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हरियाणा: मेरा पानी-मेरी विरासत जागरूकता के लिए फील्ड में उतरेंगे कृषि अफसर, ऐसे करेंगे जागरुक

Fri, 15 May 2020 01:21 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 15 May 2020 01:21 AM IST
सार

  • निर्देश, फील्ड में किसानों को धान के अलावा अन्य वैकल्पिक खेती के लिए जागरूक बनाएं
  • आढ़तियों, खाद डीलरों की दुकानों के बाहर कृषि विभाग लगाएगा जागरूकता बैनर

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Agricultural officers will come to the field for awareness in Haryana

विस्तार

धान की बजाय अन्य वैकल्पिक खेती करने के लिए किसानों जागरूक करने का जिम्मा हरियाणा सरकार ने विभिन्न जिलों के कृषि अफसरों को सौंपा है। कृषि अफसर फील्ड में जाकर किसानों को इसके लिए जागरूक करेंगे। किसानों को 'मेरा पानी- मेरी विरासत' योजना से जोड़ने के लिए फील्ड अफसर भी भरसक प्रयास करेंगे। साथ ही बैनरों के जरिए भी किसानों को जागरूक किया जाएगा।

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कृषि विभाग ये बैनर मंडियों में सभी आढ़तियों की दुकानों और खाद डीलरों की दुकानों के बाहर लगवाएगा। कृषि उप निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि हरियाणा सरकार ने एक लाख हेक्टेयर में धान के स्थान पर मक्का, कपास, बाजरा, दलहन की फसल की खेती करने के लिए नई फसल विविधिकरण योजना ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ की शुरुआत की है।
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डॉक्टर नागपाल के अनुसार इस योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों को उगाकर विविधीकरण करने की एवज में किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके तहत 8 खंडों जिनमें, फतेहाबाद जिले का रतिया, कैथल जिले का सिवान और गुहला, कुरुक्षेत्र जिले के पिपली, शाहबाद, बाबैन, इस्माइलाबाद और सिरसा जिले का सिरसा खण्ड शामिल है, को चिहिन्त किया गया है, जहां भू-जल स्तर 40 मीटर से ज्यादा नीचे है।

उन्होंने बताया कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का विस्तार और प्रचार करने के लिए जिलों में सहायक कृषि अधिकारियों और अन्य फील्ड अफसरों की टीमें सीधे किसानों के संपर्क में है, उन्होंने बताया कि सभी जिलों में आढ़तियों और बीज एवं खाद डीलरों की दुकानों के बाहर सरकार की इस योजना के प्रचार के लिए जागरूकता बैनर लगाए जा रहे हैं, प्रति किसानों को इस पूरी योजना की जानकारी मिले और किसान इसका लाभ उठा सकें। उनके अनुसार धान की जगह अन्य वैकल्पिक फसलें लगाने के लिए बहुत से किसान सुरक्षा से तैयार भी हो रही ताकि भूजल की स्थिति को सुधारा जा सके। 

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