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पंजाब: 'दुबई से शव लाने का खर्च सवा लाख, जिंदा पर खर्च होते हैं सिर्फ 25 हजार'

Wed, 15 Jul 2020 03:56 AM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, राजासांसी (अमृतसर)
अशोक नीर, अमर उजाला, राजासांसी (अमृतसर) Published by: ajay kumar Updated Wed, 15 Jul 2020 03:56 AM IST
सार

  • खाड़ी के देशों में फंसे 174 पंजाबी चार्टर प्लेन से पहुंचे अमृतसर, सरबत दा भला ट्रस्ट ने करवाई व्यवस्था 
  • ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. ओबराय कहा- इन युवकों को ट्रेनिंग दिलाकर आर्थिक मदद देकर बनाएंगे आत्मनिर्भर  

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174 Indians stranded in Gulf countries returned home
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

कुवैत समेत खाड़ी के कई देशों में फंसे 174 पंजाबियों को सरबत दा भला ट्रस्ट एक विशेष चार्टर जहाज से वतन लाया। श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल हवाई अड्डे में पहुंचने के बाद ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. एसपीएस ओबरॉय ने कहा कि अब ट्रस्ट इन युवकों को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाएगा। 

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डॉ. ओबरॉय ने कहा कि वह अब तक खाड़ी के देशों से 180 के लगभग युवाओं के पार्थिव शव घर पहुंचा चुके है। पार्थिव शव को घर भेजने में सवा लाख की राशि खर्च होती है। वहीं जिंदा व्यक्ति खाड़ी देशों से वतन लाने पर 25 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। इसलिए खाड़ी देशों में काम करने वाले पंजाबियों को उनके गांव लाकर आत्मनिर्भर बनाने का काम शुरू करवाया जाएगा। 
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उन्होंने कहा कि दुबई से 170 यात्रियों का एक विशेष चार्टर जहाज 19 जुलाई को चंडीगढ़ और 25 जुलाई को अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचेगा। जरूरत पड़ने पर वह और विशेष चार्टर जहाज से खाड़ी देशों से पंजाबियों को वतन पहुंचाएंगे। 
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नौकरी खो जाने के बाद कर्ज में डूबे नौजवान कर रहे खुदकुशी  
कुवैत से लौटे पंजाबियों के चेहरों पर घर पहुंचने की खुशी थी, साथ ही रोजी-रोटी छीन जाने का गम भी था। युवकों ने बताया कि कोरोना के कारण खाड़ी देशों में कंपनियां बंद हो गई हैं। उन्हें कई महीने का वेतन भी नहीं दिया गया। वह भुखमरी का शिकार हो रहे थे। लखविंदर सिंह ने कहा कि अब वह गांव में ही अपना कोई काम-धंधा करेंगे। 


उन लोगों की स्थिति बहुत खराब है जो कोरोना फैलने से चार-पांच महीने पहले ही खाड़ी के देशों में कमाने के लिए गए थे। काम न होने के कारण ये युवक हताशा में खुदकुशी कर रहे हैं। खाड़ी देशों में जाने के लिए सभी ने कर्ज लिया था। अब बोझ कैसे उतरेगा, यह सोच कर ही वह परेशान है। इन सभी युवकों का मेडिकल टेस्ट हुआ। नियमों के अनुसार सभी नौजवानों को अपने-अपने जिलों में भेज दिया गया, जहां वह क्वारंटीन होंगे।

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