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किसी को भनक नहीं : कोरोना काल में चंडीगढ़ में कट गए 703 पेड़
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चंडीगढ़। ट्रिब्यून फ्लाईओवर बनाने के लिए यूटी प्रशासन 472 पेड़ काटने जा रहा था, जिसके खिलाफ शहर भर में भारी अभियान चला और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। उधर, कोरोना काल में रेलवे स्टेशन के पास 554 हरेभरे पेड़ काट दिए गए और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। ये हैरान करने वाली जानकारी यूटी प्रशासन ने एक आरटीआई के जवाब में दी है।
आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग ने प्रशासन से सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछा था कि 20 अगस्त 2020 से आठ फरवरी 2021 के बीच प्रशासन के विभिन्न विभागों ने कितने पेड़ों को काटने की अनुमति दी है। जवाब में यूटी प्रशासन के वन विभाग ने बताया कि छह महीने में कुल 703 हरे व कुछ सूख चुके पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा हरे पेड़ों की बलि चंडीगढ़ में बन रहे मार्डन रेलवे स्टेशन की वजह से चढ़ी है। यहां 554 पेड़ों को विकास के नाम पर काट दिया गया।
पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी में भी विकास के लिए कई पेड़ों की बलि दी गई। पेड़ों को काटने की मंजूरी देने के साथ विभाग ने काटे गए पेड़ों से पांच गुना ज्यादा पेड़ लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जमीन भी चिह्नित की गई है। एक साल के भीतर ये पेड़ लगाए जाने हैं। वन विभाग ने कहा है कि वह पेड़ काटे जाने के छह महीने के अंदर उस इलाके की जांच भी करेंगे, जहां ये पेड़ लगाए जाने हैं।
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इन पेड़ों को काटने की वन विभाग ने दी मंजूरी
20 अगस्त 2020 - पंजाब यूनिवर्सिटी के सेक्टर-14 और 25 में सात हरे और सात सूखे पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई
25 सितंबर 2020- पंचकूला की तरफ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 448 हरे पेड़ों को पार्किंग व अन्य कार्यों के लिए काटने की अनुमति दी गई
29 अक्टूबर 2020- पीयू के सेक्टर-14 और 25 में चार हरे पेड़ काटने की मंजूरी दी गई
11 नवंबर 2020 - पंचकूला की तरफ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 106 पेड़ों को काटने की इजाजत दी गई
11 नवंबर 2020 - पीजीआई में 24 हरे पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई। इनमें 13 पेड़ हटा दिए गए, जबकि 11 को ट्रांसप्लांट करने की इजाजत दी गई थी
6 जनवरी 2020 - पीयू के यूनिवर्सिटी फार्मास्यूटिकल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज में लगे 90 औषधीय पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई, जिसमें से 67 पेड़ों को हटाने की अनुमति दे दी गई
8 फरवरी 2021 - पीयू के अंकुर स्कूल में 11 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई
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आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग ने प्रशासन से सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछा था कि 20 अगस्त 2020 से आठ फरवरी 2021 के बीच प्रशासन के विभिन्न विभागों ने कितने पेड़ों को काटने की अनुमति दी है। जवाब में यूटी प्रशासन के वन विभाग ने बताया कि छह महीने में कुल 703 हरे व कुछ सूख चुके पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा हरे पेड़ों की बलि चंडीगढ़ में बन रहे मार्डन रेलवे स्टेशन की वजह से चढ़ी है। यहां 554 पेड़ों को विकास के नाम पर काट दिया गया।
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पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी में भी विकास के लिए कई पेड़ों की बलि दी गई। पेड़ों को काटने की मंजूरी देने के साथ विभाग ने काटे गए पेड़ों से पांच गुना ज्यादा पेड़ लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जमीन भी चिह्नित की गई है। एक साल के भीतर ये पेड़ लगाए जाने हैं। वन विभाग ने कहा है कि वह पेड़ काटे जाने के छह महीने के अंदर उस इलाके की जांच भी करेंगे, जहां ये पेड़ लगाए जाने हैं।
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इन पेड़ों को काटने की वन विभाग ने दी मंजूरी
20 अगस्त 2020 - पंजाब यूनिवर्सिटी के सेक्टर-14 और 25 में सात हरे और सात सूखे पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई
25 सितंबर 2020- पंचकूला की तरफ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 448 हरे पेड़ों को पार्किंग व अन्य कार्यों के लिए काटने की अनुमति दी गई
29 अक्टूबर 2020- पीयू के सेक्टर-14 और 25 में चार हरे पेड़ काटने की मंजूरी दी गई
11 नवंबर 2020 - पंचकूला की तरफ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 106 पेड़ों को काटने की इजाजत दी गई
11 नवंबर 2020 - पीजीआई में 24 हरे पेड़ों को काटने की मंजूरी दी गई। इनमें 13 पेड़ हटा दिए गए, जबकि 11 को ट्रांसप्लांट करने की इजाजत दी गई थी
6 जनवरी 2020 - पीयू के यूनिवर्सिटी फार्मास्यूटिकल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज में लगे 90 औषधीय पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई, जिसमें से 67 पेड़ों को हटाने की अनुमति दे दी गई
8 फरवरी 2021 - पीयू के अंकुर स्कूल में 11 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई