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'आप' के बाद अब मुसीबत में भाजपा, हरियाणा के चार विधायकों पर गिर सकती है गाज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 22 Jan 2018 07:04 PM IST
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हरियाणा के सीएम मनोहर लाल और वकील जगमोहन सिंह भट्टी
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भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त किए गए 4 सीपीएस की विधानसभा सदस्यता को दिल्ली के विधायकों की तर्ज पर समाप्त किए जाने के लिए पंजाब-हरियाण हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। दिल्ली के संसदीय सचिवों की नियुक्ति को खारिज करने के बाद चुनाव आयोग ने उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। हरियाणा के 4 सीपीएस की नियुक्ति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा गैर संविधानिक करार दिए जाने के बाद अब दिल्ली के विधायकों की तर्ज पर इन चारों की भी विधानसभा सदस्यता समाप्त किए जाने की अपील की गई है।
हरियाणा की भाजपा सरकार में करीब दो साल पहले नियुक्त हुए चार मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को गैर संवैधानिक करार देते हुए 5 जुलाई को हाईकोर्ट ने उनको सीपीएस पद से हटाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने चारों मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को कानून और प्रावधानों के विपरीत करार दिया था। हाईकोर्ट ने यह फैसला हाईकोर्ट के वकील जगमोहन सिंह भट्टी द्वारा दायर याचिका पर सुनाया था। भट्टी ने अब हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर इन चारों पूर्व संसदीय सचिवों की विधान सभा की सदस्यता भी रद्द करने की मांग की है। भट्टी के अनुसार जब दिल्ली के 20 आप विधायकों की सदस्यता खत्म की जा सकती हैं तो हरियाणा में क्यों नही। एक देश में दो तरह के कानून कैसे हो सकते है। यह याचिका सुनवाई के लिए बैंच के सामने एक दो दिन में लिस्ट हो सकती है।
यह थे चार सीपीएस
हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित होने वाले मुख्य संसदीय सचिवों में बडख़ल की विधायक सीमा त्रिखा, हिसार के विधायक डा. कमल गुप्ता, असंध के विधायक स. बख्शीस सिंह विर्क और रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा शामिल थे। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद इन्हें सीपीएस पद से त्याग पत्र देना पड़ा था। इन चारों सीपीएस ने 23 जुलाई 2015 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी।
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इस्तीफा देना काफी नहीं
कानून के जानकारों के अनुसार भले ही हरियाणा के चारों सीपीएस इस्तीफा दे चुके हैं लेकिन विधानसभा की इसी टर्म में इन्होंने सीपीएस का पद संभाला था। ऐसे में पद से त्यागपत्र देने के बावजूद भी यदि दिल्ली की तर्ज पर इनकी नियुक्ति को लाभ के पद के तौर पर देखा जाए तो उनकी सदस्यता को रद्द किया जा सकता है।
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हरियाणा की भाजपा सरकार में करीब दो साल पहले नियुक्त हुए चार मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को गैर संवैधानिक करार देते हुए 5 जुलाई को हाईकोर्ट ने उनको सीपीएस पद से हटाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने चारों मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति को कानून और प्रावधानों के विपरीत करार दिया था। हाईकोर्ट ने यह फैसला हाईकोर्ट के वकील जगमोहन सिंह भट्टी द्वारा दायर याचिका पर सुनाया था। भट्टी ने अब हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर इन चारों पूर्व संसदीय सचिवों की विधान सभा की सदस्यता भी रद्द करने की मांग की है। भट्टी के अनुसार जब दिल्ली के 20 आप विधायकों की सदस्यता खत्म की जा सकती हैं तो हरियाणा में क्यों नही। एक देश में दो तरह के कानून कैसे हो सकते है। यह याचिका सुनवाई के लिए बैंच के सामने एक दो दिन में लिस्ट हो सकती है।
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यह थे चार सीपीएस
हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित होने वाले मुख्य संसदीय सचिवों में बडख़ल की विधायक सीमा त्रिखा, हिसार के विधायक डा. कमल गुप्ता, असंध के विधायक स. बख्शीस सिंह विर्क और रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा शामिल थे। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद इन्हें सीपीएस पद से त्याग पत्र देना पड़ा था। इन चारों सीपीएस ने 23 जुलाई 2015 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी।
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इस्तीफा देना काफी नहीं
कानून के जानकारों के अनुसार भले ही हरियाणा के चारों सीपीएस इस्तीफा दे चुके हैं लेकिन विधानसभा की इसी टर्म में इन्होंने सीपीएस का पद संभाला था। ऐसे में पद से त्यागपत्र देने के बावजूद भी यदि दिल्ली की तर्ज पर इनकी नियुक्ति को लाभ के पद के तौर पर देखा जाए तो उनकी सदस्यता को रद्द किया जा सकता है।