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सोनीपत बम ब्लास्ट: 21 साल लड़ी न्याय के लिए लड़ाई, आज आ सकता है फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Updated Mon, 09 Oct 2017 09:17 AM IST
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सोनीपत बम ब्लास्ट मामला
सोनीपत शहर में साल 1996 में हुए सिलसिलेवार दो बम धमाकों के मामले में फैसला का इंतजार कर रहे लोगों को 21 साल बाद सोमवार को न्याय मिलने की उम्मीद है। मामले में आरोपी अब्दुल करीम टुंडा को लेकर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ.सुशील गर्ग की अदालत में बहस पूरी हो चुकी है और 9 अक्टूबर की तारीख दी गई है। मामले में शिकायतकर्ता के साथ ही पीड़ित व गवाह फैसने का इंतजार कर रहे हैं।
सोनीपत शहर में 28 दिसंबर, 1996 को दो स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए थे। उस दिन शाम के समय पहला धमाका बस स्टैंड के पास स्थित बावा-तराना सिनेमा के निकट हुआ तो उसके महज दस मिनट बाद दूसरा धमाका गीता भवन चौक स्थित गुलशन मिष्ठान भंडार के पास हुआ था। धमाके में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस संबंध में इंदिरा कालोनी निवासी सज्जन सिंह के बयान पर मामला दर्ज किया था।
सज्जन सिंह ने बताया था कि वह अपने साथी अनिल के साथ फिल्म देखने आया था। इस दौरान हुए धमाके में उसके अलावा 11 अन्य लोग घायल हुए थे। बाद में पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपियों गाजियाबाद निवासी अब्दुल करीम टुंडा व उसके दो साथियों अशोक नगर, पिलखुआ निवासी शकील अहमद और अनार वाली गली तेलीवाड़ा, दिल्ली निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था।
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पुलिस ने शकील और कामरान को वर्ष 1998 में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टुंडा घटना के बाद फरार हो गया था। बाद में उसे दिल्ली पुलिस ने नेपाल की सीमा से काबू किया था। सोनीपत में चल रहे मामले में सभी 50 गवाही हो चुकी है। साथ ही बहस भी पूरी हो चुकी है। इस मामले में पहले ही काबू किए गए शकील व कामरान सुनवाई के बाद बरी हो चुके हैं।
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सोनीपत शहर में 28 दिसंबर, 1996 को दो स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए थे। उस दिन शाम के समय पहला धमाका बस स्टैंड के पास स्थित बावा-तराना सिनेमा के निकट हुआ तो उसके महज दस मिनट बाद दूसरा धमाका गीता भवन चौक स्थित गुलशन मिष्ठान भंडार के पास हुआ था। धमाके में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस संबंध में इंदिरा कालोनी निवासी सज्जन सिंह के बयान पर मामला दर्ज किया था।
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सज्जन सिंह ने बताया था कि वह अपने साथी अनिल के साथ फिल्म देखने आया था। इस दौरान हुए धमाके में उसके अलावा 11 अन्य लोग घायल हुए थे। बाद में पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपियों गाजियाबाद निवासी अब्दुल करीम टुंडा व उसके दो साथियों अशोक नगर, पिलखुआ निवासी शकील अहमद और अनार वाली गली तेलीवाड़ा, दिल्ली निवासी मोहम्मद आमिर खान उर्फ कामरान को नामजद किया था।
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पुलिस ने शकील और कामरान को वर्ष 1998 में गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन टुंडा घटना के बाद फरार हो गया था। बाद में उसे दिल्ली पुलिस ने नेपाल की सीमा से काबू किया था। सोनीपत में चल रहे मामले में सभी 50 गवाही हो चुकी है। साथ ही बहस भी पूरी हो चुकी है। इस मामले में पहले ही काबू किए गए शकील व कामरान सुनवाई के बाद बरी हो चुके हैं।
ये हैं टुंडा के खिलाफ आरोप
करीम टुंडा
- फोटो : File Photo
ये हैं टुंडा के खिलाफ आरोप
सोनीपत अदालत में आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के खिलाफ हत्या के प्रयास व बम बलास्ट कराने के मामले के तहत आरोप लगे हैं। उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय हुए हैं। इसमें दोष साबित होने पर दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
शिकायतकर्ता ने कहा, लड़ी लंबी लड़ाई
इस मामले में शिकायतकर्ता इंदिरा कालोनी निवासी सज्जन सिंह ने बताया कि मामले को लेकर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है। वह अपने साथी अनिल के साथ फिल्म देखने गए थे। तभी बावा सिनेमा के बाहर धमाका हुआ था। अचानक हुए ब्लास्ट से हर तरफ धुआं फैल गया था। वह तथा 11 अन्य लोग घायल हुए थे। उसने स्वयं घायल होते हुए भी अन्य घायलों को अस्पताल में पहुंचाने में मदद की थी। उन्हें उम्मीद है कि अब इस मामले में न्याय होगा।
बम ब्लास्ट को याद कर आज भी सिहर उठती है आत्मा : हरबंस लाल
गुलशन स्वीट्स के बाहर हुए बम धमाके में घायल हुए सेक्टर-15 निवासी हरबंस लाल कहते हैं कि धमाके की याद आते ही आज भी उनकी आत्मा सिहर उठती है। वह कहते हैं कि घटना के दिन वह गीता भवन चौक स्थित अपने बुक डिपो पर थे। इसी दौरान पता लगा कि सोनीपत में बावा सिनेमा के पास बम धमाका हुआ है। जिस पर सभी दुकानदार गुलशन ढाबे के पास खड़े हो गए। अभी इस बारे में बातचीत कर रहे थे कि वहां भी बम ब्लास्ट हो गया। उसके शरीर पर छर्रे लगने से 40 चोट आई थी। उसे चार माह तक अस्पताल में रखा गया। जिसके बाद वह घल लौट सका था।
सोनीपत अदालत में आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के खिलाफ हत्या के प्रयास व बम बलास्ट कराने के मामले के तहत आरोप लगे हैं। उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय हुए हैं। इसमें दोष साबित होने पर दस साल तक की सजा का प्रावधान है।
शिकायतकर्ता ने कहा, लड़ी लंबी लड़ाई
इस मामले में शिकायतकर्ता इंदिरा कालोनी निवासी सज्जन सिंह ने बताया कि मामले को लेकर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है। वह अपने साथी अनिल के साथ फिल्म देखने गए थे। तभी बावा सिनेमा के बाहर धमाका हुआ था। अचानक हुए ब्लास्ट से हर तरफ धुआं फैल गया था। वह तथा 11 अन्य लोग घायल हुए थे। उसने स्वयं घायल होते हुए भी अन्य घायलों को अस्पताल में पहुंचाने में मदद की थी। उन्हें उम्मीद है कि अब इस मामले में न्याय होगा।
बम ब्लास्ट को याद कर आज भी सिहर उठती है आत्मा : हरबंस लाल
गुलशन स्वीट्स के बाहर हुए बम धमाके में घायल हुए सेक्टर-15 निवासी हरबंस लाल कहते हैं कि धमाके की याद आते ही आज भी उनकी आत्मा सिहर उठती है। वह कहते हैं कि घटना के दिन वह गीता भवन चौक स्थित अपने बुक डिपो पर थे। इसी दौरान पता लगा कि सोनीपत में बावा सिनेमा के पास बम धमाका हुआ है। जिस पर सभी दुकानदार गुलशन ढाबे के पास खड़े हो गए। अभी इस बारे में बातचीत कर रहे थे कि वहां भी बम ब्लास्ट हो गया। उसके शरीर पर छर्रे लगने से 40 चोट आई थी। उसे चार माह तक अस्पताल में रखा गया। जिसके बाद वह घल लौट सका था।