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विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली लोस सीट पर उपचुनाव की कवायद शुरू
जितेंद्र शर्मा/अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
Updated Thu, 04 May 2017 09:40 AM IST
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vinod khanna
- फोटो : File Photo
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गुरदासपुर के सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर अब उप-चुनाव की कवायद शुरू हो चुकी है। पांच मई को जिला गुरदासपुर और पठानकोट के अधिकारी उप-चुनाव को लेकर संयुक्त रूप से बैठक करेंगे। बैठक के बाद उन्हें अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजनी है। हालांकि आयोग की ओर से फिलहाल उप-चुनाव की तिथि का ऐलान अभी नहीं किया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि उपचुनाव के तहत मतदान की प्रक्रिया संभवत: जुलाई से सितंबर माह के बीच पूरी कर ली जाएगी।
भाजपा के लिए सीट बरकरार रखने की होगी चुनौती
लोस हलका गुरदासपुर के सांसद विनोद खन्ना ने बतौर भाजपा उम्मीदवार जीत दर्ज की थी। इससे पूर्व यह सीट कांग्रेस के पास थी। यहां से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रताप सिंह बाजवा सांसद थे। अब एक बार फिर इस सीट के खाली होने से इस पर कांग्रेस की नजर होगी। वहीं भाजपा के सामने गुरदासपुर सीट अपने पास बरकरार रखने की चुनौती होगी। इसलिए दोनों ही दल प्रत्याशी के चयन के मामले में मंथन के बाद ही कोई उचित निर्णय लेंगे।
आयोग के निर्देश पर उठाएंगे अगला कदम : डीसी
गुरदासपुर के डीसी अमित कुमार का कहना है कि चुनाव आयोग की तरफ से उपचुनाव को लेकर फिलहाल कोई निर्देश नहीं आया है। जुलाई से सितंबर के बीच उप-चुनाव संभावित है। इसलिए पहले से ही तैयार रहने के लिए प्रशासन की ओर से मीटिंग बुलाई गई है। आयोग के निर्देश के अनुसार ही प्रशासनिक स्तर पर अगला कदम उठाया जाएगा।
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भाजपा के लिए सीट बरकरार रखने की होगी चुनौती
लोस हलका गुरदासपुर के सांसद विनोद खन्ना ने बतौर भाजपा उम्मीदवार जीत दर्ज की थी। इससे पूर्व यह सीट कांग्रेस के पास थी। यहां से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रताप सिंह बाजवा सांसद थे। अब एक बार फिर इस सीट के खाली होने से इस पर कांग्रेस की नजर होगी। वहीं भाजपा के सामने गुरदासपुर सीट अपने पास बरकरार रखने की चुनौती होगी। इसलिए दोनों ही दल प्रत्याशी के चयन के मामले में मंथन के बाद ही कोई उचित निर्णय लेंगे।
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आयोग के निर्देश पर उठाएंगे अगला कदम : डीसी
गुरदासपुर के डीसी अमित कुमार का कहना है कि चुनाव आयोग की तरफ से उपचुनाव को लेकर फिलहाल कोई निर्देश नहीं आया है। जुलाई से सितंबर के बीच उप-चुनाव संभावित है। इसलिए पहले से ही तैयार रहने के लिए प्रशासन की ओर से मीटिंग बुलाई गई है। आयोग के निर्देश के अनुसार ही प्रशासनिक स्तर पर अगला कदम उठाया जाएगा।
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खन्ना के विकल्प के तौर पर भाजपा को इलाके के किसी कद्दावर नेता को यहां उतारना होगा। स्थानीय नेता स्वर्ण सलारिया पहले भी टिकट के लिए जोर-आजमाइश करते रहे हैं। इलाके में न केवल उनकी अच्छी पैठ है बल्कि विधानसभा चुनाव लड़ने वाले कई पार्टी उम्मीदवारों की भी वह मदद करते रहे हैं। हालांकि पार्टी द्वारा एक बार फिर किसी फिल्मी हस्ती को गुरदासपुर से चुनाव लड़ाने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर कांग्रेस को भी पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे प्रताप सिंह बाजवा की जगह किसी अन्य प्रत्याशी पर दांव खेलना होगा। हालांकि बाजवा 2009 में विनोद खन्ना के मुकाबले इसी सीट पर जीते थे लेकिन अब वह राज्यसभा सदस्य हैं। इसलिए लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें पार्टी शायद ही प्रत्याशी बनाए। माना जा रहा है कि पार्टी किसी विधायक को यहां से लोकसभा चुनाव लड़ा सकती है।
ऐसा ही कुछ आम आदमी पार्टी को भी करना पड़ सकता है। पिछले चुनाव में सुच्चा सिंह छोटेपुर ने आप के टिकट पर गुरदासपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन बाद में केजरीवाल और कथित बाहरी नेताओं के पंजाब में दखल का विरोध करने के कारण उन्हें पार्टी से अलग होना पड़ा था। अब उन्होंने अपना पंजाब पार्टी बनाई है, जिसने हाल ही में विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि छोटेपुर द्वारा लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना कम ही है।
दूसरी ओर कांग्रेस को भी पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे प्रताप सिंह बाजवा की जगह किसी अन्य प्रत्याशी पर दांव खेलना होगा। हालांकि बाजवा 2009 में विनोद खन्ना के मुकाबले इसी सीट पर जीते थे लेकिन अब वह राज्यसभा सदस्य हैं। इसलिए लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें पार्टी शायद ही प्रत्याशी बनाए। माना जा रहा है कि पार्टी किसी विधायक को यहां से लोकसभा चुनाव लड़ा सकती है।
ऐसा ही कुछ आम आदमी पार्टी को भी करना पड़ सकता है। पिछले चुनाव में सुच्चा सिंह छोटेपुर ने आप के टिकट पर गुरदासपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन बाद में केजरीवाल और कथित बाहरी नेताओं के पंजाब में दखल का विरोध करने के कारण उन्हें पार्टी से अलग होना पड़ा था। अब उन्होंने अपना पंजाब पार्टी बनाई है, जिसने हाल ही में विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि छोटेपुर द्वारा लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना कम ही है।