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Hindi News ›   Chandigarh ›   25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Special Interview

कूड़ा-कचरा बीनने से मेयर बनने का सफर तय करने वाले राजेश कालिया से विशेष बातचीत, पढ़ें...

Thu, 26 Dec 2019 11:55 AM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 26 Dec 2019 11:55 AM IST
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25th Mayor of Chandigarh Rajesh Kalia Special Interview
राजेश कालिया - फोटो : अमर उजाला
राजेश कालिया, जो कभी कूड़े से कागज बीनते थे और उसे बेचकर अपना और परिवार का पेट भरते थे। उन्होंने मेयर बनकर विरोधियों का ऐसा करारा जवाब दिया कि उत्तर किसी के पास नहीं।
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मेयर शहर का पहला नगारिक होता है। इसलिए जिम्मेदारी बनती है कि कुछ गलत हो तो वह पक्षपात न करते हुए न्याय करे। इसके साथ शहर के विकास में सतत प्रयास करते हुए नई योजनाओं को लागू करे। पक्ष और विपक्ष का सामंजस्य बनाकर योजनाओं को लागू करना ही सफल मेयर की पहचान है। मेरे कार्यकाल में मेरे मामा कृष्ण कुमार चड्ढा ने नियमों को तोड़ा तो उसे सस्पेंड कराया।
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कमिश्नर केके यादव का सहयोग मिला तो कई महत्वकांक्षी और सालों से लटकी योजनाओं को परवान चढ़ाया। यह बातें शहर के मेयर राजेश कालिया ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहीं। राजेश कालिया का दिसंबर में कार्यकाल खत्म हो जाएगा, लेकिन कचरा बीनने वाले से मेयर बनने तक का सफर उन्होंने अमर उजाला के साथ साझा किया। मेयर से नवदीप मिश्रा की विशेष बातचीत...
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कमिश्नर ने समझाईं योजनाएं, कभी अटकी नहीं फाइल

मेयर ने बताया कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि के बीच सामंजस्य अच्छा होना चाहिए। इससे शहर की कोई योजना नहीं अटकेगी। कई बार निगम की योजनाएं समझ नहीं आती थीं तो कमिश्नर खुद बैठकर पूरी योजना के बारे में बताते थे। इससे मुझे अपने पार्षदों तक बात पहुंचाने में आसानी होती थी। वहीं सदन में भी बेहतर तरीके से सवालों के जबाव दे पाता था।

विवादों से रहा नाता, अटकी योजनाओं को पार लगाया
मेयर ने कहा कि कुछ समय आचार संहिता में निकल गया तो कुछ अपनों को समझाने में, लेकिन इन सबके बावजूद अपने कार्यकाल में ऐसे मुद्दों को हल किया जो सालों से अटके थे। साथ ही विवादित योजनाओं को भी अंजाम तक पहुंचाया है। चूंकि इन प्रोजेक्ट में पहले भी कई अन्य मेयरों की मेहनत थी, लेकिन उन्हें अपने कार्यकाल में लागू कराना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। एक कूड़ा बीनने वाले से मेयर की कुर्सी तक  का सफर तय करने में मुश्किलें काफी आईं, लेकिन आज सुकून मिलता है।

दिशा ठीक नहीं मिली इसलिए विवादित रहा मैं
मेयर ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों केबारे में बताया कि बचपन कुछ इस तरह का बीता कि बस रोजी रोटी की चिंता रहती थी। हमारा लक्ष्य केवल भोजन होता था। ऐसे में संगति ऐसी रही कि अपराध की दुनिया में भी नाम आने लगा, लेकिन जब एक अच्छी दिशा मिली तो अपने को संवारा, आगे बढ़ाया। यही कारण रहा कि विवादित जीवन की सुर्खियां बनने के बाद भी पार्टी ने मेयर बनाया।

जाति को लेकर आई समस्या, बाद में सब ठीक हो गया
मेयर ने कहा कि शुरुआत में जाति को लेकर थोड़ी समस्या रही। कई बार अफसर भी थोड़ा पीछे हटते थे, लेकिन फिर मैंने खुद आगे बढ़कर सभी को समझाया। धीरे-धीरे कार्यकाल आगे बढ़ता गया और जाति के आधार पर दूर भागने वाले लोग भी मेरे साथ चाय पीने लगे।

सांसद का मिला साथ, प्रशासक ने भी बढ़ाया हाथ

एक घर में चार बर्तन होते हैं तो आसपी खटपट तो होती ही है। ऐसी स्थिति में सांसद किरन खेर और प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने एक परिजन के रूप में पार्टी में सामंजस्य स्थापित किया। जरूरत पड़ी तो प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने भी हाथ बढ़ाकर मदद की। निगम को 150 करोड़ का अतिरिक्त फंड इसका एक बड़ा उदाहरण है।

अफसरों के घर काम कर रहे 150 लोगों को बाहर निकाला
बीच में सूचना मिली कि कुछ कर्मचारी अफसरों के घर में काम कर रहे हैं या अपने घर बैठकर सैलरी ले रहे हैं। कमिश्नर और मेरे साझा प्रयास से ऐसे 150 लोगों को मैं बाहर निकालकर लाया। वहीं कुछ लोग केवल कागजों में थे, लेकिन उनके नाम पर सैलरी ली जा रही थी। उसे भी आपसी सामंजस्य से बंद करवाया। नहीं तो राजनीति के चक्कर में ऐसे मामले सामने ही नहीं आते।

मेरे कार्यकाल में मिली 300 लोगों को नौकरी
काम के दौरान जिन कर्मचारियों की मृत्यु हो गई। उनके परिजनों को सहयोग देना हमारी जिम्मेदारी है। ऐसे ही 300 परिवारों से एक-एक व्यक्ति को आउटसोर्स पर नियुक्ति दिलाई। इतने बड़े स्तर पर कभी किसी मेयर के कार्यकाल में भर्ती नहीं हुई।

ओपन दरबार की प्रक्रिया शुरू की, राजशाही प्रथा खत्म की
मेयर ने कहा कि जब मैं मेयर बना तो एक राजशाही कुर्सी होती थी। जिस पर मेयर बैठता था, लेकिन मैं सेवक ह्रूं राजा नहीं। इसलिए कुर्सी बदलवाई। मेयर रहते हुए मैंने ओपन दरबार की व्यवस्था शुरु की, ताकि कोई बिना मिले न लौटे। आगे आने वाले मेयर के लिए चुनौती होगी कि वह कैसे इस व्यवस्था को चलाते हैं।

वेंडरों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी
वेंडरों को शिफ्ट करने का फैसला हाईकोर्ट का है, लेकिन वेंडिंग जोन में बेहतर व्यवस्थाएं देंगे इस बात का वादा है।

मेयर बनने के बाद तय किए थे ये लक्ष्य

डंपिंग ग्राउंड को समाप्त करना
 पिछले 40 साल से डंपिंग ग्राउंड की समस्या से जूझ रहे लोगों को 2019 में एक बड़ी राहत की सांस मिली। जब उनके बीच का एक व्यक्ति मेयर बना। उम्मीदों के मुताबिक मेयर ने अपना कार्यकाल खत्म करने से पहले डंपिंग ग्राउंड की समस्या को खत्म किया।

शहर के लिए 29 एमजीडी अतिरिक्त पानी लाना
गर्मियों में हर साल पानी की समस्या से शहर को जूझना पड़ता था। सालों से यह प्रोजेक्ट किसी न किसी कारण से अटक जाता था, कालिया के कार्यकाल में यह प्रोजेक्ट भी शुरू हो गया।

डोर टू डोर गारबेज कलेक्टरों से समझौता
 स्वच्छता में अभियान में अच्छे नंबर लाने के लिए निगम को कचरा सेग्रीगेशन करना था। कई कोशिशों के बावजूद डोर टू डोर गारबेज कलेक्टरों से समझौता नहीं हो सका। मेयर ने अपने अनुभव का फायदा उठाया और इस काम को पूरा किया।

निगम की बिल्डिंग रिनोवेशन के काम की शुरुआत कराना
 निगम की बिल्डिंग की रूपरेखा तत्कालीन मेयर राजबाला मलिक के कार्यकाल में शुरू हुई। उसके रिनोवेशन की काम की तैयारी तत्कालीन मेयर देवेश मोदगिल के समय में शुरू हुई, लेकिन किन्ही कारणों से काम शुरू नहीं हो सका। इस काम को भी राजेश कालिया ने अंजाम दिया।

इन विवादों ने मेयर को घेरा

- डंपिंग ग्राउंड के सहारे जीते, घर शिफ्ट करने से लोग नाराज
- सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष प्रधान कृष्ण कुमार चड्डा के साथ विवाद बना सुर्खियां
- बिजली का बिल नहीं जमा कराया, कटा घर का कनेक्शन
- निजी घर पर रंग रोगन के मामले ने भी पकड़ा था तूल

अनदेखी होने पर भाजपा के कार्यक्रम में हुए थे नाराज
मेयर कालिया की भाजपा नेताओं के साथ अनबन की खबरें भी समय-समय पर आती रही हैं। किरण खेर के जीतने के बाद एक धन्यवाद समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में लगे बैनर में कई नेताओं के फोटो लगे थे, लेकिन कालिया की फोटो नहीं थी। कार्यक्रम के दौरान ही वे नाराज हो गए और वापस जाने लगे। यह विवाद भी काफी गहराया था और अखबारों की सुर्खियां बनी थीं। मेयर के वार्ड में किरण खेर को कम वोट मिलने का मुद्दा भी काफी सुर्खियों में रहा।

मेयर की सहजता की उनकी सबसे बड़ी खासियत
एक अच्छा सेवक वही माना जाता है, जो जनता के लिए अपने दरवाजे हर वक्त खुले रखता है। ऐसी कुछ खासयित मेयर कालिया के पक्ष में जाती है। उनसे यदि मिलना हो तो उसके लिए कोई भी बाधाएं नहीं आती। मोबाइल पर भी वे सहजता से लोगों की बात सुनते हैं और उस पर काम भी करते हैं। कैंबवाला में पेयजल की समस्या हुई तो वे खुद ही टैंकर लेकर पहुंच गए। धनास में सिलेंडर ब्लास्ट में घायलों को लेकर वे अस्पताल भी पहुंचे थे। विरोधियों के साथ उनका व्यवहार मिलनसार है। वहीं कई बार लोगों की समस्याएं देखकर मेयर खुद ही फाइल लेकर अधिकारियों के पास पहुंच जाते थे। अधिकारी भी उनकी सहजता को लेकर काफी खुश थे।

फंड की समस्या गहराई, तो प्रशासक से लगाई गुहार

सितंबर महीने की निगम सदन की बैठक में फंड की समस्या को लेकर कमिश्नर केके यादव ने स्पष्ट कहा कि मेरे पास केवल सैलरी देने का फंड है। विकास कार्य नहीं हो सकते। राजेश कालिया सभी पार्षदों को लेकर कमिश्नर के साथ प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के पास पहुंचे। प्रशासक को समस्या सुनाई तो एडवाइजर के माध्यम से 150 करोड़ रुपए देने का आश्वासन मिल गया। साथ ही निगम में शामिल 13 गांव के विकास कार्यों का खाका बनाने के लिए भी हरी झंडी मिली।

खुद पहुंचे टैंकर लेकर, घरों में पहुंचाया पानी
कुछ दिन पहले कजौली वाटर वर्क्स से आने वालीं चारों फेज से पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। शहर में हाहाकार मच गया। निगम ने किराए पर टैंकर लिए, किसी तरह 24 घंटे पानी सप्लाई कर लोगों को पानी आपूर्ति की व्यवस्था की। इस दौरान मेयर राजेश कालिया खुद टैंकरों में बैठकर लोगों के घरों में पानी पहुंचाने गए। इससे लोग और प्रभावित हुए। सेक्टर 15 में उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं।
 
सहजता ऐसी कि मेयर को पहचाने ही नहीं पुलिसवाले
- एक्टिवा से जा रहे मेयर राजेश कालिया को पुलिसकर्मी ने रोककर ब्रेथनलाइजर में फूंक मारने को कहा। कालिया ने बताया कि मैं मेयर हूं। पुलिसकर्मी बोले, दो घूंट लगाकर सब मेयर होते हैं।
- खड़ी गाड़ी में मेयर की पत्नी सीट बेल्ट नहीं लगाए हुए थीं। एक महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें चालान जमा करने को कहा। मेयर ने आकर अपना परिचय दिया तो बोली, कहां के मेयर हैं आप।
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