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एसडीएम से मिले आढ़ती, तीन पार्किंग मुफ्त करने का मिला आश्वासन
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चंडीगढ। सेक्टर-26 के आढ़ती शुक्रवार को एसडीएम नाजुक कुमार से मिले। इस दौरान उन्होंने पत्र देकर कहा कि पार्किंग की निविदा पहले की तरह कर दें या आढ़तियों को सेक्टर-39 मंडी में शिफ्ट कर दें क्योंकि इससे आढ़तियों को काफी नुकसान हो रहा है। एसडीएम ने आढ़तियों को आश्वासन दिया है कि सड़क के किनारे बनी तीन पार्किंग को निविदा से स्वतंत्र (मुफ्त) कर दिया जाएगा।
अरिहंत वेजिटेबल आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष कस्तूरी लाल शर्मा ने बताया कि सुबह 4 बजे के बाद मंडी में कोई गाड़ी प्रवेश नहीं कर सकती है। अगले दिन तक गाड़ी पार्किंग में लगानी होती है। तब तक माल भी खराब हो जाता है और दाम भी आधे रह जाते हैं। वहीं पार्किंग का शुल्क अलग से देना होता है। अब पार्किंग के शुल्क दोगुने हो गए हैं जिससे खर्च ही बढ़ेगा। उपाध्यक्ष गौरव ने एसडीएम से कहा कि 60 साल पहले मंडी ढाई लाख की आबादी के हिसाब से बनाई गई थी। अब जनसंख्या बढ़ने के साथ ही माल की आवक भी बढ़ी है। अभी मंडी में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश से माल आता है। इतने जगहों से जब ट्रक आएंगे तो उनका प्रयास रहता है कि माल उतारकर अगले पड़ाव की ओर बढ़ें, लेकिन मंडी में जगह के अभाव में उन्हें यहां रुकना पड़ता है।
आढ़ती बोले- मंडी को सेक्टर-39 में भेजने का यह सही समय
आढ़तियों ने कहा कि अब समय आ गया है कि मंडी को जल्द सेक्टर-39 में भेज देना चाहिए ताकि इन समस्याओं का निस्तारण हो सके। वहीं ट्रक आकर दुकानों के सामने खड़े होंगे तो माल कैसे उतरेगा। वहीं जो पार्किंग के रुपये देगा, वह तो गाड़ी बिल्कुल नहीं हटाएगा और इससे प्रतिदिन विवाद बढ़ेंगे। सभी समस्याओं को सुनकर एसडीएम ने कहा कि तीन पार्किंग फिलहाल स्वतंत्र (मुफ्त) की जा सकती हैं। अन्य समस्याओं के लिए डीसी मनदीप सिंह बराड़ से बातचीत करके हल निकालने का प्रयास करेंगी। वहीं मंडी सचिव जरनैल सिंह मावी का कहना है कि सोमवार को एसडीएम की ओर से जो निर्देश होगा, उस पर काम किया जाएगा। हालांकि पार्किंग की निविदा में शर्त रखी गई है कि आवश्यकता अनुसार उसमें बदलाव किए जा सकते हैं।
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अरिहंत वेजिटेबल आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष कस्तूरी लाल शर्मा ने बताया कि सुबह 4 बजे के बाद मंडी में कोई गाड़ी प्रवेश नहीं कर सकती है। अगले दिन तक गाड़ी पार्किंग में लगानी होती है। तब तक माल भी खराब हो जाता है और दाम भी आधे रह जाते हैं। वहीं पार्किंग का शुल्क अलग से देना होता है। अब पार्किंग के शुल्क दोगुने हो गए हैं जिससे खर्च ही बढ़ेगा। उपाध्यक्ष गौरव ने एसडीएम से कहा कि 60 साल पहले मंडी ढाई लाख की आबादी के हिसाब से बनाई गई थी। अब जनसंख्या बढ़ने के साथ ही माल की आवक भी बढ़ी है। अभी मंडी में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश से माल आता है। इतने जगहों से जब ट्रक आएंगे तो उनका प्रयास रहता है कि माल उतारकर अगले पड़ाव की ओर बढ़ें, लेकिन मंडी में जगह के अभाव में उन्हें यहां रुकना पड़ता है।
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आढ़ती बोले- मंडी को सेक्टर-39 में भेजने का यह सही समय
आढ़तियों ने कहा कि अब समय आ गया है कि मंडी को जल्द सेक्टर-39 में भेज देना चाहिए ताकि इन समस्याओं का निस्तारण हो सके। वहीं ट्रक आकर दुकानों के सामने खड़े होंगे तो माल कैसे उतरेगा। वहीं जो पार्किंग के रुपये देगा, वह तो गाड़ी बिल्कुल नहीं हटाएगा और इससे प्रतिदिन विवाद बढ़ेंगे। सभी समस्याओं को सुनकर एसडीएम ने कहा कि तीन पार्किंग फिलहाल स्वतंत्र (मुफ्त) की जा सकती हैं। अन्य समस्याओं के लिए डीसी मनदीप सिंह बराड़ से बातचीत करके हल निकालने का प्रयास करेंगी। वहीं मंडी सचिव जरनैल सिंह मावी का कहना है कि सोमवार को एसडीएम की ओर से जो निर्देश होगा, उस पर काम किया जाएगा। हालांकि पार्किंग की निविदा में शर्त रखी गई है कि आवश्यकता अनुसार उसमें बदलाव किए जा सकते हैं।
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