आज से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन, बेचने या खरीदने पर एक लाख तक का जुर्माना, 5 साल तक की जेल
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चंडीगढ़ में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दी गई है। अब प्लास्टिक, थर्माकोल, स्टायरोफोम वस्तुओं का दुकानदार, विक्रेता, होल सैलर विक्रेता, व्यापारी, फेरीवाला या रेहड़ीवाला, कोई भी व्यक्ति निर्माण, भंडारण, आयात, बिक्री, आपूर्ति या उपयोग नहीं कर सकता। ऐसा करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं।
जारी किए गए नोटिफिकेशन के तहत शहर में अब किसी भी तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम- 1986 की धारा 15 के तहत, जो कोई भी इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, उसे अधिकतम पांच साल की सजा या 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
खास मामलों में दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि 24 जुलाई 2019 को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन प्रशासन की तरफ से इसको लेकर की गई थी जिस पर लोगों के सुझाव और ऑब्जेक्शन मांगे गए थे। करीब 30 से ज्यादा सुझाव इस पर आए हैं, जिनको कंपाइल करने के बाद शुक्रवार को सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन की नोटिफिकेशन जारी कर दी गई।
यह सभी सामान आज से बैन, इस्तेमाल किया तो लगेगा भारी जुर्माना -
पानी की एक लीटर से छोटी बोतल का यूज नहीं कर सकेंगे। क्योंकि छोटी बोतल को सिर्फ एक बार ही यूज किया जाता है, जिसके बाद ये डस्टबिन में जाती है। एक लीटर की बोतल को री-यूज कर लिया जाता है।
- खाली पानी के प्लास्टिक और थर्मोकोल के गिलास, प्लास्टिक या थर्मोकोल की प्लेट्स और गिलास, प्लास्टिक चम्मच, पॉलीथिन, प्लास्टिक बैग्स, नान वुवन प्लास्टिक कैरी बैग्स पर पाबंदी है।
- पानी के सील्ड गिलास जो पार्टी या किसी भी तरह के ईवेंट में रखे जाते हैं, ये सिंगल यूज के होते हैं। इन पर बैन रहेगा। पार्टियों में अभी ये बहुत ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल होते हैं।
- एक बार इस्तेमाल होने वाली रेजर्स, पेन, ऑफिस और एजुकेशन में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक स्टेशनरी प्रोडक्ट्स।
- सजावट के उद्देश्य के लिए प्लास्टिक सामग्री जैसे कि चादरें, पैकिंग शीट, पार्टी ब्लूपर्स, प्लास्टिक रिबन पर पूरी तरह से प्रतिबंध।
- सजावट के उद्देश्य के लिए थर्मोकोल का उपयोग के साथ पॉलिथीन और प्लास्टिक कैरी बैग पर भी प्रतिबंध।
- खाद्य और तरल वस्तुओं की पैकेजिंग व कवरिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले 250 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक कंटेनर जैसे - डिश, बाउल, ट्रे, ग्लास आदि पर बैन।
3 महीने बाद इनपर भी लग जाएगा बैन
- औद्योगिक पैकेजिंग (किसी भी प्रकार की) 50 माइक्रोन से कम।
- डेयरी वस्तुओं की पैकेजिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले 250 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक कंटेनर जैसे- दही, खीर, आइसक्रीम आदि।
- 50 मिली व 50 ग्राम की पैकेजिंग क्षमता वाले प्लास्टिक के पाउच।
- इयर बड्स, गुब्बारे, झंडे और कैंडी के लिए प्लास्टिक की छड़ें।
- प्लास्टिक रिफिल पाउच जिसमें मात्रा 500 मिली से कम हो।
- टेट्रा पैक के साथ जुड़ी स्ट्रॉ।
- फूड व स्नैक्स पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मल्टीलेयर पैकेजिंग।
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आगे क्या...
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अब अगर कोई दुकानदार, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनियां बैन चीजों को यूज करती हैं तो उनके खिलाफ नोटिफिकेशन के प्रोविजन के हिसाब से कार्रवाई होगी, जिसमें सजा के साथ हेवी पैनाल्टी का प्रावधान रखा गया है।
5 साल की जेल या एक लाख का जुर्माना
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम- 1986 की धारा 15 के तहत, जो कोई भी इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, उसे अधिकतम पांच साल की सजा या 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। खास मामलों में दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं।
फैक्ट्री आदि पर लग सकता है प्रतिबंध
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत कोई भी व्यक्ति जो इन आदेशों का पालन नहीं करेगा उसकी फैक्ट्री आदि पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके अलावा पानी की सप्लाई व बिजली का कनेक्शन या फिर कोई अन्य सर्विस रोकी जा सकती है।
एनजीटी ने पहले ही लगाया था बैन, 5 हजार का जुर्माना
पॉलीथीन और प्लास्टिक के कई तरह के सामान पर पहले ही राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने रोक लगा दी थी। इनके इस्तेमाल पर 5 हजार रुपए की पेनाल्टी का प्रावधान है।
क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक?
सिंगल यूज प्लास्टिक यानी एक ही बार इस्तेमाल के लायक प्लास्टिक। प्लास्टिक की थैलियां, प्याले, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ और कुछ पाउच सिंगल यूज प्लास्टिक हैं। ये दोबारा इस्तेमाल के लायक नहीं होती हैं। इसलिए एक बार इस्तेमाल के बाद इनको फेंक दिया जाता है। दरअसल आधी से ज्यादा इस तरह की प्लास्टिक पेट्रोलियम आधारित उत्पाद होते हैं। इनके उत्पादन पर खर्च बहुत कम आता है।
यही वजह है कि रोजाना के बिजनेस और कारोबारी इकाइयों में इसका इस्तेमाल खूब होता है। उत्पादन पर इसके भले ही कम खर्च हो लेकिन फेंके गए प्लास्टिक के कचरे, उसकी सफाई और उपचार पर काफी खर्च होता है।
अब प्लास्टिक छोड़ें, ये विकल्प अपनाएं
- प्लास्टिक स्ट्रॉ की जगह पेपर के बने स्ट्रॉ का इस्तेमाल किया जा सकता है या पूरी तरह से स्ट्रॉ से परहेज किया जा सकता है।
- प्लास्टिक की पानी के बोतलों की जगह शीशा, धातु, कॉपर और सेरामिक की बनी बोतलों का इस्तेमाल करें। ये मार्केट में आसानी से उपलब्ध हैं।
- प्लास्टिक के कप की जगह दोबारा इस्तेमाल होने वाले कप लेकर अपने साथ जाएं। आप पेपर की प्याली भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
- प्लास्टिक की थैली की जगह जूट की बनी थैली या कागज की बनी थैली का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- प्लास्टिक की चाकू, चम्मच आदि के स्थान पर आप स्टेनलेस स्टेल की चाकू इस्तेमाल कर सकते हैं। लकड़ी के चम्मच भी मार्केट में उपलब्ध हैं, उनको इस्तेमाल कर सकते हैं।