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सब पास, परीक्षा नहीं हुई, लेकिन महामारी में भी बोर्ड परीक्षा जैसी तैयारी की
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चंडीगढ़। काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) शनिवार को आईसीएसई (कक्षा 10वीं) और आईएससी (कक्षा 12वीं) के परिणाम घोषित किया। यह लगातार दूसरा साल है, जब बोर्ड ने विद्यार्थियों का परिणाम आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर जारी किया है। पिछले दो सालों से रिजल्ट पर कोरोना का साया छाया हुआ है। मूल्यांकन नीति के हिसाब से जारी परिणाम के तहत चंडीगढ़ में बोर्ड के संचालित सभी स्कूलों के विद्यार्थी के पास हो गए हैं। हालांकि स्कूलों ने अपने टॉपर्स के नाम जारी किए हैं। अच्छे नंबर लाने वाले विद्यार्थियों ने बताया कि भले ही परीक्षा न हुई हो, लेकिन उनकी बोर्ड परीक्षाओं की तरह तैयारी थी।
उनके मन में यह सवाल बिलकुल नहीं था कि परीक्षा होगी या नहीं। धनुर्धर अर्जुन की तरह
उनका लक्ष्य साफ था कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करनी है। रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई करने के साथ छात्र सैंपल पेपर हल करते थे। लेकिन यह सब आसान नहीं था। कोविड काल जैसे तनाव भरे माहौल में एकाग्रता से पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है। कई ऐसे विद्यार्थी रहे हैं, जिनके परिजन कोरोना से जूझते रहे। कुछ ने अपनों को खोया भी है। इसके बावजूद वे तनाव में नहीं गए और पढ़ाई करते रहे। शिक्षकों ने भी माना है कि मुश्किल वक्त में इससे बेहतर परिणाम का मूल्यांकन नहीं हो सकता है।
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उनके मन में यह सवाल बिलकुल नहीं था कि परीक्षा होगी या नहीं। धनुर्धर अर्जुन की तरह
उनका लक्ष्य साफ था कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करनी है। रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई करने के साथ छात्र सैंपल पेपर हल करते थे। लेकिन यह सब आसान नहीं था। कोविड काल जैसे तनाव भरे माहौल में एकाग्रता से पढ़ाई करना बहुत मुश्किल होता है। कई ऐसे विद्यार्थी रहे हैं, जिनके परिजन कोरोना से जूझते रहे। कुछ ने अपनों को खोया भी है। इसके बावजूद वे तनाव में नहीं गए और पढ़ाई करते रहे। शिक्षकों ने भी माना है कि मुश्किल वक्त में इससे बेहतर परिणाम का मूल्यांकन नहीं हो सकता है।
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