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महिला कांस्टेबल की हत्या के मामले में एडीजीपी क्राईम हाईकोर्ट में तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 24 Nov 2016 06:51 PM IST
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
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यूटी पुलिस की महिला कांस्टेबल की करनाल लेकर हत्या करने के मामले में हरियाणा पुलिस की जांच की शैली पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए एडीजीपी क्राईम शत्रुजीत कपूर को तलब करते हुए अगली सुनवाई पर कोर्ट में मौजूद रहने के आदेश दिए हैं। इस केस में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब हाईकोर्ट ने एडीजीपी क्राईम को हाईकोर्ट में तलब किया हो। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2017 को होगी।
यूटी पुलिस में वर्ष 2011 में भर्ती हुई और 2014 में लापता हुई पानीपत के गांव चुलकाना निवासी 23 वर्षीय महिला कांस्टेबल रीटा गायब हो गई थी। इसके बाद उसकी हत्या की बात सामने आई थी और मामले में पुलिस की जांच को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए महिला कांस्टेबल के पिता ने सीबीआई जांच की अपील की थी। याची ने कहा कि जिस प्रकार इस मामले की जांच पुलिस ने की और जिस प्रकार इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है उससे उनका विश्वास हरियाणा पुलिस से उठ गया है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पुलिस को 2 माह में जांच पूरी करने के आदेश दिए थे।
इसके बाद से ही पुलिस एक्टिव होकर जांच कर रही थी। इसके बाद हरियाणा पुलिस ने यूटी पुलिस के ही एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया और दावा किया कि उसने हत्या की बात कबूल की है। इसके बाद से ही हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी आरंभ की थी और जब हाईकोर्ट को पुलिस ने बताया कि वे हत्या का नहीं बल्कि हत्या के प्रयास का मामला बना चालान पेश कर रहें हैं तो हाईकोर्ट ने इसपर हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए एडीजीपी क्राईम को तलब किया था। 8 सितंबर को एडीजीपी क्राईम को तलब किया था। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए बेस्ट ऑफिसर चुन कर एसआईटी बनाने की बात कोर्ट में कही थी।
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अब मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो अभी तक रिपोर्ट न आने पर हरियाणा सरकार को फटकार लगाई। साथ ही अगली सुनवाई के दौरान एडीजीपी क्राईम को कोर्ट में हाजिर रहने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक इस मामले की जांच को पूरा कर चालान नहीं पेश किया जाता है तब तक एसआईटी से जुड़े किसी भी सदस्य को इससे अगल नहीं किया जाएगा।
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यूटी पुलिस में वर्ष 2011 में भर्ती हुई और 2014 में लापता हुई पानीपत के गांव चुलकाना निवासी 23 वर्षीय महिला कांस्टेबल रीटा गायब हो गई थी। इसके बाद उसकी हत्या की बात सामने आई थी और मामले में पुलिस की जांच को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए महिला कांस्टेबल के पिता ने सीबीआई जांच की अपील की थी। याची ने कहा कि जिस प्रकार इस मामले की जांच पुलिस ने की और जिस प्रकार इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है उससे उनका विश्वास हरियाणा पुलिस से उठ गया है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पुलिस को 2 माह में जांच पूरी करने के आदेश दिए थे।
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इसके बाद से ही पुलिस एक्टिव होकर जांच कर रही थी। इसके बाद हरियाणा पुलिस ने यूटी पुलिस के ही एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया और दावा किया कि उसने हत्या की बात कबूल की है। इसके बाद से ही हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी आरंभ की थी और जब हाईकोर्ट को पुलिस ने बताया कि वे हत्या का नहीं बल्कि हत्या के प्रयास का मामला बना चालान पेश कर रहें हैं तो हाईकोर्ट ने इसपर हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए एडीजीपी क्राईम को तलब किया था। 8 सितंबर को एडीजीपी क्राईम को तलब किया था। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए बेस्ट ऑफिसर चुन कर एसआईटी बनाने की बात कोर्ट में कही थी।
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अब मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो अभी तक रिपोर्ट न आने पर हरियाणा सरकार को फटकार लगाई। साथ ही अगली सुनवाई के दौरान एडीजीपी क्राईम को कोर्ट में हाजिर रहने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक इस मामले की जांच को पूरा कर चालान नहीं पेश किया जाता है तब तक एसआईटी से जुड़े किसी भी सदस्य को इससे अगल नहीं किया जाएगा।
यह था मामला
चंडीगढ़ पुलिस
- फोटो : file photo
यह था मामला
महिला कांस्टेबल दो दिन की छुट्टी लेकर करनाल गई थी और उसके बाद से ही लापता थी। इसके बाद उसके पिता ने पुलिस को इसकी शिकायत दी परंतु पुलिस ने केस को अनट्रेस घोषित कर दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने 2 माह में जांच पूरी करने को कहा।
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद एसआईटी गठित हुई और इस दौरान महिला कांस्टेबल की कॉल डिटेल और लोकेशन तलाशी गई। इसके बाद से ही सारी परते खुलनी शुरू हुई और एसआईटी ने इस मामले में आरोपी एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस का दावा था कि कांस्टेबल ने हत्या का जुर्म कबूल किया है। बावजूद इसके शव न मिलने के चलते पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जिसके बाई हाईकेार्ट ने एडीजीपी क्राईम को तलब किया था। एडीजीपी क्राईम ने बेस्ट ऑफिसर लेकर एसआईटी बनाई थी जिसे हाईकोर्ट में अपनी जांच का परिणाम सौंपना था।
महिला कांस्टेबल दो दिन की छुट्टी लेकर करनाल गई थी और उसके बाद से ही लापता थी। इसके बाद उसके पिता ने पुलिस को इसकी शिकायत दी परंतु पुलिस ने केस को अनट्रेस घोषित कर दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने 2 माह में जांच पूरी करने को कहा।
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद एसआईटी गठित हुई और इस दौरान महिला कांस्टेबल की कॉल डिटेल और लोकेशन तलाशी गई। इसके बाद से ही सारी परते खुलनी शुरू हुई और एसआईटी ने इस मामले में आरोपी एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस का दावा था कि कांस्टेबल ने हत्या का जुर्म कबूल किया है। बावजूद इसके शव न मिलने के चलते पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जिसके बाई हाईकेार्ट ने एडीजीपी क्राईम को तलब किया था। एडीजीपी क्राईम ने बेस्ट ऑफिसर लेकर एसआईटी बनाई थी जिसे हाईकोर्ट में अपनी जांच का परिणाम सौंपना था।