर्डर भी होते हैं। कई बार मैं यही सोचता हूं कि क्या हो गया है सिटी ब्यूटीफुल को।
- दीवान सिंह (उम्र-97 वर्ष)

किराएदारों का पुलिस वेरीफिकेशन अनिवार्य

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अमर उजाला संवाद
चंडीगढ़ के प्रत्येक घर में किराएदार रहते हैं। लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए किराएदारों का पुलिस वेरीफिकेशन किया जाना चाहिए। लेकिन आज तौर पर यहां ऐसा नहीं होता। इसके साथ ही सब्जी वालों का भी कोई वेरीफिकेशन नहीं होता। मोहल्ले में तमाम सारे स्ट्रीट वेंडर आते हैं, जिनका कोई वेरीफिकेशन नहीं है। एक समय चंडीगढ़ में 147 बीट बाक्स थे और एक या दो बार मिलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। पहले डीजीपी और आईजीपी वर्ष में एक बार आते थे और समस्या का समाधान होता था। एसोसिएशन के करीब नौ सौ लोग हैं और पुलिस को डायरेक्टरी दी गई है, लेकिन इसका फायदा नहीं मिलता। वास्तव में बिहार और नेपाल से आने वाले लेबर का वेरीफिकेशन किया जाना चाहिए।
- डीएस ग्रेवाल (प्रेसीडेंट, सीनियर सिटीजन एसोसिएशन)

लेन सिस्टम प्रभावी हो
ट्रैफिक में पैदल राहगीरों की सुरक्षा तभी की जा सकती है, जबकि ड्राइविंग सही ढंग से की जाए। लेन सिस्टम को प्रभावी होना चाहिए। सीसीटीवी कैमरे सभी दिशा में होने चाहिए। इसके साथ ही कलर्ड कैमरे होने चाहिए। यदि कोई नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके ऊपर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त ही न्यूनतम और अधिकतम स्पीड को तय किया जाना चाहिए। ट्रैफिक से सौ यार्ड पहले हर वाहन को तय और निर्धारित लेन में होना चाहिए। स्टॉप लाइन और जेबरा लाइन में अधिकतम अंतर नहीं है, पर इसको सही ढंग से प्रभावी होना ज्यादा आवश्यक है। पैदल राहगीरों के लिए अब तक यहां कोई ट्रैक नहीं बनाया गया है। चंडीगढ़ में देखें तो सीसीटीवी कैमरे ज्यादा हैं पर उनकी विजिबिलिटी नहीं है। इसके साथ ही डाटा स्टोर नहीं होता है।
- जीएस ओबरॉय (रेजीडेंट)।

ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू करने में सख्ती बरती जाए
मैं सैन्य अधिकारी की बेटी हूं। मैं काफी समय विदेश में रही हूं। विदेशों में ड्राइविंग करने और उससे पहले लाइसेंस लेने के पहले तीन माह की ड्राइविंग की ट्रेनिंग आवश्यक है। टोरंटो में मैंने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन दिया तो मुझको तीन माह की ट्रेनिंग के बाद लाइसेंस मिला। लेकिन चंडीगढ़ में लाइसेंस इश्यू करने के पहले न तो ड्राइविंग स्कूल की बाध्यता है न ही यहां ट्रेनिंग ठीक से दी जाती है। ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू करने के पहले स्कूल की ट्रेनिंग आवश्यक होनी चाहिए। बिना ट्रेनिंग और सही टेस्ट के ड्राइविंग लाइसेंस इश्यू नहीं होने चाहिए।
- सरीना सिद्धू (एरिया काउंसलर)।

हादसों के खतरे के प्रति जागरूकता जरूरी
ड्राइविंग की ट्रेनिंग सबसे ज्यादा आवश्यक है। चंडीगढ़ में ड्राइविंग के लिए एक संस्थान होना चाहिए, जिससे ड्राइविंग सीखने वालों को लाइसेेंस इश्यू करने के पहले हरेक जानकारी दी जा सके। उसके साथ ही सड़क पर होने वाले हादसों के बारे में भी लोगों को जागरूक करना चाहिए। इससे वह समझ सकें कि उनकी गलती से क्या नुकसान होता है। वास्तव में यह एक ऐसा विषय है, जिसमें काफी चर्चा की आवश्यकता है।
- गुरनाम सिंह (ट्रैफिक मार्शल)

और खराब होते जा रहे हालात

amar ujala samwad with second inning association on crime in chandigarh
अमर उजाला संवाद
ऐसा लगता है मानो रोजाना हालात और खराब होते जा रहे हैं। सेक्टर-10 में रात को स्थिति यह होती है कि यहां अच्छे परिवारों की लड़कियों का बाहर निकलना मुश्किल है। कई बार देखा गया है कि रात के समय पचास से ज्यादा कारें खड़ी रहती हैं, जिसमें बैठकर आने वाले लोग शराब के नशे से होते हैं। यहां खुलेआम शराब का प्रयोग होता है और पुलिस कुछ नहीं करती। यूथ यहां स्मोकिंग करते हैं, छेड़छाड़ करते हैं और शराब पीते हैं। इसको रोकना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि ऐसा क्यों नहीं होता।
- मणि ढिल्लो (अध्यापिका)

युवतियों और महिलाओं को मुफ्त में सिखाए जाएं आत्मरक्षा के गुर
मैंने कई बार सेक्टर-10 के गेड़ी रूट पर रात के समय लड़कों को घूमते हुए देखा है। यदि वे छात्र हैं, तो रात के समय उनको घूमने की इजाजत कौन देता है। यदि वे अराजक तत्व हैं, तो वास्तव में ऐसे लोगों से समाज को खतरा है। ऐसे माहौल में युवतियों और महिलाओं की सुरक्षा तभी हो सकती है, जब उन्हें आत्मरक्षा के गुर सिखाएं जाएं। जरूरी है कि सिटी में महिलाओं और युवतियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए फ्री में क्लास लगाई जाए।
- दीपिका गांधी (इंचार्ज, ली काबूर्जिए सेंटर-19)

पुलिस पर कम हुआ लोगों का भरोसा
हमारा दायित्व है कि हम कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए अपनी जिम्मेदारियां तय करें। इसके लिए आवश्यक है कम्यूनिटी पुलिसिंग। जब तक ऐसा नहीं होगा, कानून-व्यवस्था को सुधारना मुश्किल है। एक ओर डिजिटलाइजेशन को हम बढ़ावा देते हैं, तो दूसरी ओर आम आदमी से दूर होते जा रहे हैं। वास्तव में दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई अब पुलिस पर ट्रस्ट नहीं करता है, जो कि गंभीर विषय है। इस मुद्दे पर अलग से चर्चा की जानी चाहिए।
- पल्लव मुखर्जी

छोटे से दायरे में बसे शहर में अपराध बढ़ना चौंकाने वाली बात
सिटी में लॉ एंड आर्डर की समस्या बढ़ चुकी है। स्नेचिंग, किडनैपिंग और मर्डर जैसे मामलों को पुलिस साल्व नहीं कर पा रही है। मामला चाहे चोरी का हो, आर्थिक अपराध का हो या फिर साइबर क्राइम से जुड़ा, निपटारा कम ही हो पा रहा है। वास्तव में अब जरूरी है कि मॉडर्नाइजेशन के युग में ज्यादा से ज्यादा आधुुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाए। ताकि कानून-व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके। मुझे समझ नहीं आता कि छोटे से दायरे में बसे इस सिटी में इतना ज्यादा अपराध कैसे हो गया। वास्तव में कोई ऐसी पॉलिसी लानी चाहिए, जिसमें कम्यूनिटी पार्टिसिपेशन हो।
- पीसी सांघी (एक्स चेयरमैन, फासवेक)

सीनियर सिटिजन की शिकायत की अनदेखी न हो
सिटी में कानून-व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए डिजिटलाइजेशन जरूरी है, पर उससे भी ज्यादा जरूरी है डिजिटलाइजेशन का प्रयोग सिटी की पुलिस कैसे कर रही है। किसी भी सीनियर सिटिजन की कोई समस्या यदि सोशल मीडिया के माध्यम से दी जाती है तो उसके ऊपर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। तत्काल ही इस संबंध में पत्र भेजकर कार्रवाई होनी चाहिए।
- हरकिशन सिंह
 
 बाल अपराध एक बड़ा चैलेंज
पिछले कुछ समय में बाल अपराध एक बड़ा चैलेंज है। सवाल है कि इसके ऊपर नियंत्रण कैसे पाया जाए। बाल न्याय बोर्ड गठित किया गया है। वास्तव में यह एक सामान्य समस्या नहीं है। सामाजिक व कानून समस्या से जुड़ा मामला है। किन संगठनों की क्या भूमिका है, इसकी पालना और असर क्या हुआ इसमें समय लगेगा। वास्तव में बाल अपराधी पर मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। किसी बच्चे से यदि कोई गलती होती है तो देखना यह जरूरी है कि वह किस माहौल से आया है। सिटी में पिछले कुछ समय में कई ऐसी घटनाएं हुई है, जिन्होंने शहरवासियों को सोचने पर विवश किया है। वास्तव में इसका दूसरा पहलू है कि बच्चों को समय दिया जाना चाहिए। इसके लिए कोई स्पेशल यूनिट बनाई जानी चाहिए।
- अशोक भंडारी (रजिस्ट्रार पीयू)
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