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चंडीगढ़ : पटाखे फोड़ने पर प्रशासन लगा सकता है पूर्ण प्रतिबंध, इन राज्यों में पहले ही लग चुकी पाबंदी

Wed, 04 Nov 2020 02:21 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 04 Nov 2020 02:21 AM IST
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Administration may impose complete ban on bursting of firecrackers
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

कोरोना के खतरे को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन भी अन्य राज्यों की तरह पटाखे फोड़ने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा सकता है। इस बारे में मंगलवार को डीसी मनदीप सिंह बराड़ और एडीसी नाजुक कुमार ने संकेत भी दे दिए। दोनों अफसरों ने पटाखा विक्रेताओं से कहा कि वह लोग अभी पटाखों का स्टॉक न खरीदें।

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राजस्थान, उत्तराखंड और ओडिशा सरकार ने अपने-अपने राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए दिवाली पर पटाखे खरीदने, बेचने व फोड़ने पर पाबंदी लगा दी है। यह प्रतिबंध कुछ राज्यों में 30 नवंबर तक तो कुछ राज्यों में 31 दिसंबर तक लगाया है। इन राज्यों की सरकारों ने लोगों से कहा है कि वह मिट्टी के दीये, मोमबत्ती और रंगीन लाइटें जला कर दीपावली मनाएं।
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पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने भी सोमवार को इस बारे में संकेत दिए थे। समीक्षा बैठक में उन्होंने शहरवासियों से दिवाली पर पटाखे न जलाने का आग्रह किया था। कहा था कि पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है।
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इसके अलावा शहर में कोरोना के संक्रमण को फिर फैलाने में सहायक हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब चंडीगढ़ प्रशासन पटाखों को जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध के संबंध में पंजाब और हरियाणा के फैसले का इंतजार कर रहा है।

अमेरिका और इटली में प्रदूषण से भयावह हुआ कोरोना

मंगलवार को चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से शहरवासियों के लिए एक ‘हेल्थ एडवाइजरी’ जारी की गई। प्रशासन ने कहा कि शहर की हवा में ठंड बढ़ रही है। ऐसे में बहुत से लोगों को खांसी और जुकाम की शिकायतें हो रही हैं। वहीं, देश में कोरोना का संकट अभी भी बरकरार है।

दिवाली के मौके पर बहुत से लोग पटाखे जलाते हैं। ऐसे में पटाखों के जलने के बाद निकला जहरीला धुआं बुजुर्ग व पहले से ही अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों के फेफड़ों को बेहद नुकसान पहुंचा सकता है। प्रशासन ने अपनी हेल्थ एडवाइजरी में कहा है कि इटली और अमेरिका में किए गए अनेकों अध्ययन में सामने आया है कि प्रदूषण के बढ़ने से कोरोना से मौत के आंकड़ों में भी वृद्धि हुई है।

कोविड की 15 प्रतिशत मौतों का कारण जहरीली हवा
प्रशासन ने कहा है कि विभिन्न अध्यनों में यह भी सामने आया है कि कोरोना की वजह से हुई कुल मौतों में 15 प्रतिशत मौतें, प्रदूषित हवा में सांस लेने की वजह से हुई हैं। प्रशासन ने कहा कि अगर शहर की हवा में जहरीला प्रदूषण घुल जाता है तो यह बहुत से शहरवासियों के लिए खतरनाक होगा।

खासतौर पर उन लोगों के लिए और भी समस्या खड़ी हो जाएगी जो कोरोना से जूझ रहे हैं और अस्पताल में भर्ती हैं या फिर घर पर होम क्वारंटीन हैं। प्रशासन ने यहां तक कहा है कि यह उन लोगों के लिए भी बेहद खतरनाक होगा, जो कोरोना को हराकर दोबारा अपनी पुरानी जिंदगी में लौटे हैं। प्रदूषण उन्हें भी काफी नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक की तरफ से यह सलाह दी गई है कि शहरवासी दिवाली के मौके पर पटाखे न जलाएं और घर में ही रहें।

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