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छठ महापर्व की तैयारी पूरी, खाए-नहाय आज
Updated Sun, 11 Nov 2018 02:01 AM IST
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1000 पूजन पिंडी तैयार, लाइटों से सजा घग्गर का घाट
छठ महापर्व की तैयारी पूरी, खाए-नहाय आज
- 1000 पूजन पिंडी तैयार, लाइटों से सजा घग्गर का घाट
- एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
- पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कसी कमर
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। भगवान सूर्यदेव के प्रति भक्तों की अटल आस्था से जुड़े चार दिवसीय छठ महापर्व की तैयारियां पूरी हो गई है। सेक्टर-21 स्थित घग्गर घाट पर एक हजार से ज्यादा छठ पूजन पिंडी बनकर तैयार है। साथ ही घाट को भक्तों की ओर से रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। भक्तों की मानें तो घाट पर इस बार एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने भी तैयारी पूरी कर ली है। घाट पर पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए सफाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा हैं। पंचकूला प्रशासन की ओर से एक जेसीबी के साथ करीब 20 कर्मचारियों की ड्यूटी सफाई के लिए लगाई गई है।
छठ पूजा समिति पंचकूला के सदस्यों ने बताया कि घाट पर प्रकाश के लिए 150 हैलोजन लाइट लगी है। 500 से अधिक रंग-बिरंगी लड़ियां लगाई गईं हैं। पावर सप्लाई के लिए 62 केवी के चार जनरेटर लगे हैं। इसके अलावा पूजन के दौरान फायर टेंडर, एंबुलेंस, ट्रैफिक पुलिस समेत महिला पुलिस तैनात रहेगी। उन्होंने बताया कि करीब दो किमी. की दूरी में पूजन पिंडी बनीं हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। छठ पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है।
छठ व्रत की मुख्य तिथियां
11 नवंबर : खाए नहाय
12 नवंबर : खरना
13 नवंबर : शाम का अर्घ्य
14 नवंबर : सुबह का अर्घ्य
सूर्य छठ व्रत का समापन
छठ व्रत विधि
खाए नहाय : छठ पूजा व्रत चार दिन तक चलता है। इसके पहले दिन नहाने और खाने की विधि होती है। जिसमें व्यक्ति को घर की सफाई कर स्वयं शुद्ध होना चाहिए और केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए।
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खरना : दूसरे दिन खरना की विधि की जाती है। खरना में व्यक्ति को पूरे दिन का उपवास रखकर, शाम के समय गन्ने का रस या गुड़ में बने हुए चावल की खीर को प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। इस दिन बनी गुड़ की खीर बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होती है।
शाम का अर्घ्य :
तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों को लकड़ी के डाले में रखकर घाट पर ले जाना चाहिए। शाम को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान वैसे ही रखना चाहिए। इस दिन रात के समय छठी माता के गीत गाने चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए।
सुबह का अर्घ्य:
घर लौटकर अगले (चौथे) दिन सुबह-सुबह सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचना चाहिए। उगते हुए सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान रक्षा का आशीर्वाद मांगना चाहिए। अर्घ्य देने के बाद घर लौटकर सभी में प्रसाद बांटना चाहिए तथा स्वयं भी प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।
छठ पर्व की मान्यता
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस महाव्रत को निष्ठा भाव से विधिपूर्वक संपन्न करता है वह संतान सुख से कभी अछूता नहीं रहता है। इस महाव्रत के फलस्वरूप व्यक्ति को न केवल संतान की प्राप्ति होती है बल्कि उसके सारे कष्ट भी समाप्त हो जाते हैं। षष्ठी देवी, छठ माई या कहें कि सूर्य षष्ठी के अवसर पर पूजन में कोई भी कमी नहीं रहना चाहिए।
पांच ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री जिनके बिना पर्व की परंपरा अधूरी मानी जाती है
बांस की टोकरी: पूजा में इसका विशेष महत्व होता है। इसमें अर्घ्य का सामान पूजा स्थल तक लेकर जाते हैं और भेंट करते हैं।
ठेकुआ: गुड़ और गेहूं के आटे से बना ठेकुआ पर्व का प्रमुख प्रसाद है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
गन्ना: पूजा में प्रयोग होने वाला प्रमुख सामग्री होता है। गन्ने से अर्घ्य दिया जाता है और घाट पर घर भी बनाया जाता है।
केला: छठ पूजा में केला के प्रसाद के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। केले का पूरा गुच्छा छठ मइया को भेंट किया जाता है।
शुद्ध जल और दूध का लोटा : यह अर्घ्य देने के काम आएगा और अर्घ्य ही इसी पूरी पूजा के केंद्र में होता है।
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छठ महापर्व की तैयारी पूरी, खाए-नहाय आज
- 1000 पूजन पिंडी तैयार, लाइटों से सजा घग्गर का घाट
- एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
- पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कसी कमर
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। भगवान सूर्यदेव के प्रति भक्तों की अटल आस्था से जुड़े चार दिवसीय छठ महापर्व की तैयारियां पूरी हो गई है। सेक्टर-21 स्थित घग्गर घाट पर एक हजार से ज्यादा छठ पूजन पिंडी बनकर तैयार है। साथ ही घाट को भक्तों की ओर से रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। भक्तों की मानें तो घाट पर इस बार एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने भी तैयारी पूरी कर ली है। घाट पर पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए सफाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा हैं। पंचकूला प्रशासन की ओर से एक जेसीबी के साथ करीब 20 कर्मचारियों की ड्यूटी सफाई के लिए लगाई गई है।
छठ पूजा समिति पंचकूला के सदस्यों ने बताया कि घाट पर प्रकाश के लिए 150 हैलोजन लाइट लगी है। 500 से अधिक रंग-बिरंगी लड़ियां लगाई गईं हैं। पावर सप्लाई के लिए 62 केवी के चार जनरेटर लगे हैं। इसके अलावा पूजन के दौरान फायर टेंडर, एंबुलेंस, ट्रैफिक पुलिस समेत महिला पुलिस तैनात रहेगी। उन्होंने बताया कि करीब दो किमी. की दूरी में पूजन पिंडी बनीं हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। छठ पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है।
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छठ व्रत की मुख्य तिथियां
11 नवंबर : खाए नहाय
12 नवंबर : खरना
13 नवंबर : शाम का अर्घ्य
14 नवंबर : सुबह का अर्घ्य
सूर्य छठ व्रत का समापन
छठ व्रत विधि
खाए नहाय : छठ पूजा व्रत चार दिन तक चलता है। इसके पहले दिन नहाने और खाने की विधि होती है। जिसमें व्यक्ति को घर की सफाई कर स्वयं शुद्ध होना चाहिए और केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए।
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खरना : दूसरे दिन खरना की विधि की जाती है। खरना में व्यक्ति को पूरे दिन का उपवास रखकर, शाम के समय गन्ने का रस या गुड़ में बने हुए चावल की खीर को प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। इस दिन बनी गुड़ की खीर बेहद पौष्टिक और स्वादिष्ट होती है।
शाम का अर्घ्य :
तीसरे दिन सूर्य षष्ठी को पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पूजा की सामग्रियों को लकड़ी के डाले में रखकर घाट पर ले जाना चाहिए। शाम को अर्घ्य देने के बाद घर आकर सारा सामान वैसे ही रखना चाहिए। इस दिन रात के समय छठी माता के गीत गाने चाहिए और व्रत कथा सुननी चाहिए।
सुबह का अर्घ्य:
घर लौटकर अगले (चौथे) दिन सुबह-सुबह सूर्य निकलने से पहले ही घाट पर पहुंचना चाहिए। उगते हुए सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान रक्षा का आशीर्वाद मांगना चाहिए। अर्घ्य देने के बाद घर लौटकर सभी में प्रसाद बांटना चाहिए तथा स्वयं भी प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।
छठ पर्व की मान्यता
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस महाव्रत को निष्ठा भाव से विधिपूर्वक संपन्न करता है वह संतान सुख से कभी अछूता नहीं रहता है। इस महाव्रत के फलस्वरूप व्यक्ति को न केवल संतान की प्राप्ति होती है बल्कि उसके सारे कष्ट भी समाप्त हो जाते हैं। षष्ठी देवी, छठ माई या कहें कि सूर्य षष्ठी के अवसर पर पूजन में कोई भी कमी नहीं रहना चाहिए।
पांच ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री जिनके बिना पर्व की परंपरा अधूरी मानी जाती है
बांस की टोकरी: पूजा में इसका विशेष महत्व होता है। इसमें अर्घ्य का सामान पूजा स्थल तक लेकर जाते हैं और भेंट करते हैं।
ठेकुआ: गुड़ और गेहूं के आटे से बना ठेकुआ पर्व का प्रमुख प्रसाद है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
गन्ना: पूजा में प्रयोग होने वाला प्रमुख सामग्री होता है। गन्ने से अर्घ्य दिया जाता है और घाट पर घर भी बनाया जाता है।
केला: छठ पूजा में केला के प्रसाद के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। केले का पूरा गुच्छा छठ मइया को भेंट किया जाता है।
शुद्ध जल और दूध का लोटा : यह अर्घ्य देने के काम आएगा और अर्घ्य ही इसी पूरी पूजा के केंद्र में होता है।