सरकारी नौकरियों में 25 से 37 हुई आयु सीमा, भावुक हुई सांसद किरण खेर
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सरकारी नौकरियों में आवेदन की अधिकतम आयु सीमा को 25 वर्ष से बढ़ाकर पंजाब की तर्ज पर 37 वर्ष कर दिया गया है। यूटी प्रशासन ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी।
इस फैसले से यूटी के वे हजारों लोग जिनकी आयु 25 से अधिक हो चुकी थी, अब सरकारी नौकरियों में आवेदन करने योग्य हो गए हैं। यूटी गेस्ट हाउस में इस फैसले की घोषणा करते हुए सांसद किरण खेर भावुक हो गईं।
खेर ने कहा कि उनके पास शहर के सैकड़ों लोग यह मांग लेकर आते थे। उनकी पीड़ा सुनकर मन भर आता था। पहले उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाया फिर यूटी प्रशासन के पीछे पड़कर इसे लागू करवाया।
खेर ने कहा कि यह फैसला प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की वजह से ही जल्दी हो पाया है। इस फैसले के बाद स्टेनो, क्लर्क और जूनियर इंजीनियर जैसे टेक्निकल और नॉन टेक्निकल पदों के लिए 37 वर्ष तक आवेदन किया जा सकेगा।
चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी मिनिस्ट्रियल कैडरपदों के लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं से बढ़ाकर स्नातक कर दी थी, लेकिन आयु सीमा 18-25 वर्ष ही चल रही थी। इस कारण हजारों युवाओं को नौकरी पाने का पूरा अवसर ही नहीं मिल पाता था।
एमएचए ने अपने स्तर पर फैसला लेने को दी थी हरी झंडी
25 साल तो युवाओं को स्नातक करते हुए और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए ही हो जाते थे। बाकी सभी मामलों में चंडीगढ़ पंजाब रूल्स को फॉलो करता है, लेकिन आयु सीमा के मामले में चंडीगढ़ न पंजाब को और न ही केंद्र सरकार को फॉलो करता था। केंद्र सरकार की नौकरियों में भी अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष है।
एमएचए ने अपने स्तर पर फैसला लेने को दी थी हरी झंडी
13 अक्तूबर को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (एमएचए) ने चिट्ठी जारी कर स्पष्ट किया था कि एमएचए का इस मामले में कोई रोल नहीं है। यह स्थानीय विषय है, जिस पर यूटी प्रशासन अपने अनुकूल फैसला ले सकता है।
केंद्र सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलते ही सांसद किरण खेर ने पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को चिट्ठी लिखकर यह मामला देखने की अपील की थी। इसके बाद प्रशासक ने संबंधित अधिकारियों को इस बारे में जल्द फैसला लेने के आदेश जारी किए थे।
आयु सीमा तो बढ़ी लेकिन कोटा अभी नहीं
चंडीगढ़ में आयु सीमा तो बढ़ा दी गई, लेकिन पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर यहां के नागरिकों को अभी नौकरियों में कोटा नहीं मिल पाया है, जिस कारण उन्हें चंडीगढ़ का नागरिक होने के बावजूद कोई विशेष फायदा नहीं मिल पाता।
जबकि पंजाब और हरियाणा के नागरिकों को अपने कोटे की सीटों का फायदा मिलता है। साथ ही डोमिसाइल न बनने के कारण चंडीगढ़ वासी पंजाब, हरियाणा और हिमाचल जैसे दूसरे प्रदेशों में नौकरियों के लिए आवेदन ही नहीं कर पाते। जबकि चंडीगढ़ में पूरे देश के नागरिकों को बराबर अवसर मिलते हैं।
सांसद ने पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल पर बोला हमला
सांसद खेर ने पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल पर हमला करते हुए कहा कि वह तो केंद्र में मंत्री थे, सरकार भी उनकी थी और प्रशासक भी उनके ही थे, लेकिन शायद उनकी केंद्र में व्यस्तता ज्यादा रही होगी। इस कारण चंडीगढ़ पर ध्यान ही नहीं दे पाए।
2004 में योग्यता को 12वीं से स्नातक कर दिया गया, लेकिन आयु सीमा बढ़वाने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पवन बंसल न तो शहर को उसके हिस्से का पानी दिलवा पाए और न ही युवाओं को नौकरी दिलवाने के लिए आयु सीमा बढ़वा पाए।
खेर ने कहा कि नियम बदलवाना आसान काम नहीं होता। उन्होंने लगातार पीछे पड़कर आयु सीमा को 25 से 37 वर्ष करवाया है। खेर ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के नागरिकों को जो हक चंडीगढ़ में मिलता है वह हक यहां के नागरिकों को भी पंजाब और हरियाणा में मिलना चाहिए।
आखिर दोनों प्रदेश चंडीगढ़ को बड़ी शान से अपनी राजधानी बताते हैं तो यहां के नागरिकों से सौतेला व्यवहार क्यों किया जाता है। दोनों प्रदेशों को चंडीगढ़ वासियों को अपने नागरिकों की तरह बराबर अवसर देने चाहिए। खेर ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य कोटा निर्धारित करवाने के साथ ही डोमिसाइल की समस्या भी हल करवाना रहेगा।
ढोल बजाकर लोगों ने सांसद का जताया आभार
यूटी गेस्ट हाउस में सांसद किरण खेर आयु सीमा बढ़ने की घोषणा कर ही रही थी कि बीच में शहर की विभिन्न एसोसिएशन और संगठनों के पदाधिकारी उनका आभार जताने पहुंच गए।