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Chandigarh News: विभाग के दोहरे नियमों से अटकी 2012 से पहले लगे 15 हजार जेबीटी शिक्षकों की एसीपी
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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा ने जताई आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिक्षा विभाग के दोहरे नियमों से वर्ष 2012 से पहले जेबीटी शिक्षकों की एसीपी (एस्योरड कॅरिअर प्रोगेशन स्कीम) अटक गई है। एक ही प्रदेश के एक ही विभाग में तैनात शिक्षकों को ये सेवा लाभ देने के अलग-अलग नियमों का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, साल दर साल शिक्षा निदेशालय अलग-अलग नियमों के आदेश जारी कर रहा है, जिसके फेर में शिक्षकों की एसीपी अटक गई है। इसको लेकर राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष तरुण सुहाग व प्रदेश संयोजक सुनील बास ने कड़ी नाराजगी जताई है। संघ ने इस मामले में मांग की कि इन खामियों को दूर कर एसीपी जारी की जाए।
शिक्षा विभाग ने 2012 के सर्विस रूल्स बदलाव करते हुए पद की सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने के साथ ही पद अनुसार प्रमोशन की शैक्षणिक योग्यता तय कर दी। विभाग ने जेबीटी की सीधी भर्ती के लिए डिप्लोमा इन एजुकेशन के साथ-साथ 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत की शर्त तय की। दूसरी ओर जेबीटी से अगला पद मुख्य शिक्षक का बनता है, उसके लिए भी विभाग ने डिप्लोमा इन एजुकेशन, एचटेट के साथ-साथ बारहवीं कक्षा में 50 प्रतिशत की शर्त जोड़ दी। जबकि यह पद पूर्णतया जेबीटी शिक्षकों की जिलावार वरिष्ठता आधार पर प्रमोशन से ही भरा जाता है। 2012 के सर्विस रूल्स से पहले के 1998 के रूल्स में डिप्लोमा इन एजुकेशन के साथ-साथ 12वीं कक्षा में 45 प्रतिशत की शर्त ही होती थी, जिसके आधार पर हजारों जेबीटी मुख्य शिक्षक पद पर कार्य कर रहें हैं या अपनी निर्धारित समयावधि में एसीपी ले रखी है।
दूसरी ओर विभाग ने अपने 2012 के ही सर्विस रूल्स में पीजीटी की सीधी भर्ती के लिए एचटेट, बीएड व एमए की शर्त लगाई, लेकिन पीजीटी की एसीपी या अगले पद प्रिंसिपल पर प्रमोशन के लिए वर्ष 2012 से पहले लगे हुए लेक्चरर-पीजीटी को बीएड से छूट दे दी, क्योंकि 2012 से पहले लेक्चरर-पीजीटी लगने के लिए बीएड जरूरी नहीं थी। 2012 से पहले के 1998 के सर्विस रूल्स में ना केवल जेबीटी की सर्विस लगने में बल्कि ये कोर्स करने के लिए भी एससी-बीसी और दिव्यांगों के लिए 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत की शर्त ही लागू थी। अब 14 मार्च 2024 को विभाग ने पत्र जारी कर केवल 2012 के रूल्स पर ही एसीपी लगाए जाने के निर्देश जारी करने से एसीपी अटक गई है। गौर हो कि शिक्षकों को सेवा काल के दौरान 8, 18 और 24 साल पूरे करने पर एसीपी दी जाती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिक्षा विभाग के दोहरे नियमों से वर्ष 2012 से पहले जेबीटी शिक्षकों की एसीपी (एस्योरड कॅरिअर प्रोगेशन स्कीम) अटक गई है। एक ही प्रदेश के एक ही विभाग में तैनात शिक्षकों को ये सेवा लाभ देने के अलग-अलग नियमों का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, साल दर साल शिक्षा निदेशालय अलग-अलग नियमों के आदेश जारी कर रहा है, जिसके फेर में शिक्षकों की एसीपी अटक गई है। इसको लेकर राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष तरुण सुहाग व प्रदेश संयोजक सुनील बास ने कड़ी नाराजगी जताई है। संघ ने इस मामले में मांग की कि इन खामियों को दूर कर एसीपी जारी की जाए।
शिक्षा विभाग ने 2012 के सर्विस रूल्स बदलाव करते हुए पद की सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने के साथ ही पद अनुसार प्रमोशन की शैक्षणिक योग्यता तय कर दी। विभाग ने जेबीटी की सीधी भर्ती के लिए डिप्लोमा इन एजुकेशन के साथ-साथ 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत की शर्त तय की। दूसरी ओर जेबीटी से अगला पद मुख्य शिक्षक का बनता है, उसके लिए भी विभाग ने डिप्लोमा इन एजुकेशन, एचटेट के साथ-साथ बारहवीं कक्षा में 50 प्रतिशत की शर्त जोड़ दी। जबकि यह पद पूर्णतया जेबीटी शिक्षकों की जिलावार वरिष्ठता आधार पर प्रमोशन से ही भरा जाता है। 2012 के सर्विस रूल्स से पहले के 1998 के रूल्स में डिप्लोमा इन एजुकेशन के साथ-साथ 12वीं कक्षा में 45 प्रतिशत की शर्त ही होती थी, जिसके आधार पर हजारों जेबीटी मुख्य शिक्षक पद पर कार्य कर रहें हैं या अपनी निर्धारित समयावधि में एसीपी ले रखी है।
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दूसरी ओर विभाग ने अपने 2012 के ही सर्विस रूल्स में पीजीटी की सीधी भर्ती के लिए एचटेट, बीएड व एमए की शर्त लगाई, लेकिन पीजीटी की एसीपी या अगले पद प्रिंसिपल पर प्रमोशन के लिए वर्ष 2012 से पहले लगे हुए लेक्चरर-पीजीटी को बीएड से छूट दे दी, क्योंकि 2012 से पहले लेक्चरर-पीजीटी लगने के लिए बीएड जरूरी नहीं थी। 2012 से पहले के 1998 के सर्विस रूल्स में ना केवल जेबीटी की सर्विस लगने में बल्कि ये कोर्स करने के लिए भी एससी-बीसी और दिव्यांगों के लिए 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत की शर्त ही लागू थी। अब 14 मार्च 2024 को विभाग ने पत्र जारी कर केवल 2012 के रूल्स पर ही एसीपी लगाए जाने के निर्देश जारी करने से एसीपी अटक गई है। गौर हो कि शिक्षकों को सेवा काल के दौरान 8, 18 और 24 साल पूरे करने पर एसीपी दी जाती है।
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