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राज्यपाल से मिला शिअद का प्रतिनिधिमंडल: नई आबकारी नीति की CBI जांच की मांग, सुखबीर बोले- यह घोटाला है

Wed, 31 Aug 2022 01:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 31 Aug 2022 01:51 PM IST
सार

शिअद का आबकारी विभाग में 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। आप ने पंजाब आबकारी नीति तैयार करते समय दिल्ली मॉडल का पालन किया। दिल्ली राज्य की तरह लगभग पूरा शराब का कारोबार दो कंपनियों को सौंप दिया गया।

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A delegation of SAD submitted a memorandum to Punjab Governor
शिअद प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात। - फोटो : एएनआई

विस्तार

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मिला और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पंजाब आबकारी नीति की सीबीआई जांच की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने नीति में घोटाले का आरोप लगाया। सुखबीर बादल ने कहा कि यह एकाधिकार है। सरकार ने पंजाब में सिर्फ एक व्यक्ति को शराब बेचने की आज्ञा दी है। लाभ मार्जिन 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। पहले 100 विक्रेता थे, अब केवल एक है। साफ है यह घोटाला।

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शिअद का आरोप दिल्ली की तर्ज पर बनी आबकारी नीति
शिअद का आबकारी विभाग में 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। आप ने पंजाब आबकारी नीति तैयार करते समय दिल्ली मॉडल का पालन किया। दिल्ली राज्य की तरह लगभग पूरा शराब का कारोबार दो कंपनियों को सौंप दिया गया। दोनों कंपनियों का मुनाफा मार्जिन दोगुना कर दिया गया ताकि परस्पर लाभ उठाया जा सके। पार्टी प्रधान ने कहा कि नई आबकारी नीति बनाते समय यह निर्धारित किया गया कि प्रत्येक शराब निर्माण कंपनी राज्य में अपने उत्पादों को बेचने के लिए एक लाइसेंसधारी का चयन करेगी। 
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एल-1 लाइसेंसधारक भारत या विदेश में निर्माता नहीं होना चाहिए। यह भी कहा गया कि एल-1 लाइसेंसधारियों का सालाना कम से कम 30 करोड़ रुपये का कारोबार होना चाहिए और पंजाब की रिटेल मार्केट में कोई हिस्सेदारी नहीं होनी चाहिए, जिसने पंजाब के शराब व्यापारियों को इस दौड़ से बाहर कर दिया। 
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लाइसेंसधारी का लाभ मार्जिन भी पहले के 5 से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इस नीति के परिणामस्वरूप शराब का लगभग पूरा कारोबार दो कंपनियों ब्रिंडको और मेहरा ग्रुप के स्वामित्व वाली अनंत वाइंस को सौंप दिया गया। सीबीआई और ईडी की जांच से मामले की सच्चाई सामने आ सकती है और आरोपी नेताओं और अधिकारियों की गतिविधियों की तथा साथ ही निर्धारित जगहों के सीसीटीवी कैमरों की जांच की जानी चाहिए।
 
 

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