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ंचकूला की धरती पर ही कम समय में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने के बाद देश में नंबर वन रैंकिंग में काबिज हुई थी जयंती
Updated Sun, 25 Mar 2018 01:35 AM IST
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जयंती के हौसलों के आगे दिव्यांगता भी रह गई छोटी
- एक साल की उम्र में आग में झुलसने पर गंवाया था एक हाथ
- पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि करवा पाते बेटी के हाथों की सर्जरी
- पंचकूला सेक्टर तीन ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आज से शुरू हो रही 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप
दीपक शाही
पंचकूला।
100 से 150 रुपये कमाने वाले मजदूर पिता के पास उस समय इतने पैसे नहीं थे कि आग से झुलसी जयंती का इलाज करा सकें। नतीजतन एक साल की जयंती को अपना हाथ गंवाना पड़ा। लेकिन 2016 में पंचकूला की धरती पर एथलेटिक्स में उसने अपनी प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया कि तब से आज तक पूरे देश में पैरा एथलेटिक रैकिंग में शीर्ष पर काबिज है और अपनी बहनों से छोटी होने के बावजूद 19 वर्षीय जयंती उनकी शादी का जिम्मा भी उठा रही है।
पांच भाई और बहनों में से एक उड़ीसा निवासी जयंती बेहरा को एक बार फिर 25 अप्रैल से ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में शुरू हो रहे 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में इतिहास रचने का मौका मिला है। पिता की पूरे दिन की मेहनत-मजदूरी भी अपने बच्चों का पेट पालने समर्थ नहीं थी। लेकिन ये बेटी जब अपने पैरों पर चलने लगी, तो उस दिन से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज इस बेटी ने अपने पूरे परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देेश का गौरव बढ़ाया है और पूरे विश्व में हजारों दिव्यांग खिलाड़ियों पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।
भारत सरकार की ओर से हर माह मिलती है सहायता
पिता के पास इतने पैसे नहीं हैं, कि वे अपनी बेटी की शादी का खर्च उठा सकें। लेकिन उनकी दिव्यांग छोटी बेटी जयंती बेहरा की सोच तो देखिए उसने अपनी बड़ी बहन की शादी का खर्च का जिम्मा भी उठाया है। बता दें कि अभी पिछले साल 2017 में स्विट्जरलैंड में आयोजित जूनियर पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीत के बाद उड़ीसा सरकार ने बारह लाख रुपये जयंती बेहरा को दिए थे। वहीं भारत सरकार हर माह टॉप स्कीम के तहत 50 हजार रुपये हर माह देती है। इन्हीं पैसों का कुछ हिस्सा वह अपनी बहन की शादी में खर्च करेगी।
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खेल कैरियर तीन साल और रैकिंग देश में प्रथम:
महज तीन साल के खेल कैरियर में जयंती बेहरा पूरे देश में पैरा एथलेटिक रैंकिंग में पहले स्थान पर है, वहीं एशिया में तीसरे और विश्व में छठे स्थान पर काबिज है।
खेल को लेकर परिजन नहीं थे तैयार:
जयंती बेहरा के जीवन में गुरु द्रोण की भूमिका विष्णु प्रसाद ने निभाया है। कक्षा छठीं से विष्णु जयंती को खेल की ट्रेनिंग दे रहे हैं। पहले जयंती के घर वाले तैयार नहीं थे, क्योंकि उनके पास खाने के पैसे नहीं थे। बेटी को खेलने के लिए बाहर कैसे भेजते। लेकिन कोच विष्णु अपनी जिम्मेदारी पर जयंती को अपनी अकादमी में लेकर आए।
जयंती के तीन साल के खेल कैरियर में उपलब्धियों पर नजर
नेशनल
- 2016 पंचकूला ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित पैरा नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप एथलेटिक इवेंट 200, 400, 800 मीटर रेस में स्वर्ण पदक हासिल करने पर पूरे बेस्ट वुमेन एथलीट के खिताब से नवाजा गया।
- 2017 जयपुर में आयोजित पैरा नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप एथलेटिक इवेंट 100, 200, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। तीन इवेंट में जीत पर बेस्ट वुमेन एथलीट के खिताब से नवाजा।
इंटरनेशनल
- पहला, चीन के बीजिंग में 2017 में आयोजित चाइन ओपन ग्रैड पिक्स एथलेटिक चैंपियनशिप के इवेंट 400 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किया।
- लंदन में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में देश भर से लड़कियों में अकेली पहुंची जयंती ने छठा स्थान हासिल किया।
- स्विट्जरलैंड में आयोजित जूनियर पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप के एथलेटिक इवेंट 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 200 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक हासिल किया।
- दुबई में आयोजित यूथ एशिया पैरा गेम्स के एथलेटिक इवेंट 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 100 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक
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- एक साल की उम्र में आग में झुलसने पर गंवाया था एक हाथ
- पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि करवा पाते बेटी के हाथों की सर्जरी
- पंचकूला सेक्टर तीन ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आज से शुरू हो रही 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप
दीपक शाही
पंचकूला।
100 से 150 रुपये कमाने वाले मजदूर पिता के पास उस समय इतने पैसे नहीं थे कि आग से झुलसी जयंती का इलाज करा सकें। नतीजतन एक साल की जयंती को अपना हाथ गंवाना पड़ा। लेकिन 2016 में पंचकूला की धरती पर एथलेटिक्स में उसने अपनी प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया कि तब से आज तक पूरे देश में पैरा एथलेटिक रैकिंग में शीर्ष पर काबिज है और अपनी बहनों से छोटी होने के बावजूद 19 वर्षीय जयंती उनकी शादी का जिम्मा भी उठा रही है।
पांच भाई और बहनों में से एक उड़ीसा निवासी जयंती बेहरा को एक बार फिर 25 अप्रैल से ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में शुरू हो रहे 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में इतिहास रचने का मौका मिला है। पिता की पूरे दिन की मेहनत-मजदूरी भी अपने बच्चों का पेट पालने समर्थ नहीं थी। लेकिन ये बेटी जब अपने पैरों पर चलने लगी, तो उस दिन से उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज इस बेटी ने अपने पूरे परिवार ही नहीं बल्कि पूरे देेश का गौरव बढ़ाया है और पूरे विश्व में हजारों दिव्यांग खिलाड़ियों पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है।
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भारत सरकार की ओर से हर माह मिलती है सहायता
पिता के पास इतने पैसे नहीं हैं, कि वे अपनी बेटी की शादी का खर्च उठा सकें। लेकिन उनकी दिव्यांग छोटी बेटी जयंती बेहरा की सोच तो देखिए उसने अपनी बड़ी बहन की शादी का खर्च का जिम्मा भी उठाया है। बता दें कि अभी पिछले साल 2017 में स्विट्जरलैंड में आयोजित जूनियर पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीत के बाद उड़ीसा सरकार ने बारह लाख रुपये जयंती बेहरा को दिए थे। वहीं भारत सरकार हर माह टॉप स्कीम के तहत 50 हजार रुपये हर माह देती है। इन्हीं पैसों का कुछ हिस्सा वह अपनी बहन की शादी में खर्च करेगी।
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खेल कैरियर तीन साल और रैकिंग देश में प्रथम:
महज तीन साल के खेल कैरियर में जयंती बेहरा पूरे देश में पैरा एथलेटिक रैंकिंग में पहले स्थान पर है, वहीं एशिया में तीसरे और विश्व में छठे स्थान पर काबिज है।
खेल को लेकर परिजन नहीं थे तैयार:
जयंती बेहरा के जीवन में गुरु द्रोण की भूमिका विष्णु प्रसाद ने निभाया है। कक्षा छठीं से विष्णु जयंती को खेल की ट्रेनिंग दे रहे हैं। पहले जयंती के घर वाले तैयार नहीं थे, क्योंकि उनके पास खाने के पैसे नहीं थे। बेटी को खेलने के लिए बाहर कैसे भेजते। लेकिन कोच विष्णु अपनी जिम्मेदारी पर जयंती को अपनी अकादमी में लेकर आए।
जयंती के तीन साल के खेल कैरियर में उपलब्धियों पर नजर
नेशनल
- 2016 पंचकूला ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित पैरा नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप एथलेटिक इवेंट 200, 400, 800 मीटर रेस में स्वर्ण पदक हासिल करने पर पूरे बेस्ट वुमेन एथलीट के खिताब से नवाजा गया।
- 2017 जयपुर में आयोजित पैरा नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप एथलेटिक इवेंट 100, 200, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। तीन इवेंट में जीत पर बेस्ट वुमेन एथलीट के खिताब से नवाजा।
इंटरनेशनल
- पहला, चीन के बीजिंग में 2017 में आयोजित चाइन ओपन ग्रैड पिक्स एथलेटिक चैंपियनशिप के इवेंट 400 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किया।
- लंदन में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में देश भर से लड़कियों में अकेली पहुंची जयंती ने छठा स्थान हासिल किया।
- स्विट्जरलैंड में आयोजित जूनियर पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप के एथलेटिक इवेंट 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 200 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक हासिल किया।
- दुबई में आयोजित यूथ एशिया पैरा गेम्स के एथलेटिक इवेंट 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 100 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक