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Chandigarh News: दाखिला न मिलने पर प्रशासक गंभीर, हर बच्चे को शिक्षा दिलाने का किया वादा

Thu, 06 Apr 2023 02:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Apr 2023 02:11 AM IST
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Administrator serious about not getting admission, promised to provide education to every child
चंडीगढ़। शहर के कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों को दाखिला न मिलने के मामले को प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि एक भी बच्चा बिना शिक्षा और स्कूल के नहीं रहना चाहिए। शिक्षा दिलाना हमारा कर्तव्य है और हम यह काम करेंगे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा सचिव पूर्वा गर्ग से सभी बच्चों को शिक्षा देने का वादा लिया। उन्होंने कहा कि चाहे स्कूलों को दो शिफ्ट में चलाएं पर शहर का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। गौर हो कि अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। बुधवार को अवसर था सेक्टर-39 के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नए ब्लॉक के भूमि पूजन का। सांसद किरण खेर, चंडीगढ़ के सलाहकार डॉ. धर्मपाल की मौजूदगी में प्रशासक ने भूमि पूजन किया। कार्यक्रम में शिक्षा सचिव पूर्वा गर्ग, चीफ इंजीनियर सीबी ओझा, चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया मौजूद रहे। इस मौके पर शिक्षा सचिव पूर्वा गर्ग ने कहा कि 5.74 करोड़ के बजट में बनने जा रही तीन मंजिला इमारत में विज्ञान और व्यावसायिक कार्यशालाएं बनाई जाएंगी। इस मौके पर विभाग द्वारा स्कूलों को 400 डेस्कटॉप कंप्यूटर भी वितरित किए गए।
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जल्द स्कूल बनाने का काम किया जाए पूरा
प्रशासक ने शिक्षा विभाग से नए बनने वाले स्कूलों के बारे में पूछा और जल्द से जल्द काम पूरा करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल किसी निजी स्कूल से कम नहीं हैं। इंफ्रास्ट्रकचर, तकनीक से लेकर अध्यापकों तक में चंडीगढ़ के स्कूल अव्वल दर्जे के हैं। प्रशासक ने दावा किया कि वह स्कूलों का शिक्षा स्तर कम नहीं होने देंगे।
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चंडीगढ़ के बच्चों के लिए हो सकती है सीटें आरक्षित
सरकारी स्कूलों में कक्षा 11 में दाखिले के लिए मारामारी रहती है। सांसद किरण खेर ने बाहर के बच्चों का दाखिला होने से शहर के विद्यार्थियों को सीट न मिलने की बात रखी और कहा कि शहर के बच्चों के लिए सीट आरक्षित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पॉलिसी तैयार हो गई है, जिसे जल्द पास किया जाएगा। इसलिए मैं पहले ही प्रशासन का धन्यवाद करती हूं।
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बचपन में क्लास न लगाने की तरकीब में सीखे अच्छे संस्कार
प्रशासक ने अध्यापकों से बच्चों में अच्छे संस्कार डालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्कूल कृष्ण सुदामा की संस्कृति पर होना चाहिए जहां सभी को समान वातावरण मिले और विद्यार्थी सादा जीवन उच्च विचार का आचरण करें। अपने बचपन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि चौथी कक्षा में जब सुबह की सभा में उनकी कक्षा की प्रार्थना गाने का समय आता था तो वह हमेशा गणेश वंदना गाते थे। वह प्रार्थना इतने आराम और लय में गाते थे कि पहली कक्षा का समय उसी में निकल जाता था। दरअसल यह उनकी अपने अंग्रेजी के अध्यापक की पहली क्लास से बचने की तरकीब थी। यह सही तो नहीं था पर इससे उन्हें गणेश वंदना याद हो गई थी, जिससे उनमें अच्छे संस्कार की आदत पड़ी।
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