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सब्जी बेचने वाला अब हरियाणा का सीएम

Wed, 22 Oct 2014 10:59 AM IST
मनोज कुमार/अर्जुन निराला/अमर उजाला, रोहतक
मनोज कुमार/अर्जुन निराला/अमर उजाला, रोहतक Updated Wed, 22 Oct 2014 10:59 AM IST
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all life history of new haryana chief minister manohar lal khattar

चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बना तो अब हरियाणा का मुखिया सब्जी बेचने वाला बनेगा। रोहतक जिले केगांव बनियानी केमनोहर लाल खट्टर को विधायक दल का नेता चुना गया, जो बचपन में सब्जी बेचा करते थे। उनका बचपन संघर्ष में बीता।

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कुछ समझदार हुए तो घर त्याग कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बन गए। भले ही गांव से उनका बाद में ज्यादा संपर्क नहीं रहा लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की घोषणा के बाद से वहां जश्न का माहौल बन गया। लोगों का कहना था कि धनतेरस के दिन इससे बड़ा तोहफा उन्हें और क्या मिल सकता है। वे उनके बचपन की एक-एक बात बताते नहीं थक रहे।

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पाकिस्तान से आया था परिवार

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मनोहर लाल खट्टर का परिवार बंटवारे के समय पाकिस्तान से आया था। पहले जालंधर और इसकेबाद करनाल जिले केगांव कुटेल में रहे। आखिर महम केपास गांव निदाणा में परिवार को मकान अलॉट हुआ और यहीं पर 5 मई, 1954 को खट्टर का जन्म हुआ। पिता हरबंस खट्टर ने यहां एक परचून की दुकान की हुई थी। उसी से परिवार का भरण पोषण चल रहा था।

जमीन बनियानी गांव में मिली, इसलिए 1958 में परिवार रोहतक शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर इस गांव में आ बसा। मनोहर पिता यहां  खेती करने लगे। सब्जियां उगाते थे। सात भाई-बहनों में सबसे बड़े मनोहर लाल खट्टर पर जिम्मेदारी ज्यादा थी। इस कारण वे पिता के साथ खेत में काम करते।

साइकिल पर रोहतक मंडी में बेचने जाते सब्जी

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बनियानी में ग्रामीणों के जश्न में शामिल होने रोहतक से गए खट्टर के छोटे भाई पेशे से शिक्षक चरणजीत ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति उस वक्त ज्यादा ठीक नहीं थी।

बड़े भाई मनोहर रात तीन बजे न केवल खुद उठते थे बल्कि उन्हें भी साथ खेत में ले जाते। वहां सब्जियां तोड़ते। इसकेबाद मनोहर सब्जियों को इकट्ठा कर साइकिल पर रोहतक मंडी में बेचने जाते। वापस लौटकर सुबह फिर साइकिल पर ही गांव भाली आनंदपुर पढ़ने जाते थे। उस वक्त वे दसवीं कक्षा में पढ़ते थे। प्राइमरी की पढ़ाई गांव बनियानी में पूरी की।

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और कर दिया शादी से इनकार

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मनोहर लाल खट्टर बचपन से ही गंभीर रहते थे लेकिन चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी।  पिता हरबंस ने शादी केलिए कहा तो इनकार कर दिया। चरणजीत बताते हैं कि जब वे संघ से जुड़े और घर छोड़ा तो पिताजी ने एक-दो बार उन्हें घर पर ही रहने केलिए कहा, लेकिन उन्होंने कह दिया कि वे देश केलिए पैदा हुए हैं और देश सेवा करनी है। इस कारण उन्होंने शादी भी नहीं की।

बचपन में भी नहीं रोते थे खट्टर
खट्टर के चाचा 72 वर्षीय किशोरी लाल ने बताया कि भतीजा मनोहर उनकेहाथों में खेलकर बड़ा हुआ। वह बचपन में रोता नहीं था। उनकी मां शांति देवी व पिता हरबंस खेत में जाते तो उसे उनकेपास ही छोड़कर जाते थे। उनका परिवार में पाकिस्तान से लुट पिट कर आया था। इसलिए परिवार चलाने के लिए मजदूरी भी की।

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