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हाथ फ्रैक्चर होने के बाद भी कर्नाटका से पंचकूला पहुंचा दिव्यांग खिलाड़ी, दूसरे हाथ में भी लगी चोट खून से लहूलुहान
Updated Mon, 26 Mar 2018 02:04 AM IST
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दिव्यांग को लगी चोट, खून बहता देख आंख से निकले आंसू
- हाथ फ्रैक्चर होने के बाद भी कर्नाटका से पहुंचा दिव्यांग खिलाड़ी, अव्यवस्था के कारण दूसरे हाथ में भी लगी चोट
- महिला दिव्यांग खिलाड़ी बोली, न तो शौचालय और न ही ठहरने की व्यवस्था
दीपक शाही
पंचकूला।
अपने मजबूत इरादों की बदौलत एक दिव्यांग खिलाड़ी हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद भी कर्नाटक से मीलों दूूर नेशनल पैरा एथलेटिक मीट में हिस्सा लेने के लिए पंचकूला पहुंच तो गया। लेकिन राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में फैली अव्यवस्थाओं के कारण दिव्यांग खिलाड़ी सड़क पर गिरकर घायल हो गया।
रविवार की सुबह खेल के मैदान में हिस्सा लेने पहुंचा ईश्वर बीच रास्ते में लड़खड़ाकर गिर पड़ा। क्योंकि उसके पास व्हील चेयर मौजूद नहीं था। वह ठीक तरीके से चल भी नहीं पा रहा था। जमीन पर गिरते ही उसके हाथों से खून टपकने लगा। खून देख उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। वहीं, इस दौरान सभी आयोजक खेल के मैदान में व्यस्त थे, उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया और वह 20 मिनट तक मदद के लिए आयोजकों की राह देखता रहा। वहीं कुछ राहगीरों की नजर उस पर पड़ने से उसे एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। तब जाकर उसका उपचार हुआ। ऐसी ही कई महिला दिव्यांग खिलाड़ी यहां पैरा एथलेटिक मीट में हिस्सा लेने के लिए पहुंची, जिन्हें माकूल प्रबंध नहीं होने के चलते समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
व्हील चेयर वाले खिलाड़ियों के लिए नहीं अलग से व्यवस्था
देश के 28 राज्यों के करीब 1443 दिव्यांग प्रतिभागी हिस्सा लेने पहुंचे हैं, इनमें करीब चालीस फीसदी ऐसे खिलाड़ी हैं जो बिना व्हील चेयर के एक कदम भी चल नहीं सकते। ऐसे में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजकों ने ठहरने के लिए अलग-अलग व्यवस्था तो की है, लेकिन दिव्यांगों को जिस रोडवेज की बसों में विश्राम स्थान से खेल के मैदान तक लाने और ले जाने की व्यवस्था की गई है, उस बस में व्हील चेयर पर खिलाड़ी कैसे चढ़ पाएंगे। इस दिशा में आयोजकों का ध्यान क्यों नहीं गया।
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दो बार व्हील चेयर से नीचे गिरी दिव्यांग खिलाड़ी
दिव्यांग खिलाड़ी शायरा ने बताया कि व्हील चेयर के बगैर वह एक कदम चल नहीं सकती। मदद के लिए वह अपने भाई को लेकर पंचकूला आई थी, लेकिन दोनों के रहने की व्यवस्था अलग-अलग की गई है। वहीं शौचालय का गेट इतना छोटा है कि उसमें व्हील चेयर घुस नहीं पाता है। जिस वजह से सुबह वह शौचालय में घुसने के चक्कर में स्लिप होकर दो बार नीचे गिर गई और उसे काफी चोटें भी आईं हैं।
शौचालयों में भरा है गंदा पानी
कर्नाटका से स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने पहुंची दिव्यांग महिला खिलाड़ी अन्नपूर्णा ने बताया कि बेड इतना हार्ड है कि रात को नींद तक नहीं आती है। वहीं शौचालय भी फ्रेंडली नहीं हैं। एक तो शौचालय का गेट छोटा है दूसरी तरफ उसमें गंदा पानी भर गया है। ऐसे में एक दिव्यांग खिलाड़ी शौचालय का इस्तेमाल कैसे करें। वहीं कई जगह शौचालय गंदे पड़े, उनकी सफाई नहीं होती।
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- हाथ फ्रैक्चर होने के बाद भी कर्नाटका से पहुंचा दिव्यांग खिलाड़ी, अव्यवस्था के कारण दूसरे हाथ में भी लगी चोट
- महिला दिव्यांग खिलाड़ी बोली, न तो शौचालय और न ही ठहरने की व्यवस्था
दीपक शाही
पंचकूला।
अपने मजबूत इरादों की बदौलत एक दिव्यांग खिलाड़ी हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद भी कर्नाटक से मीलों दूूर नेशनल पैरा एथलेटिक मीट में हिस्सा लेने के लिए पंचकूला पहुंच तो गया। लेकिन राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में फैली अव्यवस्थाओं के कारण दिव्यांग खिलाड़ी सड़क पर गिरकर घायल हो गया।
रविवार की सुबह खेल के मैदान में हिस्सा लेने पहुंचा ईश्वर बीच रास्ते में लड़खड़ाकर गिर पड़ा। क्योंकि उसके पास व्हील चेयर मौजूद नहीं था। वह ठीक तरीके से चल भी नहीं पा रहा था। जमीन पर गिरते ही उसके हाथों से खून टपकने लगा। खून देख उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। वहीं, इस दौरान सभी आयोजक खेल के मैदान में व्यस्त थे, उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया और वह 20 मिनट तक मदद के लिए आयोजकों की राह देखता रहा। वहीं कुछ राहगीरों की नजर उस पर पड़ने से उसे एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। तब जाकर उसका उपचार हुआ। ऐसी ही कई महिला दिव्यांग खिलाड़ी यहां पैरा एथलेटिक मीट में हिस्सा लेने के लिए पहुंची, जिन्हें माकूल प्रबंध नहीं होने के चलते समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
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व्हील चेयर वाले खिलाड़ियों के लिए नहीं अलग से व्यवस्था
देश के 28 राज्यों के करीब 1443 दिव्यांग प्रतिभागी हिस्सा लेने पहुंचे हैं, इनमें करीब चालीस फीसदी ऐसे खिलाड़ी हैं जो बिना व्हील चेयर के एक कदम भी चल नहीं सकते। ऐसे में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजकों ने ठहरने के लिए अलग-अलग व्यवस्था तो की है, लेकिन दिव्यांगों को जिस रोडवेज की बसों में विश्राम स्थान से खेल के मैदान तक लाने और ले जाने की व्यवस्था की गई है, उस बस में व्हील चेयर पर खिलाड़ी कैसे चढ़ पाएंगे। इस दिशा में आयोजकों का ध्यान क्यों नहीं गया।
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दो बार व्हील चेयर से नीचे गिरी दिव्यांग खिलाड़ी
दिव्यांग खिलाड़ी शायरा ने बताया कि व्हील चेयर के बगैर वह एक कदम चल नहीं सकती। मदद के लिए वह अपने भाई को लेकर पंचकूला आई थी, लेकिन दोनों के रहने की व्यवस्था अलग-अलग की गई है। वहीं शौचालय का गेट इतना छोटा है कि उसमें व्हील चेयर घुस नहीं पाता है। जिस वजह से सुबह वह शौचालय में घुसने के चक्कर में स्लिप होकर दो बार नीचे गिर गई और उसे काफी चोटें भी आईं हैं।
शौचालयों में भरा है गंदा पानी
कर्नाटका से स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने पहुंची दिव्यांग महिला खिलाड़ी अन्नपूर्णा ने बताया कि बेड इतना हार्ड है कि रात को नींद तक नहीं आती है। वहीं शौचालय भी फ्रेंडली नहीं हैं। एक तो शौचालय का गेट छोटा है दूसरी तरफ उसमें गंदा पानी भर गया है। ऐसे में एक दिव्यांग खिलाड़ी शौचालय का इस्तेमाल कैसे करें। वहीं कई जगह शौचालय गंदे पड़े, उनकी सफाई नहीं होती।