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ईमानदारी के ईनाम में मिले 7 साल में 30 ट्रांसफर, जेई ने लगाई हाईकोर्ट से गुहार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 23 Jan 2018 08:34 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : File Photo
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हरियाणा बिजली विभाग में बतौर जेई काम कर रहे बीर सिंह जिन्हें इलाके के लोग दूसरे खेमका के तौर पर देखते है उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने तबादले को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने कहा कि हरियाणा सरकार की 2012 की पॉलिसी में प्रावधान है कि न्यूनतम 3 साल का गैप तबादलों में दिया जाएगा परंतु पिछली 7 साल की सेवा में उनके30 तबादले हो चुकेहैं।
याचिका दाखिल करते हुए बीर सिंह ने एडवोकेट मोहम्मद अरशद के माध्यम से कहा कि उन्होंने 6 सितंबर को हरियाणा बिजली विभाग में ज्वाईन किया था। इसकेबाद से ही वे लगातार ईमानदारी से काम करते आ रहे हैं। जब उनकी ईमानदारी पसंद नहीं आती है तो उनका ट्र्रांसफर कर दिया जाता है। इसी का नतीजा है कि वे पिछले 7 साल में 30 ट्रांसफर झेल चुके हैं। याची ने कहा कि जब उन्हें रेवाड़ी से नारनौल भेजा गया तो उन्हें बिजली चोरी रोकने का जिम्मा सौंपा गया और उन्हें उस टीम का मुखिया बना दिया।
टीम के छापेमारी पर जाते हुए कोई सुरक्षा नहीं दी जाती थी। बावजूद इसके उन्होंने 40 दिन के भीतर 68 लाख रुपए की बिजली चोरी पकड़ी। हालांकि विभाग ने आगे इसकी रिकवरी में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। याची ने कहा कि उनके जाने के कारण अधिकारियों को काम करने में मुश्किल आने लगती है और वे जेब नहीं भर पाते इसलिए उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। याची ने कहा कि गत वर्ष मई के बाद अब एक बार फिर से उनकेट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं जो सीधे तौर पर हरियाणा सरकार द्वारा अपनाई गई पॉलिसी के खिलाफ है। ऐसे में इन आदेशों को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट से अपील की गई है।
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याचिका दाखिल करते हुए बीर सिंह ने एडवोकेट मोहम्मद अरशद के माध्यम से कहा कि उन्होंने 6 सितंबर को हरियाणा बिजली विभाग में ज्वाईन किया था। इसकेबाद से ही वे लगातार ईमानदारी से काम करते आ रहे हैं। जब उनकी ईमानदारी पसंद नहीं आती है तो उनका ट्र्रांसफर कर दिया जाता है। इसी का नतीजा है कि वे पिछले 7 साल में 30 ट्रांसफर झेल चुके हैं। याची ने कहा कि जब उन्हें रेवाड़ी से नारनौल भेजा गया तो उन्हें बिजली चोरी रोकने का जिम्मा सौंपा गया और उन्हें उस टीम का मुखिया बना दिया।
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टीम के छापेमारी पर जाते हुए कोई सुरक्षा नहीं दी जाती थी। बावजूद इसके उन्होंने 40 दिन के भीतर 68 लाख रुपए की बिजली चोरी पकड़ी। हालांकि विभाग ने आगे इसकी रिकवरी में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। याची ने कहा कि उनके जाने के कारण अधिकारियों को काम करने में मुश्किल आने लगती है और वे जेब नहीं भर पाते इसलिए उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। याची ने कहा कि गत वर्ष मई के बाद अब एक बार फिर से उनकेट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं जो सीधे तौर पर हरियाणा सरकार द्वारा अपनाई गई पॉलिसी के खिलाफ है। ऐसे में इन आदेशों को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट से अपील की गई है।
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