मोदी की सफलता का सीक्रेट सुनेंगे तो चौंक जाएंगे
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव से पहले एक गिफ्ट मिला था। इस गिफ्ट ने उनकी सफलता में काफी योगदान दिया। ये सीक्रेट खोला हरियाणा के कृषिमंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने। उन्होंने बताया कि न्होंने लोक सभा चुनाव से पहले कुछ किताबें पढ़ी थीं।
वे इनसे काफी प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने चुनाव से पहले इन किताबों को नरेंद्र मोदी को गिफ्ट किया था, ताकि वे इनसे जान सकें कि एक राजनेता में क्या खासियत होनी चाहिए। साथ ही उच्चस्तरीय नेता बनने के लिए क्या-क्या करना चाहिए। इसके अलावा किताब में बताया गया था कि कैसे एक नेता अपनी टीम को मोटिवेट करे और उन्हें साथ लेकर चले।
किताबों ने बहुत कुछ सिखाया है
कृषिमंत्री शनिवार को चंडीगढ़ के परेड ग्राउंड में शुरू हुए ‘बुक फेयर एंड क्रिसमस कॉर्निवल’ का उद्घाटन करने बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि किताबों की भूमिका उनके जीवन में बहुत अहम रही हैं। किताबों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है।
बच्चों की तरह मेहनत करे देश...
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृषि मंत्री धनखड़ ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा मेहनत स्कूली बच्चे करते हैं। आज अगर देश भी बच्चों की तरह मेहनत करे तो बहुत आगे जा सकता है। ठंड के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौजूदगी से उन्हें खुशी हो रही है। उन्हें बच्चे से प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि 11 साल तक स्कूल में पढ़ाया है। लेकिन, उन्होंने सबसे अधिक किताबें स्कूली जीवन में लाइब्रेरी में पढ़ीं। आज भी वे किसी टूर पर जाते हैं तो वहां से कोई न कोई किताब जरूर खरीदते हैं। शुक्रवार रात ही वे कायलो पायलो की ‘द एल्कीमेस्ट’ पढ़ रहे थे। उन्होंने स्टूडेंट्स से कोर्स बुक के अलावा और किताबें भी पढ़ने को कहा।
वहीं, गुरुकुल के स्टूडेंट्स ने जब कृषि मंत्री से बातचीत की और उनसे मिलने को कहा तो उन्होंने बच्चों को किसी भी वक्त उनके आवास या सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में आने का निमंत्रण दिया।
फूल भी बिकने चाहिए
कृषि मंत्री ने बताया कि कुछ साल पहले गुजरात सरकार ने किसी भी कार्यक्रम के आयोजन में बुके की बजाय बुक गिफ्ट करने की परंपरा शुरू की थी। उन्होंने कहा कि मैं ये नहीं कर सकता, क्योंकि में कृषि मंत्री हूं और मुझे किसानों की आय के बारे में भी सोचना है। इसके लिए फूल बिकने भी जरूरी हैं।
गीता बुढ़ापे में नहीं स्कूली जीवन में पढ़ें
कृषि मंत्री ने कहा कि लोग अकसर कहते हैं कि वे धार्मिक किताबें जैसे गीता या अन्य बुढ़ापे में पढ़ेंगे। धनखड़ ने कहा कि ऐसी किताबों में जीवन का सार है। इन्हें बाद में नहीं स्कूली जीवन में पढ़ना चाहिए। इनसे लोग जीना सीखते हैं।