{"_id":"584827624f1c1be159449636","slug":"aggressive-punjabi-songs-that-encourage-young-people-to-take-up-arms","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"डांसर गोलीकांड: भड़काऊ गाने युवाओं को हथियार उठाने को करते हैं उत्साहित!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डांसर गोलीकांड: भड़काऊ गाने युवाओं को हथियार उठाने को करते हैं उत्साहित!
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर
Updated Thu, 08 Dec 2016 11:06 AM IST
विज्ञापन
पंजाबी गाने युवाओं को हथियार उठाने को करते हैं उत्साहित
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बब्बू मान का गाना है.. खेडनंगे अज्ज जट्ट खून दियां होलियां.. चकलो रिवाल्वर अज्ज कब्जा लैणा है। पंजाब की गायकी के शिखर को छूने वाले दलजीत दोसांझ का गाना है.. जित्थे हुंदी है पाबंदी हथियारां दी जट्ट ओथे फायर करदा।
गिप्पी ग्रेवाल का गीत.. जट मोडे लमकाके रखदे 12 बोर दी नी जट्ट मोडे ते लमका के रखदे 12 बोर दी। बब्बू मान का ही गीत.. मितरां नूं शौक हथियारां दा। यह गाना शादी ब्याह में डीजे पर सुने जाते हैं। इस वजह से नाचनेे वाले इतने उत्साहित हो जाते हैं कि वे हथियारों को उठाने से गुरेज नहीं करते और हथियार उठाकर नाचने लगते हैं।
गायक चाहे दीप सिंह हो, जिसने अपनी एलबम का टाइटल ही रख दिया ‘दोनाली जहे यार’ जी संधू ने अपनी एलबम का टाइटल रखा ‘दोनाली जट्ट दी’ प्रदीप सरां ने तो एलबम का टाइटल रखा ‘दादे दी दोनाली’। पंजाबी गायकों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है कि वह युवाओं को हथियारों, दोनाली और गोलियों की बात कर उनको थिरकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यही वजह है कि शिखर पर पहुंच चुके पंजाबी गायक बब्बू मान, गिप्पी ग्रेवाल, जैजी बी, दलजीत दोसांझ भी हथियारों कोे अपनेे गानों में शामिल कर एलबम को हिट करने की कोशिश में रहते हैं। पंजाबी गायकी में बदलते इस ट्रेंड से ही जहां धड़ाधड़ एलबम हिट हो रही है, वहीं शादी ब्याह में हथियारों का प्रयोग तेजी से होेने लगा है, जो लोगों की जिंदगी लीलने लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गिप्पी ग्रेवाल का गीत.. जट मोडे लमकाके रखदे 12 बोर दी नी जट्ट मोडे ते लमका के रखदे 12 बोर दी। बब्बू मान का ही गीत.. मितरां नूं शौक हथियारां दा। यह गाना शादी ब्याह में डीजे पर सुने जाते हैं। इस वजह से नाचनेे वाले इतने उत्साहित हो जाते हैं कि वे हथियारों को उठाने से गुरेज नहीं करते और हथियार उठाकर नाचने लगते हैं।
विज्ञापन
गायक चाहे दीप सिंह हो, जिसने अपनी एलबम का टाइटल ही रख दिया ‘दोनाली जहे यार’ जी संधू ने अपनी एलबम का टाइटल रखा ‘दोनाली जट्ट दी’ प्रदीप सरां ने तो एलबम का टाइटल रखा ‘दादे दी दोनाली’। पंजाबी गायकों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है कि वह युवाओं को हथियारों, दोनाली और गोलियों की बात कर उनको थिरकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यही वजह है कि शिखर पर पहुंच चुके पंजाबी गायक बब्बू मान, गिप्पी ग्रेवाल, जैजी बी, दलजीत दोसांझ भी हथियारों कोे अपनेे गानों में शामिल कर एलबम को हिट करने की कोशिश में रहते हैं। पंजाबी गायकी में बदलते इस ट्रेंड से ही जहां धड़ाधड़ एलबम हिट हो रही है, वहीं शादी ब्याह में हथियारों का प्रयोग तेजी से होेने लगा है, जो लोगों की जिंदगी लीलने लगा है।
विज्ञापन
'युवा पीढ़ी को भड़काने वाले गाने न गाएं गायक'
शादी समारोह की खूनी लीला
युवा पीढ़ी को भड़काने वाले गाने न गाएं गायक : बाली
पंजाबी जागृति मंच के प्रधान व प्लाज्मा रिकॉर्ड के मालिक दीपक बाली जो देश विदेशों में पंजाबी विरसा का आयोजन करते आ रहे हैं, उनका कहना है कि पंजाबी गायकी का विदेशों में मुकाबला नहीं है, लेकिन गायकों को ऐसे गानों से गुरेज करना चाहिए, जिससे युवा पीढ़ी भटके और हथियारों की तरफ उनका ध्यान भागे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पंजाबी गायकी रेखा से हट रही है, लेकिन पंजाबी विरासत को संभालने के लिए वचनबद्ध शख्सियतें भी हैं, जो इस प्रति काफी चिंतित हैं।
सरकार जिम्मेदार, पंजाबी सभ्याचरक पर धब्बा : बोलीना
शिरोमणि कमेटी के पूर्व सलाहकार व पंजाबी विभाग के प्रमुख रह चुके हरबंस सिंह बोलीना का कहना है कि पंजाब में सभ्याचार का बेड़ा गर्क हो चुका है, जिसकी जिम्मेदार पंजाब सरकार है। देश में योग नीति बन सकती है तो सभ्याचार नीति बनाने में क्या दिक्कत है? हमारा सभ्याचार ही हमारी धरोहर है। आज जाटों के हाथ में हथियारों के गाने गाए जा रहे हैं, जाट को कर्जे के नीचे दबा हुआ है। हमारी पंजाबी संस्कृति का यह हिस्सा ही नहीं है कि हथियारों को उठाकर नाच गाना किया जाए।
‘पंजाबियों की मानसिकता को बदलना जरूरी’
साइकॉलोजी विभाग की प्रमुख डॉ. जसबीर कौर ऋषि का कहना है कि पंजाबी लोगों की मानसिकता बदल चुकी है। इसके लिए गायकी काफी हद तक जिम्मेदार है। हमारी पंजाबी गायकी ऐसी नहीं थी, जैसी आज बन चुकी है। पंजाबी युवा ही गायकों को अपना आइकॉन मानने लगे हैं। यही वजह है कि शादी ब्याह में आज गाने के दौरान हथियार खुलकर लहराए जाते हैं।
पंजाबी जागृति मंच के प्रधान व प्लाज्मा रिकॉर्ड के मालिक दीपक बाली जो देश विदेशों में पंजाबी विरसा का आयोजन करते आ रहे हैं, उनका कहना है कि पंजाबी गायकी का विदेशों में मुकाबला नहीं है, लेकिन गायकों को ऐसे गानों से गुरेज करना चाहिए, जिससे युवा पीढ़ी भटके और हथियारों की तरफ उनका ध्यान भागे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पंजाबी गायकी रेखा से हट रही है, लेकिन पंजाबी विरासत को संभालने के लिए वचनबद्ध शख्सियतें भी हैं, जो इस प्रति काफी चिंतित हैं।
सरकार जिम्मेदार, पंजाबी सभ्याचरक पर धब्बा : बोलीना
शिरोमणि कमेटी के पूर्व सलाहकार व पंजाबी विभाग के प्रमुख रह चुके हरबंस सिंह बोलीना का कहना है कि पंजाब में सभ्याचार का बेड़ा गर्क हो चुका है, जिसकी जिम्मेदार पंजाब सरकार है। देश में योग नीति बन सकती है तो सभ्याचार नीति बनाने में क्या दिक्कत है? हमारा सभ्याचार ही हमारी धरोहर है। आज जाटों के हाथ में हथियारों के गाने गाए जा रहे हैं, जाट को कर्जे के नीचे दबा हुआ है। हमारी पंजाबी संस्कृति का यह हिस्सा ही नहीं है कि हथियारों को उठाकर नाच गाना किया जाए।
‘पंजाबियों की मानसिकता को बदलना जरूरी’
साइकॉलोजी विभाग की प्रमुख डॉ. जसबीर कौर ऋषि का कहना है कि पंजाबी लोगों की मानसिकता बदल चुकी है। इसके लिए गायकी काफी हद तक जिम्मेदार है। हमारी पंजाबी गायकी ऐसी नहीं थी, जैसी आज बन चुकी है। पंजाबी युवा ही गायकों को अपना आइकॉन मानने लगे हैं। यही वजह है कि शादी ब्याह में आज गाने के दौरान हथियार खुलकर लहराए जाते हैं।