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Chandigarh Transport: चंडीगढ़ के 88 फीसदी लोग निजी वाहन छोड़ने को तैयार, मांग-मजबूत सार्वजनिक परिवहन मिले

Sat, 16 Jul 2022 11:35 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 16 Jul 2022 11:35 AM IST
सार

कई सर्वे में चंडीगढ़ की जन सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाने की बात कही गई है, लेकिन प्रशासन की तरफ से पिछले कई वर्षों से कोई खास कदम नहीं उठाया गया। शहर के आसपास के इलाकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

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88 percent people of Chandigarh ready to give up their private vehicles if better public transport system provided
Chandigarh Traffic

विस्तार

चंडीगढ़ में रहने वाले 88 फीसदी लोग अपने निजी वाहन छोड़ने के लिए तैयार हैं, बशर्तें बेहतर जन सार्वजनिक परिवहन प्रणाली हो। यह खुलासा रेल इंडिया तकनीकी और आर्थिक सेवा (राइट्स) की तरफ से शहर में कराए गए सर्वे में हुआ है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि 80 फीसदी से ज्यादा लोग अच्छे सार्वजनिक परिवहन के लिए अतिरिक्त पैसा भी देने को तैयार हैं।

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राइट्स के सर्वे के अनुसार चंडीगढ़ की वर्तमान जनसंख्या 12.95 लाख है, जो 2051 में 22.10 लाख होगी। जितनी जनसंख्या के लिए शहर बसाया गया था, उसके चार गुना ज्यादा आबादी हो जाएगी। अगर ट्राइसिटी की बात करें तो 2051 तक ये 45 लाख होगी। शहर में पार्किंग की समस्या विकराल होती जा रही है। औसतन हर तीन मिनट में शहर की सड़क पर एक वाहन उतर रहा है। 
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कई सर्वे में शहर की जन सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बेहतर बनाने की बात कही गई है, लेकिन प्रशासन की तरफ से पिछले कई वर्षों से कोई खास कदम नहीं उठाया गया। शहर के आसपास के इलाकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। पिछले कई वर्षों से मेट्रो व मोनो के नाम की चर्चा है, लेकिन उस पर भी कोई काम नहीं हुआ है। प्रशासन ने अधिकारियों व नेताओं को भले इनकी जरूरत महसूस नहीं हो रही हो, लेकिन शहर की जनता इन्हें चाहती है। यूटी प्रशासन ने शहर में इलेक्ट्रिक बसें तो चला दीं लेकिन बस स्टॉप खड़े होने लायक नहीं है। बसें समय पर नहीं चलतीं। कई रूट पर बसों के लिए लोगों को 20 मिनट से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।

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ट्रांसपोर्टेशन पर हर शहरवासी औसत खर्च कर रहा 3900 रुपये

राइट्स ने हाउस होल्ड सर्वे भी किया है। सर्वे में कहा है कि हर शहरवासी महीने में 3900 रुपये ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च कर रहा है। शहर में टू-व्हीलर पर 33.9 फीसदी लोग सफर करते हैं। सर्वे के अनुसार सड़क पर ट्रैवल करने वाले लोगों में लगभग 60 फीसदी आबादी गैर-श्रमिक हैं जिनमें छात्र, गृहिणियां, सेवानिवृत्त और बेरोजगार शामिल हैं। इसमें 30 फीसदी लोग ग्रेजुएट हैं। इसमें वाहन यात्रा 80 फीसदी और पैदल यात्रा 20 फीसदी है। टू-व्हीलर पर सबसे ज्यादा लोग सफर करते हैं। इसके बाद सार्वजनिक परिवहन बस में 16 फीसदी, ऑटो में 10 फीसदी लोग सफर करते हैं। 

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