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हरियाणा में स्कूल खुलते ही बढ़ा कोरोना संक्रमण का खतरा, 30 विद्यार्थी संक्रमित मिले
Wed, 16 Dec 2020 12:18 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार/रोहतक/चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार/रोहतक/चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 16 Dec 2020 12:18 AM IST
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में स्कूल खुलते ही कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा फिर बढ़ गया है। स्कूल खुलने के दूसरे दिन ही हिसार के खेड़ी बर्की गांव के 26 विद्यार्थियों के अलावा झज्जर और रोहतक जिले में भी दो-दो छात्र कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। हिसार के संक्रमितों में एक अध्यापक भी शामिल है।
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चरखी दादरी जिले में दो दिन में 800 विद्यार्थी स्वास्थ्य जांच करवाने सिविल अस्पताल पहुंचे। इन सभी के कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए। इनमें से करीब 40 विद्यार्थियों में कोरोना के लक्षण नजर आए, जिन्हें होम आइसोलेट किया गया है। झज्जर जिले 10वीं व 12वीं कक्षा में छह विद्यार्थियों के शरीर का तापमान अधिक होने के कारण उन्हें वापस घर भेज दिया गया।
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'अस्पतालों में भटक रहे छात्र, स्कूलों में हाजिरी कम'
हरियाणा में स्कूल जाने से पहले छात्र स्क्रीनिंग जांच के लिए अस्पतालों में भटक रहे हैं। इस वजह से स्कूलों में हाजिरी भी कम है। हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ ने इस समस्या से शिक्षा निदेशक को अवगत करवाया है। संघ के प्रदेश सचिव बलविंदर सिंह व प्रदेश प्रवक्ता मोहन परोचा ने बताया कि हरियाणा शिक्षा विभाग 10वीं व 12वीं की कक्षाओं की पढ़ाई को मद्देनजर रखते हुए निदेशक द्वारा पत्र जारी कर विभाग को निर्देश दिए गए कि 14 दिसंबर से स्कूल खोले जाएंगे। साथ ही यह भी शर्त रखी गई कि वही बच्चे विद्यालय में प्रवेश कर पाएंगे, जिनके पास स्क्रीनिंग टेस्ट की रिपोर्ट होगी।
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यही शर्त छात्रों के लिए बड़ी समस्या बन गई है, जिस वजह से स्कूलों में बहुत कम छात्र ही आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि छात्र अपना स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने के लिए सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में चक्कर काट रहे हैं। प्राइवेट डॉक्टर व अस्पतालों में तो स्क्रीनिंग टेस्ट रिपोर्ट जारी करने की एवज में छात्रों से मोटी फीस वसूली जा रही है।
विद्यालय में बच्चों को इस स्क्रीनिंग रिपोर्ट के बिना प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। ऐसे में सबसे ज्यादा समस्या ग्रामीण क्षेत्र से छात्रों को आ रही है, क्योंकि टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए उनके साथ उनके अभिभावक भी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। संघ ने सरकार से अनुरोध किया है कि स्कूल स्तर पर ही बच्चों को यह स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने का इंतजाम करवाया जाए, ताकि पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।