फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   99 percent students are in grip of stress due to desire to look good and branded goods

शोध में खुलासा: अच्छा दिखने और ब्रांडेड वस्तुओं की चाह में 99 फीसदी विद्यार्थी तनाव की चपेट में

Mon, 23 May 2022 12:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 23 May 2022 12:09 AM IST
सार

शोध में पाया कि निम्न वर्ग की लड़कियों में शारीरिक दिखावट, अच्छा मेकअप और सुंदर कपड़े इत्यादि का तनाव अधिक है। लड़कियां मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों से खुद की तुलना करती हैं, उन्हें ये लगता है कि बाहरी आवरण से अच्छी नौकरी और समाज में अच्छी छवि बनाने के लिए जरूरी है।

विज्ञापन
99 percent students are in grip of stress due to desire to look good and branded goods
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के सेंटर फॉर मैनेजमेंट एंड ह्यूमैनिटीज की अस्सिटेंट प्रोफेसर अनुप्रीत कौर अरोड़ा ने चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के 300 विद्यार्थियों के स्वभाव पर शोध किया है। शोध में पाया कि 16 से 18 उम्र वर्ग के निम्न और मध्यम वर्ग के विद्यार्थी अच्छा दिखने और ब्रांडेड वस्तुएं खरीदने व उसका अपने आसपास के सामाजिक वातावरण में दिखावा करने के कारण तनाव में हैं। लगभग 99 प्रतिशत विद्यार्थी इस सामाजिक तनाव को झेल रहे हैं। 

विज्ञापन


डॉ. अनुप्रीत ने बताया कि उन्होंने शोध के लिए 150 लड़कियां और 150 लड़के चुने। इसमें उन्होंने 75-75 के भाग में निम्न और मध्यम वर्ग के अनुसार चुना। निम्न वर्ग में सालाना आय एक लाख से दो लाख के परिवार और मध्यम वर्ग में सालाना आय दो से दस लाख के परिवार का चयन किया गया। बच्चों से स्कूलों में जाकर बातचीत के आधार पर डाटा एकत्रित किया गया। 
विज्ञापन


शोध में पाया कि बच्चों में भौतिकवाद और उपभोक्तावाद बढ़ गया है। इसका कारण शहर में ब्राडेंड स्टोर और आसपास के सामाजिक वातावरण में इसका दिखावा है। बच्चों को इस तनाव में धकेलने का सबसे कारण दोस्तों का दबाव (पीर प्रेशर) है। अभिभावकों के साथ बच्चों की बातचीत कम होना इसे और बढ़ाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लड़के लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर चिंतित
शोध में पाया कि निम्न वर्ग की लड़कियों में शारीरिक दिखावट, अच्छा मेकअप और सुंदर कपड़े इत्यादि का तनाव अधिक है। लड़कियां मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों से खुद की तुलना करती हैं, उन्हें ये लगता है कि बाहरी आवरण से अच्छी नौकरी और समाज में अच्छी छवि बनाने के लिए जरूरी है। वहीं लड़कों में लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर तनाव अधिक है। इसमें ब्रांडेड फोन और टेक्नोलॉजी से जुड़ी वस्तुएं इत्यादि शामिल हैं। लड़के और लड़कियां इन चीजों को आत्मसम्मान (सेल्फ एस्टीम) से जोड़कर देखते हैं। 


अभिभावकों को बच्चों के साथ चर्चा करने की जरूरत 
डॉ. अनुप्रीत ने बताया कि इस उम्र वर्ग के बच्चों की अभिभावकों के साथ बातचीत बहुत कम है। हर फैसला दोस्तों के दबाव में लिया जाता है। अभिभावकों को जरूरत है कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं। उनके साथ सामाजिक और मानसिक तनाव के मुद्दों पर चर्चा करें। बच्चों की दिनचर्या और उनके बारे में जानें जिससे बच्चों पर बाहरी दबाव को कम किया जा सके। स्कूलों में भी इन मुद्दों पर बच्चों की काउंसलिंग की जरूरत है। डॉ. अनुप्रीत ने पंजाब यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा विनायक के निर्देशन में शोध किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed