चंडीगढ़ में होगा कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण, 400 लोगों ने कराया पंजीकरण
- उम्मीद से ज्यादा आवेदन आने से पीजीआई की टीम खुश, एक से डेढ़ हफ्ते के अंदर शुरू होगा ट्रायल
- ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविशिल्ड के ट्रायल के लिए देशभर में पीजीआई समेत 17 संस्थान चुने गए हैं
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कोरोना महामारी के बीच एक ऐसी खबर आई, जो इस वायरस को हराने के लिए शहरवासियों के बुलंद हौसले को बयां कर रही है। ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए पीजीआई में 400 लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है। शहरवासियों के इस रिस्पांस को देखकर पीजीआई में वैक्सीन के ट्रायल की जिम्मेदारी उठाने वाली विशेषज्ञों की टीम भी काफी उत्साहित है। उनका कहना है कि चंडीगढ़ के लोगों की यह सकारात्मक सोच ट्रायल को सफल बनाने में काफी मददगार होगी।
बता दें कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविशिल्ड के ट्रायल के लिए देशभर में पीजीआई चंडीगढ़ समेत 17 संस्थानों को चुना गया है। पीजीआई में इस प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर व कम्युनिटी मेडिसिन की डॉ. मधु ने बताया कि इस वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए अब तक लगभग 400 लोगों ने पीजीआई की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण करा लिया है और पंजीकरण का क्रम अब भी जारी है।
इन सभी लोगों को अगले हफ्ते से बुलाकर उनका मेडिकल समेत अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उनमें से मानकों पर खरे उतरे वालंटियर्स को ट्रायल के लिए अलग किया जाएगा। डॉ. मधु ने बताया कि पीजीआई में 250 लोगों पर वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल किया जाना है। ऑक्सफोर्ड में वैक्सीन का सिक्योरिटी ट्रायल पूरा किया जा चुका है लेकिन पीजीआई ट्रायल के दौरान सबसे पहले सिक्योरिटी फेस पूरा करने के बाद ही उसका ह्यूमन ट्रायल शुरू करेगा। उन्होंने बताया कि पंजीकृत वॉलिंटियर्स को पीजीआई मेडिकल चेकअप के बाद ट्रायल में शामिल करेगा। इसके लिए वालंटियर्स को एक साथ बुलाने की बजाय सभी को अलग-अलग समय पर बुलाया जाएगा ताकि सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखा जा सके।
स्वस्थ और बालिग वालंटियर की करा सकते हैं पंजीकरण
ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने वाले व्यक्ति की उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए। उसका स्वस्थ होना और कोरोना संक्रमित न होना बेहद जरूरी है। ट्रायल से पहले उसके सारे मेडिकल चेकअप किए जाएंगे। रिपोर्ट मानक के अनुरूप आने के बाद ही उसे ट्रायल में शामिल किया जाएगा। उसके बाद उन्हें वैक्सीन लगाया जाएगा और जिसका लगातार फॉलोअप किया जाएगा।
साथ ही उन लोगों को अलग से डायरी दी जाएगी, जिसमें उन्हें महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करना होगा। इसे बाद में पीजीआई अपने ट्रायल की रिपोर्ट में शामिल करेगा। ट्रायल के दौरान यह चेक किया जाएगा कि वैक्सीन देने के बाद उन लोगों में एंटीबॉडी बन रही हैं या नहीं। डॉ. मधु ने बताया कि इसमें पॉजिटिव मरीजों को इसलिए शामिल नहीं किया जा रहा है क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद ठीक हो चुके मरीजों में खुद ही एंटीबॉडीज बन चुकी होंगी।
स्क्रीनिंग के बाद होगा 250 वालंटियर्स का चयन
ट्रायल से पहले पंजीकृत वालंटियर्स में से 300 लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। उनमें से 250 लोगों को चुना जाएगा। डॉ. मधु ने बताया कि एक से डेढ़ हफ्ते के अंदर इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा। इसमें कम्युनिटी मेडिसिन के साथी वायरोलॉजी, फार्मोकोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किए जा रहे हैं शोध में इस ट्रायल के परिणाम के बाद ही कोरोना के इलाज की सफलता को आंका का जा सकेगा।
तीन माध्यमों से करा सकते हैं पंजीकरण
ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने के लिए आप तीन माध्यमों से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पहला आप पीजीआई की वेबसाइट उपलब्ध ऑनलाइन आवेदन फार्म भर सकते हैं। दूसरा आप ईमेल आईडी Civil.shield2020@gmail.com पर मेल कर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा +917696148362 नंबर पर मैसेज कर सकते हैं।